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Rewari News: पीपीपी में एआई तकनीक जोड़ने का प्रयास, तलाशी जा रही संभावनाएं,
Tue, 17 Feb 2026 11:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 17 Feb 2026 11:12 PM IST
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नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम में एआई विशेषज्ञों से बातचीत करते डॉ. सतीश खोला
रेवाड़ी। परिवार पहचान प्राधिकरण के स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला ने अपनी टीम के साथ नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित कार्यक्रम इंडिया एआई इंपैक्ट 2026 में भाग लिया। उन्होंने एआई विशेषज्ञों से परिवार पहचान पत्र प्रणाली में एआई तकनीक के उपयोग की संभावनाओं, व्यावहारिक पहलुओं और लाभ के बारे में जानकारी ली।
डॉ. सतीश खोला ने कहा कि पीपीपी में एआई तकनीक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एआई इंपैक्ट में यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार एआई आधारित समाधान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक सरल, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बना सकते हैं।
एआई सिस्टम से सरकारी विभागों को यह जानने में मदद मिलेगी कि कौन सी योजना किस क्षेत्र में कितनी प्रभावी है। किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन नागरिकों तक लाभ नहीं पहुंच पाया है।
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विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम, ऑटोमेटिक अलर्ट, रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग और डिजिटल सत्यापन जैसे समाधान लागू करके हरियाणा सरकार नागरिक सेवाओं को और अधिक आधुनिक बना सकती है।
डॉ. सतीश खोला ने कहा कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी, योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी। एआई तकनीक के माध्यम से डेटा विश्लेषण अधिक तेज और सटीक हो सकेगा, जिससे लाभार्थियों की पहचान, पात्रता सत्यापन तथा शिकायत निवारण जैसी प्रक्रियाएं पहले से अधिक सुगम हो जाएंगी।
एआई तकनीक से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
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डेटा में संभावित त्रुटियों को पहचानना होगा आसान
डॉ. सतीश खोला ने बताया कि परिवार पहचान पत्र एक ऐसी महत्वपूर्ण व्यवस्था है जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिकों का पारिवारिक डेटा एकत्रित कर सरकारी योजनाओं के लाभ का सही निर्धारण किया जाता है। इस प्रणाली में एआई का उपयोग होने से डेटा में संभावित त्रुटियों को पहचानना आसान होगा। साथ ही डुप्लीकेट डेटा, गलत जानकारी या अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने की संभावना पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।
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डॉ. सतीश खोला ने कहा कि पीपीपी में एआई तकनीक जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसकी संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। उन्होंने बताया कि एआई इंपैक्ट में यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार एआई आधारित समाधान सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को और अधिक सरल, तेज, सुरक्षित और पारदर्शी बना सकते हैं।
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एआई सिस्टम से सरकारी विभागों को यह जानने में मदद मिलेगी कि कौन सी योजना किस क्षेत्र में कितनी प्रभावी है। किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है और किन नागरिकों तक लाभ नहीं पहुंच पाया है।
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विशेषज्ञों ने बताया कि एआई आधारित स्मार्ट सिस्टम, ऑटोमेटिक अलर्ट, रियल टाइम डेटा मॉनिटरिंग और डिजिटल सत्यापन जैसे समाधान लागू करके हरियाणा सरकार नागरिक सेवाओं को और अधिक आधुनिक बना सकती है।
डॉ. सतीश खोला ने कहा कि एआई के उपयोग से प्रशासनिक कार्यों की गुणवत्ता बढ़ेगी, योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी। एआई तकनीक के माध्यम से डेटा विश्लेषण अधिक तेज और सटीक हो सकेगा, जिससे लाभार्थियों की पहचान, पात्रता सत्यापन तथा शिकायत निवारण जैसी प्रक्रियाएं पहले से अधिक सुगम हो जाएंगी।
एआई तकनीक से सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के साथ-साथ जवाबदेही भी बढ़ेगी। इससे जनता को बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
डेटा में संभावित त्रुटियों को पहचानना होगा आसान
डॉ. सतीश खोला ने बताया कि परिवार पहचान पत्र एक ऐसी महत्वपूर्ण व्यवस्था है जिसके माध्यम से प्रदेश के नागरिकों का पारिवारिक डेटा एकत्रित कर सरकारी योजनाओं के लाभ का सही निर्धारण किया जाता है। इस प्रणाली में एआई का उपयोग होने से डेटा में संभावित त्रुटियों को पहचानना आसान होगा। साथ ही डुप्लीकेट डेटा, गलत जानकारी या अपात्र लोगों द्वारा लाभ लेने की संभावना पर भी प्रभावी नियंत्रण संभव हो सकेगा।