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Rewari News: चेक बाउंस मामले में बिल्डर निदेशक को जेल, सजा बरकरार
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी पाए गए राकेश वर्मा की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि दोषी ने शिकायतकर्ता को आठ साल तक पैसा लौटाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की, इसलिए उसे किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने आदेश दिया कि राकेश वर्मा को तुरंत हिरासत में लेकर जिला जेल भोंडसी भेजा जाए, ताकि वह अपनी सजा पूरी कर सके। यह मामला वर्ष 2012 का है। मामला रियल एस्टेट कंपनी ओम कृष्णा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने नीमराना (राजस्थान) में काउंटी गार्डन नामक हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने का दावा किया था। शिकायतकर्ता अभिषेक गुप्ता ने कंपनी से 150 गज का प्लॉट बुक कराया और करीब 4.23 लाख रुपये किस्तों के रूप में जमा किए। आरोप है कि कंपनी ने न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही प्लॉट का कब्जा दिया।
कई बार भुगतान मांगने के बावजूद राशि नहीं लौटने पर कंपनी ने 5.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। लेकिन यह चेक 13 मई 2015 को बैंक में पेश करने पर बाउंस हो गया। अभिषेक गुप्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की, लेकिन रकम न लौटने पर मामला अदालत तक गया।
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सजा और अपील
निचली अदालत (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, रेवाड़ी) ने 17 सितंबर 2022 को राकेश वर्मा को छह महीने की साधारण कैद और 11.01 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि मुआवजा तय समय पर न चुकाने पर दोषी को अतिरिक्त एक महीने की कैद भी भुगतनी होगी।
राकेश वर्मा ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की, जिसमें उसने दावा किया कि उस पर कोई कानूनी देनदारी नहीं बनती और चेक उसने जारी नहीं किया। अदालत ने कहा कि चेक बाउंस मामले में दोषी ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया, जिससे उसका बचाव कमजोर साबित हुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इस अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत का फैसला पूरी तरह से बरकरार रखा।
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रेवाड़ी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जतिन गर्ग की अदालत ने चेक बाउंस के मामले में दोषी पाए गए राकेश वर्मा की अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने कहा कि दोषी ने शिकायतकर्ता को आठ साल तक पैसा लौटाने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की, इसलिए उसे किसी प्रकार की राहत नहीं दी जा सकती।
अदालत ने आदेश दिया कि राकेश वर्मा को तुरंत हिरासत में लेकर जिला जेल भोंडसी भेजा जाए, ताकि वह अपनी सजा पूरी कर सके। यह मामला वर्ष 2012 का है। मामला रियल एस्टेट कंपनी ओम कृष्णा डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है, जिसने नीमराना (राजस्थान) में काउंटी गार्डन नामक हाउसिंग प्रोजेक्ट लाने का दावा किया था। शिकायतकर्ता अभिषेक गुप्ता ने कंपनी से 150 गज का प्लॉट बुक कराया और करीब 4.23 लाख रुपये किस्तों के रूप में जमा किए। आरोप है कि कंपनी ने न तो प्रोजेक्ट पूरा किया और न ही प्लॉट का कब्जा दिया।
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कई बार भुगतान मांगने के बावजूद राशि नहीं लौटने पर कंपनी ने 5.50 लाख रुपये का चेक जारी किया। लेकिन यह चेक 13 मई 2015 को बैंक में पेश करने पर बाउंस हो गया। अभिषेक गुप्ता ने कानूनी नोटिस भेजकर भुगतान की मांग की, लेकिन रकम न लौटने पर मामला अदालत तक गया।
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सजा और अपील
निचली अदालत (ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास, रेवाड़ी) ने 17 सितंबर 2022 को राकेश वर्मा को छह महीने की साधारण कैद और 11.01 लाख रुपये मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। अदालत ने यह भी कहा था कि मुआवजा तय समय पर न चुकाने पर दोषी को अतिरिक्त एक महीने की कैद भी भुगतनी होगी।
राकेश वर्मा ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत में अपील दायर की, जिसमें उसने दावा किया कि उस पर कोई कानूनी देनदारी नहीं बनती और चेक उसने जारी नहीं किया। अदालत ने कहा कि चेक बाउंस मामले में दोषी ने नोटिस का जवाब तक नहीं दिया, जिससे उसका बचाव कमजोर साबित हुआ। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने इस अपील को खारिज कर दिया और निचली अदालत का फैसला पूरी तरह से बरकरार रखा।