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10 लाख खर्च, फिर भी शहर की सुरक्षा चाक चौबंद नहीं
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रेवाड़ी। शहर के प्रमुख स्थानों पर कोई भी अपराध होने के बाद उसके खुलासे को पुलिस की मदद के लिए शहर में 10 लाख रुपये की कीमत से लगाए गए छह सीसीटीवी कैमरे बंद हो गए। कैमरे बंद होने के बाद शहर में आम दिनों होने वाली लूट, चेन स्नेचिंग आदि की वारदातें पुलिस के लिए सिर दर्द बन रही हैं। अपराध करने के बाद अपराधी आसानी से भाग जा रहे हैं, कैमरे सुचारु होते तो उनकी तस्वीर कैद हो जाती और पुलिस आसानी से उन तक पहुंच जाती।
बढ़ती आपराधिक घटनाएं देखते हुए पीतल नगरी में पिछले चार साल पहले छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिसमें 10 लाख रुपये खर्च हुए। कुछ समय तो व्यवस्था ठीक चली। इसके बाद देखरेख के अभाव में सभी कैमरे बंद हो गए हैं। इससे न सिर्फ होने वाली आपराधिक वारदातों पर पुलिस पर्दा उठा पा रही है, बल्कि यातायात नियमों का पालन न करने वालों की तस्वीर भी इसमें कैद नहीं हो पा रही है। यही नहीं पुलिस थाना में सर्विलांस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था। कंट्रोल रूम भी रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। हालांकि कंट्रोल रूम में तैनात पुलिस कर्मियों इसको लेकर नगर परिषद को रिमाइंडर भी भेजा है, लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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बढ़ती आपराधिक घटनाएं देखते हुए पीतल नगरी में पिछले चार साल पहले छह सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, जिसमें 10 लाख रुपये खर्च हुए। कुछ समय तो व्यवस्था ठीक चली। इसके बाद देखरेख के अभाव में सभी कैमरे बंद हो गए हैं। इससे न सिर्फ होने वाली आपराधिक वारदातों पर पुलिस पर्दा उठा पा रही है, बल्कि यातायात नियमों का पालन न करने वालों की तस्वीर भी इसमें कैद नहीं हो पा रही है। यही नहीं पुलिस थाना में सर्विलांस कंट्रोल रूम स्थापित किया गया था। कंट्रोल रूम भी रखरखाव के अभाव में बदहाल हो चुका है। हालांकि कंट्रोल रूम में तैनात पुलिस कर्मियों इसको लेकर नगर परिषद को रिमाइंडर भी भेजा है, लेकिन नगर परिषद की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
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