{"_id":"60b132b18ebc3ea70655af60","slug":"farmers-protest-border-rewari-news-rtk6104914193","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी, बढ़ने लगी संख्या","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना जारी, बढ़ने लगी संख्या
विज्ञापन
रेवाड़ी। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली-जयपुर हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर किसानों का धरना शुक्रवार को 183वें दिन भी जारी रहा। किसान नेताओं ने कहा कि कृषि कानून वापस होने के बाद ही घर लौटेंगे। इसके साथ ही धरनास्थल पर समूह चर्चाओं का दौर भी जारी रहा। धरनास्थल पर किसानों की संख्या में बढ़ोतरी होने लगी है।
बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत, डॉ संजय माधव व अमर राम ने कहा कि किसानों का यह आंदोलन चाहे 6 महीने का हो गया हो, लेकिन किसानों का हौसला बरकरार है। जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी आंदोलन लगातार जारी रहेगा। सरकार इसे जितना खींचना चाहे वह कर सकती है, परंतु इसमें सरकार का ही राजनीतिक नुकसान है। किसान को यह समझ आ चुका है कि यह कानून किसानी पर बहुत गहरा हमला है, इसलिए किसानों को भी मजबूती से लड़ना है। संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार से भी अपील करता है कि किसानों को बदनाम करने की साजिशों के बजाय तीनों कृषि कानून वापस ले, एमएसपी पर कानून बनाने की योजना बनाए, जिससे किसान भी अपने घर वापस जा सकें। लेकिन भाजपा-आरएसएस सरकार जानबूझकर किसानों की मांग पूरी नहीं कर रही है और लगातार किसान आंदोलन को बदनाम करने की चेष्टा कर रही है। उन्होंने कहा कि आज कोरोना महामारी से निपटने में केंद्र सरकार विफल साबित हो चुकी है। कोरोना पीड़ितों के लिए ऑक्सीजन, आईसीयू बेड और आवश्यक दवाइयों का प्रबंधन नहीं हो रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
बता दें कि दिल्ली की सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए दिल्ली कूच कर रहे राजस्थान के किसानों को हरियाणा पुलिस ने हाईवे स्थित खेड़ा बॉर्डर पर रोक दिया था। उसके बाद से राजस्थान सहित हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों के किसानों ने यहीं पर धरना शुरू कर दिया था।
विज्ञापन
किसानों को संबोधित करते हुए किसान नेता रामकिशन महलावत, डॉ संजय माधव व अमर राम ने कहा कि किसानों का यह आंदोलन चाहे 6 महीने का हो गया हो, लेकिन किसानों का हौसला बरकरार है। जब तक कृषि कानूनों को सरकार वापस नहीं लेगी आंदोलन लगातार जारी रहेगा। सरकार इसे जितना खींचना चाहे वह कर सकती है, परंतु इसमें सरकार का ही राजनीतिक नुकसान है। किसान को यह समझ आ चुका है कि यह कानून किसानी पर बहुत गहरा हमला है, इसलिए किसानों को भी मजबूती से लड़ना है। संयुक्त किसान मोर्चा केंद्र सरकार से भी अपील करता है कि किसानों को बदनाम करने की साजिशों के बजाय तीनों कृषि कानून वापस ले, एमएसपी पर कानून बनाने की योजना बनाए, जिससे किसान भी अपने घर वापस जा सकें। लेकिन भाजपा-आरएसएस सरकार जानबूझकर किसानों की मांग पूरी नहीं कर रही है और लगातार किसान आंदोलन को बदनाम करने की चेष्टा कर रही है। उन्होंने कहा कि आज कोरोना महामारी से निपटने में केंद्र सरकार विफल साबित हो चुकी है। कोरोना पीड़ितों के लिए ऑक्सीजन, आईसीयू बेड और आवश्यक दवाइयों का प्रबंधन नहीं हो रहा है।
विज्ञापन