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बिना सड़क बनाए हो गई लाखों की पेमेंट, सरकार को लगा चूना
Updated Sat, 18 Aug 2018 01:12 AM IST
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डी-प्लान में गोलमाल : सड़कें बनाई नहीं कर दी लाखों की पेमेंट
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। करीब दो साल पहले नगर परिषद द्वारा डी-प्लान के तहत प्रस्तावित लाखों के विकास कार्यों में भारी गोलमाल का मामला सामने आया है। इस योजना के तहत तीन वार्डों में करीब 12 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें बनाई ही नहीं गईं लेकिन मैटेरियल सप्लाई दिखाकर उनकी ज्यादातर पेमेंट कर दी गई। सड़कें नहीं बनने की पुष्टि जहां इस बात से हो रही है कि नगर परिषद ने अभी तक उक्त कार्यों का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्लानिंग अधिकारी कार्यालय को नहीं दिया है। पार्षद भी इसका प्रमाण दे रहे हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया, यह एक बड़ा सवाल है, जो गड़बड़झाला की तरफ इशारा करता है। नप के वर्तमान अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि तत्कालीन अधिकारी को ही प्रमाण पत्र देना चाहिए। उनका स्थानांतरण हो चुका है। ये काम उनके समय के नहीं है। मामले की जांच हो तो इस गोलमाल का पर्दाफाश हो सकता है।
वर्ष दो साल में नगर परिषद ने डी-प्लान के तहत शहर में करीब 40 लाख रुपये की लागत से काम कराए थे। इसी योजना में कुछ काम राव तुलाराम स्टेडियम में भी हुए हैं। योजना के तहत तीन ऐसी सड़कें है, जो बनाई जानी थी, लेकिन उन्हें नहीं बनाया गया। इनमें से करीब पांच लाख रुपये की लागत से एक सड़क जहां शक्ति नगर में बननी थी, वहीं दूसरी करीब ढाई लाख की लागत से दिल्ली रोड से घीसा की ढाणी तक बनाई जानी थी। इसी प्रकार करीब चार लाख रुपये की एक सड़क तुर्कियावास रोड पर बनाई जानी थी। सूत्रों का कहना है कि बेशक सड़कें नहीं बनाई गई, लेकिन मैटेरियल खरीदने के नाम पर उनकी 70 प्रतिशत से ज्यादातर पेमेंट हो चुकी है। अब कुछ पेमेंट बाकी है, जो नगर परिषद द्वारा दिए जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र पर टिकी है। नगर परिषद की तरफ से उपरोक्त कार्य का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्लानिंग कार्यालय में नहीं दिया गया है। यदि प्रमाण पत्र दिया जाता तो उक्त शेष पेमेंट भी अभी तक हो चुकी होती। जिस तरह से नगर परिषद ने आज तक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया है, उससे साफ है कि परिषद प्रशासन और प्लानिंग अधिकारी कार्यालय इस कथित भ्रष्टाचार से पूरी तरह वाकिफ है। इस मामले को देखकर उपरोक्त अधिकारियों पर भी संदेह किया जाना गलत नहीं है।
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उसके वार्ड में डी-प्लान के तहत दिल्ली रोड से घीसा की ढाणी तक सड़क बनाई जानी थी, लेकिन नहीं बनाई गई। सड़क बनाने के लिए ठेकेदार को जहां कई बार कहा गया, वहीं इसकी शिकायत प्लानिंग अधिकारी कार्यालय में भी की गई, लेकिन उनकी शिकायत रद्दी की टोकरी में डाल दी गई। नगर परिषद ने भी इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की। इस काम की ज्यादातर पेमेंट मैटेरियल सप्लाई के नाम पर हो चुकी है। सुमेर सिंह, पार्षद वार्ड नंबर-5
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वर्ष 2015-16 में लाखों रुपये के काम डी-प्लान के तहत कराए थे। उनमें तीन कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं आए हैं। तीन सड़कों को बनाने में मैटेरियल खरीदने के लिए ज्यादातर पेमेंट भी सीधी पार्टी को की गई है। बाकी उपयोगिता प्रमाण पत्र आने के बाद की जाएगी। - ओपी इंदौरा, प्लानिंग अधिकारी
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डी-प्लान के तहत 2015-16 में कराए कुछ कामों का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं आया है। ये काम उनके समय के नहीं है। इसलिए वह प्रमाण पत्र नहीं दे सकते। ऐसे प्रमाण पत्र उसी समय के अधिकारियों द्वारा दिया जाता है। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद रेवाड़ी।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। करीब दो साल पहले नगर परिषद द्वारा डी-प्लान के तहत प्रस्तावित लाखों के विकास कार्यों में भारी गोलमाल का मामला सामने आया है। इस योजना के तहत तीन वार्डों में करीब 12 लाख रुपये की लागत से बनने वाली सड़कें बनाई ही नहीं गईं लेकिन मैटेरियल सप्लाई दिखाकर उनकी ज्यादातर पेमेंट कर दी गई। सड़कें नहीं बनने की पुष्टि जहां इस बात से हो रही है कि नगर परिषद ने अभी तक उक्त कार्यों का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्लानिंग अधिकारी कार्यालय को नहीं दिया है। पार्षद भी इसका प्रमाण दे रहे हैं। उपयोगिता प्रमाण पत्र क्यों नहीं दिया गया, यह एक बड़ा सवाल है, जो गड़बड़झाला की तरफ इशारा करता है। नप के वर्तमान अधिकारी यह कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं कि तत्कालीन अधिकारी को ही प्रमाण पत्र देना चाहिए। उनका स्थानांतरण हो चुका है। ये काम उनके समय के नहीं है। मामले की जांच हो तो इस गोलमाल का पर्दाफाश हो सकता है।
वर्ष दो साल में नगर परिषद ने डी-प्लान के तहत शहर में करीब 40 लाख रुपये की लागत से काम कराए थे। इसी योजना में कुछ काम राव तुलाराम स्टेडियम में भी हुए हैं। योजना के तहत तीन ऐसी सड़कें है, जो बनाई जानी थी, लेकिन उन्हें नहीं बनाया गया। इनमें से करीब पांच लाख रुपये की लागत से एक सड़क जहां शक्ति नगर में बननी थी, वहीं दूसरी करीब ढाई लाख की लागत से दिल्ली रोड से घीसा की ढाणी तक बनाई जानी थी। इसी प्रकार करीब चार लाख रुपये की एक सड़क तुर्कियावास रोड पर बनाई जानी थी। सूत्रों का कहना है कि बेशक सड़कें नहीं बनाई गई, लेकिन मैटेरियल खरीदने के नाम पर उनकी 70 प्रतिशत से ज्यादातर पेमेंट हो चुकी है। अब कुछ पेमेंट बाकी है, जो नगर परिषद द्वारा दिए जाने वाले उपयोगिता प्रमाण पत्र पर टिकी है। नगर परिषद की तरफ से उपरोक्त कार्य का उपयोगिता प्रमाण पत्र प्लानिंग कार्यालय में नहीं दिया गया है। यदि प्रमाण पत्र दिया जाता तो उक्त शेष पेमेंट भी अभी तक हो चुकी होती। जिस तरह से नगर परिषद ने आज तक उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया है, उससे साफ है कि परिषद प्रशासन और प्लानिंग अधिकारी कार्यालय इस कथित भ्रष्टाचार से पूरी तरह वाकिफ है। इस मामले को देखकर उपरोक्त अधिकारियों पर भी संदेह किया जाना गलत नहीं है।
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उसके वार्ड में डी-प्लान के तहत दिल्ली रोड से घीसा की ढाणी तक सड़क बनाई जानी थी, लेकिन नहीं बनाई गई। सड़क बनाने के लिए ठेकेदार को जहां कई बार कहा गया, वहीं इसकी शिकायत प्लानिंग अधिकारी कार्यालय में भी की गई, लेकिन उनकी शिकायत रद्दी की टोकरी में डाल दी गई। नगर परिषद ने भी इस मामले में कोई सुनवाई नहीं की। इस काम की ज्यादातर पेमेंट मैटेरियल सप्लाई के नाम पर हो चुकी है। सुमेर सिंह, पार्षद वार्ड नंबर-5
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वर्ष 2015-16 में लाखों रुपये के काम डी-प्लान के तहत कराए थे। उनमें तीन कार्यों के उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं आए हैं। तीन सड़कों को बनाने में मैटेरियल खरीदने के लिए ज्यादातर पेमेंट भी सीधी पार्टी को की गई है। बाकी उपयोगिता प्रमाण पत्र आने के बाद की जाएगी। - ओपी इंदौरा, प्लानिंग अधिकारी
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डी-प्लान के तहत 2015-16 में कराए कुछ कामों का उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं आया है। ये काम उनके समय के नहीं है। इसलिए वह प्रमाण पत्र नहीं दे सकते। ऐसे प्रमाण पत्र उसी समय के अधिकारियों द्वारा दिया जाता है। - मनोज यादव, कार्यकारी अधिकारी नगर परिषद रेवाड़ी।