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Rewari News: डी. संजीवैया की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनाई गई
Sat, 14 Feb 2026 11:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 14 Feb 2026 11:35 PM IST
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फोटो : डी. संजीवैया की 105वीं जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित करते सेवा स्तंभ के पदाधिकारी। स्रोत: स
रेवाड़ी। मॉडल टाउन स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर पार्क एवं पुस्तकालय में सेवा स्तंभ के संस्थापक डी. संजीवैया की 105वीं जयंती मनाई गई। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि डी. संजीवैया ने अपने मंत्रित्व काल में कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगत सिंह बौद्ध ने की। संचालन वरिष्ठ उपप्रधान आरपी सिंह दहिया ने किया। प्रसाद वितरण की व्यवस्था देवेंद्र ने की। जिला प्रधान भगत सिंह बौद्ध ने कहा कि डी. संजीवैया का जन्म 14 फरवरी 1921 को आंध्र प्रदेश के करनूल जिले के पेड़ापडू गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था।
उन्होंने बचपन में पिता के निधन के बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री प्राप्त की और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1968 में उन्होंने सेवा स्तंभ की स्थापना की तथा 20 जून 1969 को इसका विधिवत पंजीकरण हुआ। यह संगठन आज देश के 20-21 राज्यों में सक्रिय है।
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उन्होंने बताया कि डी. संजीवैया 11 जनवरी 1960 को आंध्र प्रदेश के पहले अनुसूचित जाति वर्ग से मुख्यमंत्री बने और 12 मार्च 1962 तक इस पद पर रहे। वे स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अनुसूचित जाति अध्यक्ष भी बने।
उन्होंने श्रम मंत्री, कानून मंत्री सहित विभिन्न केंद्रीय पदों पर रहकर सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। समारोह में सह सचिव नरेंद्र मेहरा, सुमेर सिंह, अनिल चांग, सेवानिवृत असिस्टेंट कमांडेंट राम सिंह, समाजसेवी रमेश ठेकेदार, जगदीश प्रसाद गहलोत, नरेश गुरावड़ा, संदीप रोहड़ाई, मामराज सुंदरोज सहित अनेक लोग मौजूद रहे।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष भगत सिंह बौद्ध ने की। संचालन वरिष्ठ उपप्रधान आरपी सिंह दहिया ने किया। प्रसाद वितरण की व्यवस्था देवेंद्र ने की। जिला प्रधान भगत सिंह बौद्ध ने कहा कि डी. संजीवैया का जन्म 14 फरवरी 1921 को आंध्र प्रदेश के करनूल जिले के पेड़ापडू गांव में एक साधारण परिवार में हुआ था।
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उन्होंने बचपन में पिता के निधन के बावजूद उन्होंने संघर्ष करते हुए मद्रास लॉ कॉलेज से कानून की डिग्री प्राप्त की और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय भूमिका निभाई। वर्ष 1968 में उन्होंने सेवा स्तंभ की स्थापना की तथा 20 जून 1969 को इसका विधिवत पंजीकरण हुआ। यह संगठन आज देश के 20-21 राज्यों में सक्रिय है।
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उन्होंने बताया कि डी. संजीवैया 11 जनवरी 1960 को आंध्र प्रदेश के पहले अनुसूचित जाति वर्ग से मुख्यमंत्री बने और 12 मार्च 1962 तक इस पद पर रहे। वे स्वतंत्र भारत में राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अनुसूचित जाति अध्यक्ष भी बने।
उन्होंने श्रम मंत्री, कानून मंत्री सहित विभिन्न केंद्रीय पदों पर रहकर सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए। समारोह में सह सचिव नरेंद्र मेहरा, सुमेर सिंह, अनिल चांग, सेवानिवृत असिस्टेंट कमांडेंट राम सिंह, समाजसेवी रमेश ठेकेदार, जगदीश प्रसाद गहलोत, नरेश गुरावड़ा, संदीप रोहड़ाई, मामराज सुंदरोज सहित अनेक लोग मौजूद रहे।