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Rewari News: एआई मैपिंग से 120 हाई रिस्क एरिया चिह्नित, जांच में टीबी के 139 नए मरीज मिले
Tue, 05 May 2026 12:21 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Tue, 05 May 2026 12:21 AM IST
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टीबी के लक्षणों की जांच करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। संवाद
रेवाड़ी। स्वास्थ्य विभाग ने टीबी की समय से पहचान और रोकथाम के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेना शुरू कर दिया है। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित मैपिंग प्रणाली लागू की गई है जिसके माध्यम से जिले में 120 हाई रिस्क एरिया चिह्नित किए गए हैं। एक महीने में टीबी के 139 नए मरीजों की पहचान की गई है।
एआई मैपिंग में 120 क्षेत्रों को ऐसे स्थान के रूप में पहचाना गया है जहां टीबी के मरीज मिलने की संभावना अधिक है। एक माह में मिले सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है और उन्हें नियमित रूप से दवाइयां दी जा रही हैं। पिछले वर्ष 2400 टीबी के मरीज मिले थे।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन चिह्नित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। टीमें घर-घर जाकर लोगों को स्क्रीनिंग के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके साथ ही नियमित रूप से कैंप भी लगाए जा रहे हैं, जहां प्रतिदिन 70 से 80 लोगों के एक्स-रे किए जा रहे हैं।
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यदि किसी व्यक्ति की एक्स-रे रिपोर्ट में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत आगे की जांच कराई जाती है और मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया से न केवल बीमारी की जल्दी पहचान हो रही है बल्कि संक्रमण को फैलने से रोकने में भी काफी मदद मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज समय पर जांच कराए और डॉक्टर की ओर से दी गई दवाइयों का पूरा कोर्स बिना किसी रुकावट के पूरा करे। बीच में दवा छोड़ने से बीमारी दोबारा उभर सकती है और खतरनाक रूप भी ले सकती है।
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हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किए गए ये इलाके
टीबी की प्रोग्राम मैनेजर सीमा अंसारी ने बताया कि एआई आधारित मैपिंग के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले भी टीबी के अधिक मामले सामने आए हैं या जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र, मजदूर बस्तियां और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के इलाकों को भी हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद उनके पास जाकर जांच और जागरूकता का कार्य कर रही हैं।
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मोबाइल एक्स-रे वैन का भी किया जा रहा उपयोग
अभियान में मोबाइल एक्स-रे वैन का उपयोग किया जा रहा है। इन वैन के माध्यम से दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में भी जांच की सुविधा पहुंचाई जा रही है, जिससे लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता कम हो रही है और अधिक से अधिक लोगों की जांच संभव हो पा रही है। इसके साथ ही आशा वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों को टीबी के लक्षणों लगातार खांसी, वजन में कमी, बुखार, रात को पसीना आना और कमजोरी के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
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वर्जन:
टीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरा करने के लिए तकनीक, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों का सहारा लिया जा रहा है। दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने या अन्य लक्षण नजर आने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील लोगों से की जा रही है। समय से टीबी की पहचान और इलाज शुरू से ही टीबी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।-डॉ. विक्रम, टीबी नोडल अधिकारी।
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एआई मैपिंग में 120 क्षेत्रों को ऐसे स्थान के रूप में पहचाना गया है जहां टीबी के मरीज मिलने की संभावना अधिक है। एक माह में मिले सभी मरीजों का इलाज शुरू कर दिया गया है और उन्हें नियमित रूप से दवाइयां दी जा रही हैं। पिछले वर्ष 2400 टीबी के मरीज मिले थे।
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स्वास्थ्य विभाग के अनुसार इन चिह्नित क्षेत्रों में विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। टीमें घर-घर जाकर लोगों को स्क्रीनिंग के लिए प्रेरित कर रही हैं। इसके साथ ही नियमित रूप से कैंप भी लगाए जा रहे हैं, जहां प्रतिदिन 70 से 80 लोगों के एक्स-रे किए जा रहे हैं।
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यदि किसी व्यक्ति की एक्स-रे रिपोर्ट में टीबी के लक्षण दिखाई देते हैं तो तुरंत आगे की जांच कराई जाती है और मरीज का इलाज शुरू कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया से न केवल बीमारी की जल्दी पहचान हो रही है बल्कि संक्रमण को फैलने से रोकने में भी काफी मदद मिल रही है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि टीबी पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है। इसके लिए जरूरी है कि मरीज समय पर जांच कराए और डॉक्टर की ओर से दी गई दवाइयों का पूरा कोर्स बिना किसी रुकावट के पूरा करे। बीच में दवा छोड़ने से बीमारी दोबारा उभर सकती है और खतरनाक रूप भी ले सकती है।
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हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किए गए ये इलाके
टीबी की प्रोग्राम मैनेजर सीमा अंसारी ने बताया कि एआई आधारित मैपिंग के तहत उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है, जहां पहले भी टीबी के अधिक मामले सामने आए हैं या जहां जनसंख्या घनत्व अधिक है। इसके अलावा झुग्गी-झोपड़ी क्षेत्र, मजदूर बस्तियां और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के इलाकों को भी हाई रिस्क श्रेणी में शामिल किया गया है। इन क्षेत्रों में रहने वाले लोग अक्सर स्वास्थ्य सेवाओं तक आसानी से नहीं पहुंच पाते। इसलिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद उनके पास जाकर जांच और जागरूकता का कार्य कर रही हैं।
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मोबाइल एक्स-रे वैन का भी किया जा रहा उपयोग
अभियान में मोबाइल एक्स-रे वैन का उपयोग किया जा रहा है। इन वैन के माध्यम से दूर-दराज और ग्रामीण इलाकों में भी जांच की सुविधा पहुंचाई जा रही है, जिससे लोगों को अस्पताल जाने की आवश्यकता कम हो रही है और अधिक से अधिक लोगों की जांच संभव हो पा रही है। इसके साथ ही आशा वर्कर और स्वास्थ्य कर्मचारी लोगों को टीबी के लक्षणों लगातार खांसी, वजन में कमी, बुखार, रात को पसीना आना और कमजोरी के बारे में जागरूक कर रहे हैं।
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वर्जन:
टीबी उन्मूलन का लक्ष्य पूरा करने के लिए तकनीक, जागरूकता और सामूहिक प्रयासों का सहारा लिया जा रहा है। दो सप्ताह से अधिक समय तक खांसी आने या अन्य लक्षण नजर आने पर स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील लोगों से की जा रही है। समय से टीबी की पहचान और इलाज शुरू से ही टीबी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है।-डॉ. विक्रम, टीबी नोडल अधिकारी।