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Rewari News: मौसम में ज्यादा नमी बढ़ने से ग्वार फसल पर सफेद मक्खी व हरा तेला का प्रभाव बढ़ा

Fri, 01 Aug 2025 11:56 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 01 Aug 2025 11:56 PM IST
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Due to increased humidity in the weather, the effect of white fly and green aphid increased on the guar crop
गांव बासदूदा में ग्वार फसल पर फसल हेल्थ प्रशिक्षण शिविर में किसानों को जानकारी देते हुए कृषि वि - फोटो : samvad
कुंड। गांव बासदूदा में शुक्रवार को ग्वार फसल पर कृषि विभाग व हिंदुस्तान गम एंड केमिकल के तत्वावधान में ग्वार फसल हेल्थ प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव ने व कृषि विभाग खोल, कृषि पर्यवेक्षक डॉ. देवेन्द्र सिंह सिंह के तत्वावधान में यह कृषि गोष्ठी का ग्वार विशेषज्ञ के साथ मिलकर आयोजित की गई।
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शिविर में मौजूद किसानों को पांच स्ट्रेप्टोसाइक्लिन पाउच तथा स्प्रे के नुकसान से बचने के लिए हर किसान को हिन्दुस्तान गम एंड केमिकल्स भिवानी की तरफ से मास्क भी दिए गए। रिटायर्ड कृषि वैज्ञानिक डॉ. जगदेव सिंह ने भी किसानों को जानकारी दी।
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प्रगतिशील किसान राजेन्द्र सिंह का विशेष योगदान रहा। डॉ. बीडी यादव ने कहा कि ज्यादा बारिश होने पर मौसम में ज्यादा नमी बढ़ने से ग्वार फसल पर सफेद मक्खी व हरा तेला तथा बीमारियों का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता जा रहा है। किसानों को कीटों व बीमारियों को ठीक से पहचान कर आवश्यकतानुसार दवाओं का उचित चयन करके प्रयोग करना चाहिए। किसान दवा विक्रेताओं से दवा खरीद कर स्प्रे करते है और उसका कई बाद नुकसान होने का डर रहता है।
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दवाई खरीदते समय पक्का बिल अवश्य लें तथा दवा की बोतल पर समाप्ति तिथि अवश्य जांच करें और बिल कटवाते समय बिल में दवा का बैच नंबर अवश्य लिखवाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि ग्वार के पत्ते किनारी से पीला व काला होने से पहले करें उपाय गोष्ठी के दौरान किसानों से रूबरू होने के बाद पता लगा कि ज्यादातर किसान ग्वार फसल की कीटों व बीमारियां जब 25 से 30 प्रतिशत प्रकोप हो जाता है उस समय किसान स्प्रे करने की सोचता है। उस अवस्था तक किसानों का काफी नुकसान हो चुका होता है।

ग्वार के पत्तों पर लगने वाली बीमारी से पाएं छुटकारा
यादव ने किसानों को बताया कि ग्वार के पत्तों का किनारी से पीलापन, काला होना, जीवाणु अंगभारी व फंगस रोग आदि बीमारी दिखाई देने से पहले रोकथाम के लिए 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाइंक्लिन व 400 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

इन बीमारियों के साथ हरा तेला व सफेद कीड़ों का प्रकोप हो तो उसकी पहचान करके इसके नियंत्रण के लिए 250 मिली मैलाथियान-50 ईसी. या डाइमेथोएट (रोगोर) 30 ईसी प्रति एकड़ उपरोक्त घोल में मिलाकर पहला छिड़काव बिजाई के 40-45 दिन पर तथा अगला स्प्रे इसके 12-15 दिन अन्तराल पर करें। ऐसा करने से ग्वार की फसल की पैदावार पर अनुकूल असर पड़ता है।
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