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Rewari News: बुढ़ापा पेंशन पर लगी शर्तें खत्म करने के लिए कानून बनाने की मांग
Sat, 14 Feb 2026 11:52 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 14 Feb 2026 11:52 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने बुढ़ापा पेंशन पर लगाई गई शर्तों को समाप्त करने के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग की है।
पार्टी के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह और वरिष्ठ नेता अनूप सिंह मातनहेल ने संयुक्त बयान में कहा कि अनुचित शर्तों के कारण प्रदेशभर में बुजुर्गों की पेंशन बंद कर दी गई थी जिससे व्यापक जन आक्रोश पैदा हुआ।
नेताओं ने कहा कि जनदबाव के चलते सरकार को रोकी गई पेंशन दोबारा शुरू करनी पड़ी लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लगाई गई शर्तें स्थायी रूप से समाप्त की गई हैं या नहीं।
उन्होंने मांग की कि सरकार विधिक प्रावधान कर आधिकारिक अधिसूचना जारी करे ताकि भविष्य में बुजुर्गों पर ऐसी शर्तें न थोपी जा सकें। पार्टी ने बुढ़ापा पेंशन को बढ़ाकर 5100 रुपये प्रतिमाह करने की भी मांग उठाई।
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इसके अलावा निजी बसों में विद्यार्थियों को मिलने वाली किराया रियायत और बुजुर्गों के लिए आधा किराया सुविधा पुनः लागू करने की मांग की गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी विधानसभा सत्र से पहले मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो गांवों व शहरी कॉलोनियों में संघर्ष समितियां गठित कर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।
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रेवाड़ी। एसयूसीआई कम्युनिस्ट ने बुढ़ापा पेंशन पर लगाई गई शर्तों को समाप्त करने के लिए सरकार से कानून बनाने की मांग की है।
पार्टी के राज्य सचिव राजेंद्र सिंह और वरिष्ठ नेता अनूप सिंह मातनहेल ने संयुक्त बयान में कहा कि अनुचित शर्तों के कारण प्रदेशभर में बुजुर्गों की पेंशन बंद कर दी गई थी जिससे व्यापक जन आक्रोश पैदा हुआ।
नेताओं ने कहा कि जनदबाव के चलते सरकार को रोकी गई पेंशन दोबारा शुरू करनी पड़ी लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि लगाई गई शर्तें स्थायी रूप से समाप्त की गई हैं या नहीं।
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उन्होंने मांग की कि सरकार विधिक प्रावधान कर आधिकारिक अधिसूचना जारी करे ताकि भविष्य में बुजुर्गों पर ऐसी शर्तें न थोपी जा सकें। पार्टी ने बुढ़ापा पेंशन को बढ़ाकर 5100 रुपये प्रतिमाह करने की भी मांग उठाई।
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इसके अलावा निजी बसों में विद्यार्थियों को मिलने वाली किराया रियायत और बुजुर्गों के लिए आधा किराया सुविधा पुनः लागू करने की मांग की गई।
उन्होंने चेतावनी दी कि आगामी विधानसभा सत्र से पहले मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो गांवों व शहरी कॉलोनियों में संघर्ष समितियां गठित कर व्यापक आंदोलन चलाया जाएगा।