{"_id":"69862c6aad35aa301707049e","slug":"dr-dharambir-yadav-receives-sardar-patel-best-faculty-award-rewari-news-c-198-1-rew1001-233200-2026-02-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rewari News: डॉ. धर्मबीर यादव को मिला सरदार पटेल सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी पुरस्कार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rewari News: डॉ. धर्मबीर यादव को मिला सरदार पटेल सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी पुरस्कार
Fri, 06 Feb 2026 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 06 Feb 2026 11:31 PM IST
विज्ञापन
सरदार पटेल सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी पुरस्कार हासिल करते डॉ. धर्मबीर यादव। स्रोत : विवि
बावल। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. धर्मबीर यादव को विश्वविद्यालय के 57वें स्थापना दिवस पर सरदार पटेल सर्वश्रेष्ठ फैकल्टी पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यह सम्मान कुलपति प्रो. बलदेव राज कांबोज ने दिया।
यह पुरस्कार उन्हें उनके उत्कृष्ट शोध कार्य, उच्च स्तरीय शोध पत्रों, अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, नवीन तकनीकों के विकास, किसानों तक तकनीक के प्रभावी प्रसार तथा कृषि शिक्षा में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया।
बावल केंद्र से पूर्व डॉ. धर्मबीर यादव करनाल में प्रधान वैज्ञानिक एवं क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यरत रहे। वहां उन्होंने धान-गेहूं फसल चक्र में खरपतवार प्रबंधन, पराली प्रबंधन, धान की सीधी बुवाई और जीरो टिलेज बुवाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया।
विज्ञापन
बावल में उन्होंने प्रयोगशालाओं के ढांचागत विकास के साथ-साथ किसानों को जीवाणु खाद एवं उन्नत बीज उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके मार्गदर्शन में केंद्र द्वारा मूंगफली की नई किस्म जीएनएच-804 विकसित की गई है। दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा की परिस्थितियों के अनुरूप नवीन शोध कार्य भी उनके नेतृत्व में संचालित हो रहे हैं।
डॉ. धर्मबीर यादव के नाम 300 से अधिक प्रकाशन दर्ज हैं, जिनमें उच्च स्तरीय शोध पत्र, पुस्तकें एवं कृषक साहित्य शामिल हैं। उनके शोध के आधार पर 35 कृषि तकनीकों का विकास हुआ है, जो हरियाणा के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही हैं।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के साथ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं का संचालन किया है तथा शोध कार्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, अमेरिका और चेक रिपब्लिक की यात्रा भी की है।
डॉ. धर्मबीर यादव को डॉ. खुशीराम, तेजराम समेत अन्य लोगों ने बधाई दी है।
विज्ञापन
यह पुरस्कार उन्हें उनके उत्कृष्ट शोध कार्य, उच्च स्तरीय शोध पत्रों, अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं, नवीन तकनीकों के विकास, किसानों तक तकनीक के प्रभावी प्रसार तथा कृषि शिक्षा में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए दिया गया।
विज्ञापन
बावल केंद्र से पूर्व डॉ. धर्मबीर यादव करनाल में प्रधान वैज्ञानिक एवं क्षेत्रीय निदेशक के रूप में कार्यरत रहे। वहां उन्होंने धान-गेहूं फसल चक्र में खरपतवार प्रबंधन, पराली प्रबंधन, धान की सीधी बुवाई और जीरो टिलेज बुवाई जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया।
विज्ञापन
बावल में उन्होंने प्रयोगशालाओं के ढांचागत विकास के साथ-साथ किसानों को जीवाणु खाद एवं उन्नत बीज उपलब्ध करवाने पर विशेष ध्यान दिया। उनके मार्गदर्शन में केंद्र द्वारा मूंगफली की नई किस्म जीएनएच-804 विकसित की गई है। दक्षिण-पश्चिमी हरियाणा की परिस्थितियों के अनुरूप नवीन शोध कार्य भी उनके नेतृत्व में संचालित हो रहे हैं।
डॉ. धर्मबीर यादव के नाम 300 से अधिक प्रकाशन दर्ज हैं, जिनमें उच्च स्तरीय शोध पत्र, पुस्तकें एवं कृषक साहित्य शामिल हैं। उनके शोध के आधार पर 35 कृषि तकनीकों का विकास हुआ है, जो हरियाणा के किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो रही हैं।
उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और फिलीपींस के साथ अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं का संचालन किया है तथा शोध कार्यों के लिए ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, जापान, अमेरिका और चेक रिपब्लिक की यात्रा भी की है।
डॉ. धर्मबीर यादव को डॉ. खुशीराम, तेजराम समेत अन्य लोगों ने बधाई दी है।