{"_id":"69e28da70a3b83ea7905ffad","slug":"a-literary-journey-is-not-merely-a-trip-but-an-encounter-with-living-history-dilbagh-singh-rewari-news-c-198-1-rew1001-236952-2026-04-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"साहित्यिक भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, जीवंत इतिहास का साक्षात्कार : दिलबाग सिंह","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साहित्यिक भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं, जीवंत इतिहास का साक्षात्कार : दिलबाग सिंह
विज्ञापन
सांस्कृतिक यात्रा में भाग लेते विद्यार्थी व शिक्षक। स्रोत : विवि
- फोटो : 1
रेवाड़ी। मीरपुर स्थित इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग की तरफ से बाबू बालमुकुंद गुप्त की जन्मस्थली गुड़ियानी के लिए एक दिवसीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक यात्रा का आयोजन किया गया। कुलसचिव प्रोफेसर दिलबाग सिंह ने विश्वविद्यालय परिसर से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
उन्होंने कहा कि साहित्यिक भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं बल्कि जीवंत इतिहास से साक्षात्कार है। बाबू बालमुकुंद गुप्त के पदचिह्नों पर चलकर ही विद्यार्थी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व का अनुभव कर सकते हैं।
अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने हिंदी विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे भ्रमणों से विद्यार्थियों का न केवल बौद्धिक विकास होता है बल्कि वे अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ते हैं। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर करण सिंह ने कहा कि इस यात्रा को अकादमिक शोध और सांस्कृतिक चेतना के लिए मील का पत्थर बताया।
विज्ञापन
गुड़ियानी पहुंचने पर साहित्य-संस्कृति संवाद के परिप्रेक्ष्य में बाबू बालमुकुंद गुप्त की विरासत विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पुरी की ओर से सरपंच को शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि साहित्यिक भ्रमण केवल एक यात्रा नहीं बल्कि जीवंत इतिहास से साक्षात्कार है। बाबू बालमुकुंद गुप्त के पदचिह्नों पर चलकर ही विद्यार्थी अपनी भाषा और संस्कृति के प्रति गर्व का अनुभव कर सकते हैं।
विज्ञापन
अधिष्ठाता शैक्षणिक मामले प्रोफेसर सुनील कुमार ने हिंदी विभाग के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे भ्रमणों से विद्यार्थियों का न केवल बौद्धिक विकास होता है बल्कि वे अपनी जड़ों और गौरवशाली इतिहास से भी जुड़ते हैं। अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर करण सिंह ने कहा कि इस यात्रा को अकादमिक शोध और सांस्कृतिक चेतना के लिए मील का पत्थर बताया।
विज्ञापन
गुड़ियानी पहुंचने पर साहित्य-संस्कृति संवाद के परिप्रेक्ष्य में बाबू बालमुकुंद गुप्त की विरासत विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समापन सत्र में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. मंजू पुरी की ओर से सरपंच को शाल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।