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गर्मा सकता है बावल भूमि अधिग्रहण मुद्दा
रेवाड़ी
Updated Tue, 13 May 2014 01:35 AM IST
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दिल्ली- मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर प्रस्तावित मल्टी मॉडल लाजिस्टिक हब के लिए बावल के 16 गांवों की अधिग्रहत की जाने वाली 3700 एकड़ जमीन को लेकर किसानों के विरोध के स्वर फिर तेज होने लगे है।
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अधिग्रहण के विरोध में गठित भूमि अधिग्रहण विरोध संघर्ष समिति ने कहा है कि सरकार से इस मसले पर अब कोई वार्ता नहीं होगी। समिति ने साफ किया कि यदि सरकार नई नीति से जमीन का अधिग्रहण करे तो ही आगे बात होगी। आगामी रणनीति तय करने करने के लिए 18 मई को बावल के पातूहेड़ा गांव में महापंचायत होगी।
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सोमवार को एक रेस्तरां में पत्रकार वार्ता में समिति के अध्यक्ष रामकिशन महलावत ने कहा कि 22 जुलाई 2012 के हिंसक आंदोलन के बाद सरकार की तरफ से गठित कमेटी के साथ सात दौर की वार्ता हो चुकी है।
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सरकारी कमेटी किसानों के हकों की बात करने की बजाय उन्हें दबाकर पुरानी नीति के तहत ही जमीन का अधिग्रहण करना चाहती है जो कि किसी भी सूरत में जायज नहीं है।
उन्होंने कहा कि समिति इस मुद्दे पर पूरी तरह से एकमत है कि नई नीति के तहत जमीन का अधिग्रहण पर ही बात की जाएगी।
उन्होंने कहा कि पुरानी नीति से न केवल यहां के किसानों को नुकसान होगा बल्कि युवाओं के साथ रोजगार में भी अन्याय होगा। कहा कि सरकार तत्काल प्रभाव से सेक्शन चार, छह व सात के नोटिस को रद करे।
उन्होंने कहा कि 16 और 22 जुलाई को जिला सचिवालय व आसलवास में हिंसा के मामले में गठित जस्टिस इकबाल सिंह आयोग की ओर से इस मामले की न्यायिक जांच पूरी की जा चुकी है। कहा कि सरकार अपने किसानों को गुमराह करने के लिए इस मामले में किसानों पर दर्ज मुकदमे भी वापस ले सकती है।
उन्होंने कहा कि 18 मई को होने वाली महापंचायत के लिए गांवों में जनसंपर्क किया जा रहा है और इसमें भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत मुख्य वक्ता होेंगे।
इसके अलावा प्रभावित गांवों के किसानों के अलावा अन्य गांवों के भी बड़ी संख्या में ग्रामीण भाग लेंगे। कहा कि महापंचायत में सभी की सहमति के बाद जो निर्णय होगा उस पर समिति पर रणनीति तय करेगी।
इस अवसर पर रामकिशन बोलनी, कृष्ण जेलदार, कर्नल जीआर चौकन, हुकमचंद पीथनवास, बनेसिंह खेड़ामुरार, मनोहरलाल, रामपाल पातूहेड़ा, धारासिंह सरपंच पातूहेड़ा, गोवर्धन सिंह, महेंद्र सिंह बणीपुर, प्रभुदयाल प्राणपुरा, भजनलाल, ओमप्रकाश सरपंच ड्योढई, रामपाल मोती की ढाणी सहित समिति अन्य पदाधिकारी मौजूद थे।
यह आंदोलन दो बार हिंसक रूप भी ले चुका है। 16 जुलाई 2012 को जिला सचिवालय में पहुंचे किसानों ने सुनवाई नहीं होने से खफा होकर तोड़फोड़ कर डाली थी।
पुलिस की ओर से इस पर मामला दर्ज करने के विरोध में जब 22 जुलाई 2012 को आसलवास गांव में महापंचायत की जा रही थी तब भी यह आंदोलन हिंसक हो गया था। किसानों पर लाठी-डंडे के साथ फायरिंग की थी।
हालांकि यह आज तक साफ नहीं हो पाया कि फायरिंग किस ओर से हुई, लेकिन इसमें तीन किसानों के अलावा 60 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गये थे।
इस घटना के बाद किसानों ने दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर हरियाणा व राजस्थान रोडवेज की 10 से अधिक बसों के अलावा कई सरकारी और प्राइवेट वाहनों को आग के हवाले कर दिया था। प्रशासन की निगाह 18 मई को आयोजित होने वाली महापंचायत पर हुई है कि कहीं फिर से इस तरह की घटना नहीं हो ताकि कुछ माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में यह कोई बड़ा राजनीतिक मुद्दा नहीं बन जाए।
राज्य सरकार ने बावल क्षेत्र के गांवों से गुजरने वाले दिल्ली- जयपुर- मुंबई इंडिस्ट्रयल कॉरिडोर में औद्योगिक क्षेत्र के लिए 3700 एकड़ जमीन अधिग्रहण की कार्ययोजना तैयार की थी।
इस योजना के मानेसर-बावल आईएमटी में भी उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ यहां पर नए शहरों के भी बसाने की योजना बनी है। किसानों की मांग है कि केंद्र सरकार की नई नीति के तहत जमीन का अधिग्रहण किया जाए, जिसमें पहली शर्त ही जमीन देने के लिए 80 फीसदी किसानों का सहमत होना जरूरी है।
साथ ही नई नीति में रायल्टी के अलावा यहां स्थापित होने वाले उद्योगों में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की शर्त है।