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Rewari News: बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द और गठिया की शिकायतें बढ़ीं
Tue, 04 Nov 2025 11:59 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 04 Nov 2025 11:59 PM IST
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रेवाड़ी। तापमान में गिरावट के साथ सिहरन महसूस होने लगी है। इसका असर बुजुर्गों की सेहत पर भी पड़ा है। मौसम में बदलाव के चलते बुजुर्गों में जोड़ों के दर्द, अकड़न और गठिया की शिकायतें बढ़ी हैं। ऐसे में मरीज प्रतिदिन सिविल अस्पताल में पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर का रक्त संचार धीमा पड़ जाता है, जिससे जोड़ों में जकड़न बढ़ जाती है और पुराने दर्द दोबारा उभरने लगते हैं। सिविल अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विशंबर पंवार ने बताया कि बुजुर्गों के साथ-साथ मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी ठंड के मौसम में जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द आम हो जाता है।
उन्होंने बताया कि ठंड लगने से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे हड्डियों और जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। विशेषकर जिन लोगों को पहले से गठिया, अर्थराइटिस या कैल्शियम की कमी की समस्या है, उन्हें इस मौसम में ज्यादा तकलीफ होती है।
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डॉ. विशंबर पंवार ने बताया कि बुजुर्ग लोग ठंड के मौसम में अक्सर पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में जकड़न और दर्द की स्थिति बन जाती है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेना जरूरी है ताकि शरीर में लचीलापन बना रहे।
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चिकित्सक की देखरेख में फिजियोथेरेपी करते रहें
डॉ. विशंबर ने सलाह दी कि गठिया के मरीज नियमित रूप से दवाइयां लें और चिकित्सक की देखरेख में फिजियोथेरेपी करते रहें। अत्यधिक दर्द की स्थिति में खुद से दर्दनिवारक दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। ठंड के मौसम में थोड़ी सावधानी बरतकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर बुजुर्ग जोड़ों के दर्द से काफी हद तक राहत पा सकते हैं।
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बचाव के लिए ये उपाय हैं कारगर
ठंड से बचने के लिए शरीर को हमेशा गर्म रखें। घुटनों और कोहनी को ढंक कर रखें। सुबह जल्दी सैर पर जाने से बचें और धूप निकलने के बाद ही व्यायाम या योग करें। जोड़ों में दर्द होने पर हल्के हाथों से गुनगुने तेल की मालिश करें। इससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और जकड़न कम होती है। आहार में हरी सब्जियां, तिल, गुड़, मेवे और दूध शामिल करें ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण और गर्माहट मिले। ठंडे फर्श पर बैठने, नंगे पांव चलने और अत्यधिक ठंडे वातावरण में जाने से बचें।
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चिकित्सकों का कहना है कि ठंड के मौसम में शरीर का रक्त संचार धीमा पड़ जाता है, जिससे जोड़ों में जकड़न बढ़ जाती है और पुराने दर्द दोबारा उभरने लगते हैं। सिविल अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. विशंबर पंवार ने बताया कि बुजुर्गों के साथ-साथ मध्यम आयु वर्ग के लोगों में भी ठंड के मौसम में जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द आम हो जाता है।
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उन्होंने बताया कि ठंड लगने से मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे हड्डियों और जोड़ों पर दबाव बढ़ जाता है। विशेषकर जिन लोगों को पहले से गठिया, अर्थराइटिस या कैल्शियम की कमी की समस्या है, उन्हें इस मौसम में ज्यादा तकलीफ होती है।
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डॉ. विशंबर पंवार ने बताया कि बुजुर्ग लोग ठंड के मौसम में अक्सर पानी कम पीते हैं, जिससे शरीर में जकड़न और दर्द की स्थिति बन जाती है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लेना जरूरी है ताकि शरीर में लचीलापन बना रहे।
चिकित्सक की देखरेख में फिजियोथेरेपी करते रहें
डॉ. विशंबर ने सलाह दी कि गठिया के मरीज नियमित रूप से दवाइयां लें और चिकित्सक की देखरेख में फिजियोथेरेपी करते रहें। अत्यधिक दर्द की स्थिति में खुद से दर्दनिवारक दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। ठंड के मौसम में थोड़ी सावधानी बरतकर और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव कर बुजुर्ग जोड़ों के दर्द से काफी हद तक राहत पा सकते हैं।
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बचाव के लिए ये उपाय हैं कारगर
ठंड से बचने के लिए शरीर को हमेशा गर्म रखें। घुटनों और कोहनी को ढंक कर रखें। सुबह जल्दी सैर पर जाने से बचें और धूप निकलने के बाद ही व्यायाम या योग करें। जोड़ों में दर्द होने पर हल्के हाथों से गुनगुने तेल की मालिश करें। इससे रक्त प्रवाह बेहतर होता है और जकड़न कम होती है। आहार में हरी सब्जियां, तिल, गुड़, मेवे और दूध शामिल करें ताकि शरीर को पर्याप्त पोषण और गर्माहट मिले। ठंडे फर्श पर बैठने, नंगे पांव चलने और अत्यधिक ठंडे वातावरण में जाने से बचें।