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Rewari News: अब शुरू होंगे ईंट भट्ठे, दाम घटने की उम्मीद
Sat, 28 Feb 2026 11:19 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Sat, 28 Feb 2026 11:19 PM IST
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तैयार की गई कच्ची ईटें। संवाद
रेवाड़ी। जिले के ईंट भट्ठों का संचालन इस सप्ताह से शुरू हो जाएगा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के आदेशानुसार ईंट भट्ठों का संचालन वर्ष में चार माह के लिए ही किया जाता है। इसकी अवधि 1 मार्च से 30 जून तक है। भट्ठे चालू होने से ईंटों के दाम घट सकते हैं।
भट्ठे बंद होने के चार-पांच माह बाद ही जिले के अधिकांश ईंट भट्ठों पर स्टॉक समाप्त होने लगा था जिन भट्ठों पर ईंटें उपलब्ध रहीं, वहां दामों में बढ़ोतरी कर दी गई। वर्तमान में कुछ स्थानों पर ईंटों के दाम 7500 से 8 हजार रुपये प्रति हजार तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी निर्धारित दर 6950 रुपये प्रति हजार है। दोयम दर्जे की ईंटों के दाम भी बढ़े हुए हैं।
इस सप्ताह से संचालन शुरू होने के बाद करीब 15 मार्च तक नई ईंटें बाजार में आनी शुरू हो जाएंगी। एक खेप तैयार होने में लगभग 15 दिन का समय लगता है। ऐसे में होली के आसपास ईंटों के दामों में प्रति हजार करीब एक हजार रुपये तक की कमी आने की संभावना है। इससे भवन निर्माण कार्य कराने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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भट्ठा मालिकों ने फरवरी के प्रारंभ में ही कच्ची ईंटें तैयार कर ली थीं। संचालन शुरू होने से पहले कच्ची ईंटों को धूप में सुखाया जाता है। इस बार भारी वर्षा न होने से कच्ची ईंटों को नुकसान कम हुआ है। भट्ठे चालू होने से बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों को भी रोजगार मिलेगा, जो बंदी के दौरान अपने घर लौट जाते हैं।
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प्रदूषण बढ़ने की आशंका : भट्ठों के दोबारा संचालन से प्रदूषण बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल एक्यूआई 200 से 270 के बीच में दर्ज किया जा रहा है, जिसे गंभीर माना जाता है। ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगाहें भट्ठों पर रहेंगी।
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इस वजह से संचालन पर लगती है रोक
पर्यावरणविद् राजेश कुमार ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा एनसीआर में ईंट भट्ठों के संचालन को सीमित करने का मुख्य कारण वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। ईंट भट्ठों से बड़ी मात्रा में धुआं, धूल कण और हानिकारक गैस निकलती है जो हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। सर्दियों के मौसम में एनसीआर में प्रदूषण स्तर पहले ही खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। ऐसे में पूरे वर्ष भट्ठे चलने से स्थिति और खराब हो सकती है।
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रोक की वजह से कई माह से ईट भट्ठे बंद हैं। अब भट्ठों का संचालन शुरू होने जा रहा है। इससे बाजार में नई ईटें पहुंचेंगी। -अशोक यादव, प्रधान, ईट भट्ठा एसोसिएशन।
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भट्ठे बंद होने के चार-पांच माह बाद ही जिले के अधिकांश ईंट भट्ठों पर स्टॉक समाप्त होने लगा था जिन भट्ठों पर ईंटें उपलब्ध रहीं, वहां दामों में बढ़ोतरी कर दी गई। वर्तमान में कुछ स्थानों पर ईंटों के दाम 7500 से 8 हजार रुपये प्रति हजार तक वसूले जा रहे हैं, जबकि सरकारी निर्धारित दर 6950 रुपये प्रति हजार है। दोयम दर्जे की ईंटों के दाम भी बढ़े हुए हैं।
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इस सप्ताह से संचालन शुरू होने के बाद करीब 15 मार्च तक नई ईंटें बाजार में आनी शुरू हो जाएंगी। एक खेप तैयार होने में लगभग 15 दिन का समय लगता है। ऐसे में होली के आसपास ईंटों के दामों में प्रति हजार करीब एक हजार रुपये तक की कमी आने की संभावना है। इससे भवन निर्माण कार्य कराने वाले लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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भट्ठा मालिकों ने फरवरी के प्रारंभ में ही कच्ची ईंटें तैयार कर ली थीं। संचालन शुरू होने से पहले कच्ची ईंटों को धूप में सुखाया जाता है। इस बार भारी वर्षा न होने से कच्ची ईंटों को नुकसान कम हुआ है। भट्ठे चालू होने से बाहरी राज्यों से आने वाले मजदूरों को भी रोजगार मिलेगा, जो बंदी के दौरान अपने घर लौट जाते हैं।
प्रदूषण बढ़ने की आशंका : भट्ठों के दोबारा संचालन से प्रदूषण बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। फिलहाल एक्यूआई 200 से 270 के बीच में दर्ज किया जा रहा है, जिसे गंभीर माना जाता है। ईंट भट्ठों से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की निगाहें भट्ठों पर रहेंगी।
इस वजह से संचालन पर लगती है रोक
पर्यावरणविद् राजेश कुमार ने बताया कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा एनसीआर में ईंट भट्ठों के संचालन को सीमित करने का मुख्य कारण वायु प्रदूषण को नियंत्रित करना है। ईंट भट्ठों से बड़ी मात्रा में धुआं, धूल कण और हानिकारक गैस निकलती है जो हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करती हैं। सर्दियों के मौसम में एनसीआर में प्रदूषण स्तर पहले ही खतरनाक स्थिति में पहुंच जाता है। ऐसे में पूरे वर्ष भट्ठे चलने से स्थिति और खराब हो सकती है।
रोक की वजह से कई माह से ईट भट्ठे बंद हैं। अब भट्ठों का संचालन शुरू होने जा रहा है। इससे बाजार में नई ईटें पहुंचेंगी। -अशोक यादव, प्रधान, ईट भट्ठा एसोसिएशन।