{"_id":"623cb48278a74438737e88ad","slug":"dharuhera-s-phc-struggling-with-staff-shortage-patient-upset-rewari-news-rtk6419638170","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्टाफ की कमी से जूझ रहा धारूहेड़ा का पीएचसी, मरीज परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्टाफ की कमी से जूझ रहा धारूहेड़ा का पीएचसी, मरीज परेशान
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
धारूहेड़ा। सरकार की ओर से करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी धारूहेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) पर स्वास्थ्यकर्मियों की कमी बनी हुई है। यहां सिर्फ दो चिकित्सक ही तैनात हैं। इसकी वजह से मरीज परेशान हो रहे हैं। उन्हेें समय पर समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। स्वास्थ्य केंद्र पर कस्बा के साथ प्रखंड के करीब 50 हजार की आबादी की जिम्मेदारी है। चिकित्सकों के अनुसार क्षेत्र में सब सेंटर बनने चाहिए, ताकि मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके।
केंद्र पर सीमावर्ती प्रखंडों में जुनियावास, कापड़ीवास, गुर्जर घटाल के साथ मालपुरा, गढ़ी, महेश्वरी, खड़खड़ा, नंनदरामपुर बास गांव के मरीज भी यहां प्रतिदिन पहुंचते हैं। इसके कारण मरीजों का लोड अधिक बढ़ जाता है। प्रतिदिन 250 से लेकर 300 मरीजों के जांच का कार्य इस पीएचसी में होता है। संसाधनों की बात करें तो, इस पीएचसी में कम से कम चार चिकित्सकों की आवश्यकता है, पर दो चिकित्सकों के सहारे ही ओपीडी का कार्य संचालित होता है। इसमें एक प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जय प्रकाश के अलावा एक अन्य चिकित्सक हैं। जिनकी देखरेख में मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा टीबी की जांच के लिए लैब टेक्नीशियन के अभाव में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
---------------------------
हर माह आते हैं डिलिवरी के 70 केस
पीएचसी में डिलिवरी के लिए तीन एएनएम तैनात हैं। प्रतिमाह कम से कम 70 महिलाओं की डिलिवरी के केस आते हैं। इससे यहां स्टाफ के अभाव के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। चिकित्सकों के अनुसार यहां पर आशा वर्करों के न होने के कारण भी चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। धारूहेड़ा की आबादी को देखते हुए तीन सब स्टेशन की आवश्यकता है। एक पीएचसी में लगभग 30 हजार की आबादी की स्वास्थ्य सुविधा देने की क्षमता होती हैं। ऐसे में करीब 50 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देना एक चुनौती भरा है। धारुहेड़ा मुख्य बाजार स्थित पीएचसी तक एम्बुलेंस को पहुंचाने के लिए घंटों ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता हैं। लोगों ने बताया कि सोहना रोड से पीएचसी तक दुकानदारों द्वारा सड़कों पर गाड़ी पार्क कर दिया जाता हैं और बाजार होने के कारण लोगों की आवाजाही भी बनी रहती है जिससे वहां से निकला मुश्किल होता है।
विज्ञापन
---------------------------
कोट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फिलहाल ऐसी कोई कमी नहीं है। केंद्र में आशा वर्करों की कमी है। पीएचसी में आने वाले सभी मरीजों का इलाज करना हमारा कर्तव्य हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए सभी को पीएचसी में दिए जाने वाले हर सुविधा उपलब्ध करवाई जाती हैं।
-डॉ. जय प्रकाश, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी
विज्ञापन
केंद्र पर सीमावर्ती प्रखंडों में जुनियावास, कापड़ीवास, गुर्जर घटाल के साथ मालपुरा, गढ़ी, महेश्वरी, खड़खड़ा, नंनदरामपुर बास गांव के मरीज भी यहां प्रतिदिन पहुंचते हैं। इसके कारण मरीजों का लोड अधिक बढ़ जाता है। प्रतिदिन 250 से लेकर 300 मरीजों के जांच का कार्य इस पीएचसी में होता है। संसाधनों की बात करें तो, इस पीएचसी में कम से कम चार चिकित्सकों की आवश्यकता है, पर दो चिकित्सकों के सहारे ही ओपीडी का कार्य संचालित होता है। इसमें एक प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जय प्रकाश के अलावा एक अन्य चिकित्सक हैं। जिनकी देखरेख में मरीजों का इलाज किया जाता है। इसके अलावा टीबी की जांच के लिए लैब टेक्नीशियन के अभाव में लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ता है।
विज्ञापन
---------------------------
हर माह आते हैं डिलिवरी के 70 केस
पीएचसी में डिलिवरी के लिए तीन एएनएम तैनात हैं। प्रतिमाह कम से कम 70 महिलाओं की डिलिवरी के केस आते हैं। इससे यहां स्टाफ के अभाव के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। चिकित्सकों के अनुसार यहां पर आशा वर्करों के न होने के कारण भी चिकित्सकों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। धारूहेड़ा की आबादी को देखते हुए तीन सब स्टेशन की आवश्यकता है। एक पीएचसी में लगभग 30 हजार की आबादी की स्वास्थ्य सुविधा देने की क्षमता होती हैं। ऐसे में करीब 50 हजार की आबादी को स्वास्थ्य सुविधा देना एक चुनौती भरा है। धारुहेड़ा मुख्य बाजार स्थित पीएचसी तक एम्बुलेंस को पहुंचाने के लिए घंटों ट्रैफिक जाम से जूझना पड़ता हैं। लोगों ने बताया कि सोहना रोड से पीएचसी तक दुकानदारों द्वारा सड़कों पर गाड़ी पार्क कर दिया जाता हैं और बाजार होने के कारण लोगों की आवाजाही भी बनी रहती है जिससे वहां से निकला मुश्किल होता है।
विज्ञापन
---------------------------
कोट
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में फिलहाल ऐसी कोई कमी नहीं है। केंद्र में आशा वर्करों की कमी है। पीएचसी में आने वाले सभी मरीजों का इलाज करना हमारा कर्तव्य हैं, जिसको ध्यान में रखते हुए सभी को पीएचसी में दिए जाने वाले हर सुविधा उपलब्ध करवाई जाती हैं।
-डॉ. जय प्रकाश, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी