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सीपीसीबी तीन सप्ताह में एसटीपी प्लांटों की दे रिपोर्ट : एनजीटी
Fri, 27 Sep 2024 07:35 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Fri, 27 Sep 2024 07:35 PM IST
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रेवाड़ी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से रेवाड़ी के 6 एसटीपी प्लांट की रिपोर्ट पेश नहीं करने पर सख्त नाराजगी जताई है। एनजीटी ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए सीपीसीबी को चेतावनी दी है कि पर्यावरणीय मामलों में देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अगर तीन सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई तो सीपीसीबी के सदस्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से ट्रिब्यूनल के समक्ष उपस्थित होना पड़ेगा।
अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को निर्धारित की गई है। इसमें सीपीसीबी की ओर से रिपोर्ट पेश न करने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूरा मामला साहबी बैराज में एसटीपी का प्रदूषित पानी छोड़े जाने को लेकर है। दरअसल, एनजीटी ने 14 अगस्त को सुनवाई के दौरान सीपीसीबी को निर्देश दिया था कि वह धारूहेड़ा और रेवाड़ी के एसटीपी प्लांट की जांच कर अपनी रिपोर्ट एक माह के भीतर पेश करे, लेकिन सीपीसीबी ने यह रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में नहीं दी। 25 सितंबर को सीपीसीबी के वकील ने समय बढ़ाने का अनुरोध करते हुए छह सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन एनजीटी ने समय देने से इन्कार कर दिया।
गांवों में घुल रहा जहर, रिपोर्ट के महत्वपूर्ण तथ्य -
खरखड़ा गांव निवासी याचिकाकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि साहबी बैराज में एसटीपी प्लांटों की तरफ से वर्षों से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी से आसपास के गांवों का भूमिगत जलस्तर और पेयजल गुणवत्ता खो चुका है। जुलाई में जिले के डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर आई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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गांव अनुसार रिपोर्ट में आई थी विभिन्न गड़बड़ी
टीडीएस और कुल क्षारीयता: डुंगरवास, मसानी, खलियावास, और रसगन के नल के पानी में टीडीएस और कुल क्षारीयता की मात्रा वांछनीय सीमाओं से कहीं अधिक पाई गई है। यह स्थिति न केवल पानी के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है, बल्कि इसे पीने के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त बना रही है।
मैग्नीशियम की अत्यधिक मात्रा: खरखड़ा और निखरी गांवों के हैंडपंपों के पानी में मैग्नीशियम की मात्रा 30 पीपीएम से अधिक पाई गई है, जबकि रसगन के नल के पानी में भी यह स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक है। मैग्नीशियम की अधिकता से पाचन तंत्र में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही यह हृदय और मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकता है।
लौह की उच्च सांद्रता: भटसाना और निखरी के हैंडपंपों के पानी में लौह की मात्रा 0.3 पीपीएम से अधिक पाई गई है, जो डुंगरवास, मसानी, खलियावास, और रसगन के नल के पानी में भी पाई गई। उच्च लौह स्तर से लिवर, हृदय, और त्वचा संबंधित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
फ्लोराइड की खतरनाक मात्रा: भटसाना के हैंडपंप और मसानी एवं खलियावास के नल के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.0 पीपीएम से अधिक पाई गई है। फ्लोराइड की अधिकता से दांतों और हड्डियों में फ्लोरोसिस, दांतों का क्षय और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
एनजीटी ने इन एसटीपी की जांच के दिए थे निर्देश
-खरखड़ा 9.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी
-धारूहेड़ा 5 एमएलडी एसटीपी:: एचएसवीपी
-नासियाजी रोड 16 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-नासियाजी रोड 8 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-कालूवास 6.5 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-बावल 3.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी
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अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को निर्धारित की गई है। इसमें सीपीसीबी की ओर से रिपोर्ट पेश न करने की स्थिति में कड़ी कार्रवाई की जा सकती है। यह फैसला जल प्रदूषण को नियंत्रित करने और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पूरा मामला साहबी बैराज में एसटीपी का प्रदूषित पानी छोड़े जाने को लेकर है। दरअसल, एनजीटी ने 14 अगस्त को सुनवाई के दौरान सीपीसीबी को निर्देश दिया था कि वह धारूहेड़ा और रेवाड़ी के एसटीपी प्लांट की जांच कर अपनी रिपोर्ट एक माह के भीतर पेश करे, लेकिन सीपीसीबी ने यह रिपोर्ट निर्धारित समय सीमा में नहीं दी। 25 सितंबर को सीपीसीबी के वकील ने समय बढ़ाने का अनुरोध करते हुए छह सप्ताह का समय मांगा था, लेकिन एनजीटी ने समय देने से इन्कार कर दिया।
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गांवों में घुल रहा जहर, रिपोर्ट के महत्वपूर्ण तथ्य -
खरखड़ा गांव निवासी याचिकाकर्ता प्रकाश यादव ने बताया कि साहबी बैराज में एसटीपी प्लांटों की तरफ से वर्षों से छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी से आसपास के गांवों का भूमिगत जलस्तर और पेयजल गुणवत्ता खो चुका है। जुलाई में जिले के डुंगरवास, मसानी, खलियावास, रसगन, खरखड़ा, निखरी, ततारपुर खालसा और भटसाना गांवों में पेयजल की गुणवत्ता पर आई रिपोर्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
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गांव अनुसार रिपोर्ट में आई थी विभिन्न गड़बड़ी
टीडीएस और कुल क्षारीयता: डुंगरवास, मसानी, खलियावास, और रसगन के नल के पानी में टीडीएस और कुल क्षारीयता की मात्रा वांछनीय सीमाओं से कहीं अधिक पाई गई है। यह स्थिति न केवल पानी के स्वाद और गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है, बल्कि इसे पीने के लिए पूरी तरह से अनुपयुक्त बना रही है।
मैग्नीशियम की अत्यधिक मात्रा: खरखड़ा और निखरी गांवों के हैंडपंपों के पानी में मैग्नीशियम की मात्रा 30 पीपीएम से अधिक पाई गई है, जबकि रसगन के नल के पानी में भी यह स्तर सुरक्षित सीमा से अधिक है। मैग्नीशियम की अधिकता से पाचन तंत्र में समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। साथ ही यह हृदय और मांसपेशियों को भी प्रभावित कर सकता है।
लौह की उच्च सांद्रता: भटसाना और निखरी के हैंडपंपों के पानी में लौह की मात्रा 0.3 पीपीएम से अधिक पाई गई है, जो डुंगरवास, मसानी, खलियावास, और रसगन के नल के पानी में भी पाई गई। उच्च लौह स्तर से लिवर, हृदय, और त्वचा संबंधित गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।
फ्लोराइड की खतरनाक मात्रा: भटसाना के हैंडपंप और मसानी एवं खलियावास के नल के पानी में फ्लोराइड की मात्रा 1.0 पीपीएम से अधिक पाई गई है। फ्लोराइड की अधिकता से दांतों और हड्डियों में फ्लोरोसिस, दांतों का क्षय और हड्डियों की कमजोरी जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
एनजीटी ने इन एसटीपी की जांच के दिए थे निर्देश
-खरखड़ा 9.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी
-धारूहेड़ा 5 एमएलडी एसटीपी:: एचएसवीपी
-नासियाजी रोड 16 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-नासियाजी रोड 8 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-कालूवास 6.5 एमएलडी एसटीपी::पीएचईडी
-बावल 3.5 एमएलडी एसटीपी:: पीएचईडी