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Rewari News: सरकार के प्रगतिशील दृष्टिकोण से अवगत करवाया

Wed, 10 Jan 2024 11:33 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी Updated Wed, 10 Jan 2024 11:33 PM IST
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Informed about the progressive approach of the government
बावल। बावल कृषि महाविद्यालय में पादप आनुवंशिक संसाधन से संबंधित जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नई दिल्ली आईसीएआर राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो की टीम भी मौजूद रही।
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आईसीएआर व कृषि महाविद्यालय के साथ मिलकर 300 अनुसूचित जाति के किसानों व महिलाओं के लिए इस जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस अवसर पर हिसार एचएयू के सीसीएस कुलपति प्रो. बीआर कांबोज मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि आईसीएआर एनबीपीजीआर के निदेशक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह अपनी टीम के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए। वैज्ञानिकों की टीम में डॉ. राज कुमार गौतम, डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. सुरेंदर कौशिक, डॉ. संदीप कुमार और डॉ. प्रदीप शामिल थे। कृषि महाविद्यालय बावल के प्राचार्य डॉ. नरेश कौशिक ने सभी गणमान्य व्यक्तियों का औपचारिक स्वागत किया। उन्होंने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले सभी किसानों व महिलाओं का भी स्वागत किया।
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मुख्य अतिथि प्रो. बीआर कांबोज ने भारत सरकार के प्रगतिशील दृष्टिकोण से अवगत कराया। उन्होंने कौशल रोजगार योजना के बारे में बात की और प्रतिभागियों को अपनी व बच्चों की प्रतिभा को विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिभागियों के हुनर को निखारना और उनके कौशल विकास के लिए न सिर्फ उन्हें जागरूक करना, बल्कि उनके लिए स्वरोजगार उत्पन्न करने के लिए आर्थिक मदद के रूप में जरूरी सामन प्रदान करना भी है। इसके अलावा उन्होंने किसानों को अपने खेत में किसी भी कीटनाशक या उर्वरक के छिड़काव के उचित तरीके, समय, मात्रा का प्रयोग करने की सलाह दी। उनसे अनुरोध किया कि वे तकनीक के बारे में ठीक से जानकारी लेकर ही काम करें, ताकि बिना जरूरत के अत्यधिक रसायनों के इस्तेमाल से बचा जा सके, जिससे न सिर्फ जमीन की सेहत बल्कि पर्यावरण के संरक्षण को सुधारने में भी मदद मिलेगी। साथ ही हमारा पैसा भी बचेगा। अतिरिक्त रसायनों के उपयोग से होने वाले हानिकारक प्रभावों से भी बचा जा सके।
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प्रतिभागियों को सिलाई मशीन बांटी

डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि हमारे पास विश्व में अमेरिका के बाद सबसे ज्यादा जननद्रव्य का संरक्षण है जो हमारे देश के लिए गौरव की बात है। इन जननद्रव्यों का प्रयोग आईसीएआर संस्थानों व कृषि विश्वविद्यालय विभिन्न फसलों की उन्नतिशील किस्में विकसित कर उनकी पैदावार बढ़ने के लिए एकीकृत किया जाता है। इसके लिए समय-समय पर ये संस्थान इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय की पत्रिका का विमोचन किया। इस अवसर पर एनबीपीजीआर नई दिल्ली से आए वैज्ञानिकों डॉ. राज कुमार गौतम, डॉ. प्रवीण कुमार सिंह, डॉ. राकेश सिंह, डॉ. सुरेंद्र कौशिक ने अपने-अपने विभाग के बारे में जानकारी दी। डॉ. मुकेश कुमार ने बागवानी फसलों की जानकारी दी। वहीं, 50 प्रतिभागियों को सिलाई मशीन, 50 को अनाज भण्डारण की टंकी, 100 स्प्रे पंप व 100 गार्डन टूल बांटे गए। क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव ने मुख्य अतिथि, विशिष्ट अतिथि व अन्य वैज्ञानिकों और सभी प्रतिभागियों का धन्यवाद किया।
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