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Rewari News: बार काउंसिल ने सदस्यता रद्द करने के आदेश पर लगाई रोक, 16 फरवरी को होगी सुनवाई
Wed, 14 Feb 2024 01:04 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Wed, 14 Feb 2024 01:04 AM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
रेवाड़ी। जिला बार एसोसिएशन के 6 सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के मामले में बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा ने रोक लगा दी है। इस मामले में आगामी सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की गई है। बार एसोसिएशन के प्रधान विश्वामित्र यादव ने पिछले दिनों 6 सदस्य अधिवक्ताओं की बार एसोसिएशन की सदस्यता निरस्त कर दी थी।
इस मामले में बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने अपील दायर कर बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा से इस मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। मामले का निपटारा करने के लिए विशेष समिति ने अपने निर्णय में 8 फरवरी के उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसमें बार एसोसिएशन रेवाड़ी की ओर से 6 सदस्यों की सदस्यता रद्द की गई थी। इस संदर्भ में 12 फरवरी को आदेश जारी कर विशेष समिति ने अपना पक्ष रखने के लिए 16 फरवरी को वर्तमान पदाधिकारी को जवाब देने के लिए कहा है और कारण पूछा गया है कि उन्होंने 8 फरवरी के आदेश का उल्लंघन क्यों किया है।
इस वजह से किया था निष्कासित
पिछली 31 जनवरी को हुई बैठक के बाद से ही बार एसोसिएशन में काफी तनाव की स्थिति बनी हुई थी। मौजूदा बार प्रधान विश्वामित्र यादव के मुताबिक मीटिंग में हंगामा करने, अशोभनीय भाषा बोलने और माइक छीनने का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन के छह अधिवक्ताओं को वर्तमान प्रधान ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का कोई जवाब न दिए जाने के कारण पूर्व प्रधान शमशेर यादव, एडवोकेट बाबूलाल खोला, प्रवीण कुमार प्रवेश हरित, देवेंद्र यादव सहित अशोक यादव एडवोकेट को जिला बार एसोसिएशन की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था।
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पूर्व प्रधान शमशेर बोले- बार काउंसिल से न्याय लेकर रहेंगे
इस मामले में सदस्यता रद्द करने को लेकर पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने कहा कि नियमों की अनदेखी कर 6 सदस्यों की सदस्यता मनमाने तरीके से रद्द की गई है जिसकी वह कड़े शब्दों में आलोचना करते हैं और बार काउंसिल से न्याय प्राप्त करके रहेंगे। अधिवक्ता पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि प्रधान के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद थे। मीटिंग में किसी प्रकार की कोई मैन हैंडलिंग नहीं की गई थी, ना ही किसी प्रकार की कोई दिक्कत पैदा की गई थी। बल्कि हम अपना विरोध जाता रहे थे, जिस पर प्रधान ने बिना किसी मीटिंग की फैसला के ही उन्हें शो काज नोटिस जारी किया था। जबकि उनको ऐसा करने का कोई हक नहीं है। जानबूझकर प्रधान की ओर से यह कार्रवाई की गई थी।
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रेवाड़ी। जिला बार एसोसिएशन के 6 सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के मामले में बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा ने रोक लगा दी है। इस मामले में आगामी सुनवाई 16 फरवरी को निर्धारित की गई है। बार एसोसिएशन के प्रधान विश्वामित्र यादव ने पिछले दिनों 6 सदस्य अधिवक्ताओं की बार एसोसिएशन की सदस्यता निरस्त कर दी थी।
इस मामले में बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने अपील दायर कर बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा से इस मामले में संज्ञान लेने का अनुरोध किया था। मामले का निपटारा करने के लिए विशेष समिति ने अपने निर्णय में 8 फरवरी के उस निर्णय पर रोक लगा दी है, जिसमें बार एसोसिएशन रेवाड़ी की ओर से 6 सदस्यों की सदस्यता रद्द की गई थी। इस संदर्भ में 12 फरवरी को आदेश जारी कर विशेष समिति ने अपना पक्ष रखने के लिए 16 फरवरी को वर्तमान पदाधिकारी को जवाब देने के लिए कहा है और कारण पूछा गया है कि उन्होंने 8 फरवरी के आदेश का उल्लंघन क्यों किया है।
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इस वजह से किया था निष्कासित
पिछली 31 जनवरी को हुई बैठक के बाद से ही बार एसोसिएशन में काफी तनाव की स्थिति बनी हुई थी। मौजूदा बार प्रधान विश्वामित्र यादव के मुताबिक मीटिंग में हंगामा करने, अशोभनीय भाषा बोलने और माइक छीनने का आरोप लगाते हुए बार एसोसिएशन के छह अधिवक्ताओं को वर्तमान प्रधान ने कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। नोटिस का कोई जवाब न दिए जाने के कारण पूर्व प्रधान शमशेर यादव, एडवोकेट बाबूलाल खोला, प्रवीण कुमार प्रवेश हरित, देवेंद्र यादव सहित अशोक यादव एडवोकेट को जिला बार एसोसिएशन की सदस्यता से निष्कासित कर दिया गया था।
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पूर्व प्रधान शमशेर बोले- बार काउंसिल से न्याय लेकर रहेंगे
इस मामले में सदस्यता रद्द करने को लेकर पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने कहा कि नियमों की अनदेखी कर 6 सदस्यों की सदस्यता मनमाने तरीके से रद्द की गई है जिसकी वह कड़े शब्दों में आलोचना करते हैं और बार काउंसिल से न्याय प्राप्त करके रहेंगे। अधिवक्ता पूर्व प्रधान शमशेर यादव ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि प्रधान के द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद थे। मीटिंग में किसी प्रकार की कोई मैन हैंडलिंग नहीं की गई थी, ना ही किसी प्रकार की कोई दिक्कत पैदा की गई थी। बल्कि हम अपना विरोध जाता रहे थे, जिस पर प्रधान ने बिना किसी मीटिंग की फैसला के ही उन्हें शो काज नोटिस जारी किया था। जबकि उनको ऐसा करने का कोई हक नहीं है। जानबूझकर प्रधान की ओर से यह कार्रवाई की गई थी।