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Rewari News: दमकल कर्मियों को नम आंखों से श्रद्धांजलि
Mon, 02 Mar 2026 11:31 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
संवाद न्यूज एजेंसी, रेवाड़ी
Updated Mon, 02 Mar 2026 11:31 PM IST
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मांगों को लेकर जानकारी देते कर्मचारी। स्रोत : यूनियन
रेवाड़ी। कालका की एक कंपनी में लगी भीषण आग को बुझाते समय हुए ब्लास्ट में दो दमकल कर्मियों रणबीर और भवी चंद शर्मा की हुई मौत से क्षेत्र के लोग शोक में है। घटना के बाद हरियाणा अग्निशमन विभाग यूनियन की रेवाड़ी शाखा द्वारा शहीद कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
मुख्य अग्निशमन कर्मी रविन्द्र ने हादसे की जानकारी देते हुए कहा कि जब कोई दमकल कर्मचारी आग की सूचना पर मौके पर पहुंचता है, तो उसे वहां छिपे खतरों का अंदाजा नहीं होता।
फिर भी वह अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए आगे बढ़ता है। रणबीर और भवी चंद शर्मा भी अपने परिवारों की खुशियां छोड़कर, समाज की रक्षा के लिए निकले थे। उन्हें यह नहीं पता था कि वे उस दिन अपने घर वापस नहीं लौट पाएंगे। आज उनके परिवारों की आंखों में आंसू हैं, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है और बुजुर्ग माता-पिता अपने बेटों की राह देखते रह गए हैं।
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रविन्द्र ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके परिवारों को अकेला न छोड़ा जाए। उन्होंने मांग की है कि कर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाए, परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए और एक करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि दमकल कर्मी हर दिन मौत से आंख मिलाकर ड्यूटी निभाते हैं, लेकिन हादसे के बाद उनके परिवारों के लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था न होना बेहद पीड़ादायक है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा नियम, आधुनिक उपकरण और कल्याणकारी योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
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मुख्य अग्निशमन कर्मी रविन्द्र ने हादसे की जानकारी देते हुए कहा कि जब कोई दमकल कर्मचारी आग की सूचना पर मौके पर पहुंचता है, तो उसे वहां छिपे खतरों का अंदाजा नहीं होता।
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फिर भी वह अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए आगे बढ़ता है। रणबीर और भवी चंद शर्मा भी अपने परिवारों की खुशियां छोड़कर, समाज की रक्षा के लिए निकले थे। उन्हें यह नहीं पता था कि वे उस दिन अपने घर वापस नहीं लौट पाएंगे। आज उनके परिवारों की आंखों में आंसू हैं, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है और बुजुर्ग माता-पिता अपने बेटों की राह देखते रह गए हैं।
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रविन्द्र ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके परिवारों को अकेला न छोड़ा जाए। उन्होंने मांग की है कि कर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाए, परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए और एक करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें। उन्होंने यह भी कहा कि दमकल कर्मी हर दिन मौत से आंख मिलाकर ड्यूटी निभाते हैं, लेकिन हादसे के बाद उनके परिवारों के लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था न होना बेहद पीड़ादायक है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा नियम, आधुनिक उपकरण और कल्याणकारी योजनाएं बनाई जानी चाहिए।