रेवाड़ी: कोख में हत्या के सौदागरों पर कसा शिकंजा, भ्रूण लिंग जांच करने वाले गिरोह के 3 सदस्य काबू
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने कार्रवाई की। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 70 हजार रुपये में जांच कराने की बात तय हुई थी।
विस्तार
हरियाणा के रेवाड़ी जिले के स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच करने वाले गिरोह के 3 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। 2 आरोपियों को राजस्थान के टपूकड़ा व एक को रेवाड़ी शहर के नाईवाली चौक से पकड़ा गया है। विभाग ने सभी आरोपियों को पुलिस के हवाले कर दिया है। साथ ही उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया है।
सीएमओ रेवाड़ी डॉ. कृष्ण कुमार के अनुसार रेवाड़ी से कुछ गर्भवती महिलाओं को ले जाकर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भ्रूण लिंग जांच कराने की सूचना मिल रही थी। इस पर अमल करते हुए सीएमओ ने पीसी-पीएनडीटी नोडल अधिकारी डॉ. विशाल राव के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई।
इसमें डॉ. अविनाश यादव, डॉ. योगेश यादव के अलावा पुलिस स्टाफ को भी शामिल किया गया था। टीम ने एक नकली मरीज के जरिए बिजेन्द्र नामक युवक से संपर्क किया। उसने भ्रूण लिंग जांच कराने की स्वीकृति भर दी। 70 हजार रुपये में जांच कराने की बात तय हुई।
बिजेन्द्र ने 70 हजार कैश मांगे, लेकिन मरीज ने ऑनलाइन ट्रांसफर करने की बात की। उसके बाद बिजेन्द्र द्वारा दिए गए नंबरों पर 50 हजार रुपये एडवांस भेजे गए और 20 हजार रुपये जांच के बाद देने का सौदा तय हुआ। बिजेन्द्र ने नकली मरीज को गुरुग्राम के पटौदी में बुलाया।
यहां बस स्टैंड पर बिजेन्द्र मरीज को लेकर सबसे पहले नया गांव गया और फिर रवि चन्द्र नामक शख्स को फोन किया। काफी इंतजार के बाद वह नहीं आया तो कुछ दूर आगे उसने शकील नामक शख्स को गाड़ी में बैठा लिया। इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम उनका पीछा करती रही।
टपूकड़ा में एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर लेकर गए
पटौदी के बाद दलाल बिजेन्द्र और शकील नकली मरीज को दिल्ली-जयपुर हाईवे के रास्ते पहले भिवाड़ी और फिर टपूकड़ा में लेकर गए। यहां पर एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर पहुंचने से पहले बिजेन्द्र गाड़ी से उतर गया और फिर अल्ट्रासाउंड सेंटर के पास उसे विक्रम नामक शख्स मिला। दोनों उसे एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर लेकर पहुंचे, जहां उसका सेंटर संचालक ने भ्रूण लिंग जांच करने से मना कर दिया।
इस बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम ने डायग्नोस्टिक सेंटर पर छापा मार दिया। पुलिस ने शकील और विक्रम को मौके पर ही पकड़ लिया। उसके बाद अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जांच की तो पता चला कि नकली मरीजा का अल्ट्रासाउंड हुआ ही नहीं, जबकि शकील और विक्रम ने बताया कि भ्रूण लिंग जांच का खुलासा बिजेन्द्र करेगा।
अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालक को क्लीन चिट देने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पकड़े गए दोनों आरोपियों के जरिए बिजेन्द्र से संपर्क किया। इस दौरान बिजेन्द्र रेवाड़ी शहर पहुंच चुका था, लेकिन उसे यह नहीं पता था कि उसके दोनों साथी पकड़े जा चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पकड़े गए दोनों आरोपियों के जरिए बिजेन्द्र को फोन किया।
बिजेन्द्र ने उन्हें रेवाड़ी शहर के नाईवाली चौक पर बुला लिया। यहां पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बिजेन्द्र को भी गिरफ्तार कर लिया। तीनों को पकड़ने के बाद देर रात ही उनके खिलाफ शहर के सिटी थाना में केस दर्ज कराया गया।
पहले भी पकड़े जा चुके मामले
4 सितंबर 2021 : स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भ्रूण लिंग जांच कराने वाली एक महिला व उसके कार चालक को काबू किया था। आरोपी महिला पुलिस को 12 घंटे तक राजस्थान, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में घुमाती रही फिर रेवाड़ी के धारूहेड़ा में पकड़ी गई। 45 हजार रुपए में लिंग जांच का सौदा तय किया था।
27 सितंबर 2021 : स्वास्थ्य विभाग की टीम ने चलती कार में भ्रूण लिंग जांच करने वाले गिरोह को पकड़ने में कामयाबी हासिल की थी। गिरोह में शामिल बदमाश 80 हजार से 1 लाख रुपये में भ्रूण लिंग जांच का सौदा तय करते थे तथा चलती कार में ही पोर्टेबल अल्ट्रासाउंड मशीन से अपने काले कारनामे को अंजाम देते थे।
20 दिसंबर 2020 : स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आगरा में चल रहे भ्रूण लिंग जांच के खेल का पर्दाफाश किया था। इनमें पुलिस ने दो दलालों को काबू किया था। जबकि जांच करने वाली महिला डॉक्टर व मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाई थी।
24 जून 2021 : रेवाड़ी की स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यूपी के मुजफ्फरनगर में की बड़ी कार्रवाई की थी। टीम ने भ्रूण लिंग जांच करते हुए एक निजी अस्पताल की डॉक्टर व वहां के दो कर्मचारियों सहित तीन लोगों को रंगे हाथ पकड़कर पुलिस को सौंप दिया। भ्रूण लिंग जांच कराने का सौदा 40 हजार रुपये में हुआ था, 10 हजार रुपये पहले खाते में मंगाए गए थे।
17 नवंबर 2019 : रेवाड़ी पुलिस व स्वास्थ्य विभाग की टीम ने छापा मारकर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के खुर्जा इलाके में गांव दिनोल में एक सरकारी अस्पताल में तैनात नर्स के घर में धड़ल्ले से लिंग परीक्षण का कारोबार का खुलासा किया था। इसके साथ ही इस कारोबार से जुड़े तीन एजेंटों को भी गिरफ्तार किया गया था।
समय-समय पर सूचना मिलने के बाद ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। अभी रेवाड़ी में काफी लोग एक्टिव हैं, जिनके तार राजस्थान, यूपी व दिल्ली में बैठे लिंग जांच करने वाले गिरोह से जुड़े हुए हैं। ऐसे लोग रेवाड़ी में सौदा करते है और फिर दूसरे राज्यों में ले जाकर जांच कराते हैं। इसके साथ ही भ्रूण हत्या भी की जाती हैं। - डॉ. विशाल राव, नोडल अधिकारी, पीएनडीटी