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- मानव अधिकार दिवस पर कार्यक्रम
Updated Mon, 11 Dec 2017 12:33 AM IST
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डीएसपी ने पुलिस कर्मियों पढ़ाया नम्रता का पाठ
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) डॉ. गजेंद्र शर्मा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पुलिस के पास न्याय व मदद की उम्मीद लेकर आता है। पुलिसकर्मियों को भी चाहिए कि उसे अपने बर्ताव में नम्रता दिखाएं और पीड़ित की पूरी मदद करें। यदि पीड़ित के साथ व्यवहार रूखा होगा तो वह गलत धारणा लेकर जाएगा। रविवार को दिल्ली रोड स्थित जिला पुलिस लाइन में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए हर संभव मदद करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनता स्वामी होती है तथा पुलिस सेवक। सेवक को स्वामी के प्रति विवेकशील रहना चाहिए। दूसरी ओर परिवार से दूर रह कर 24 घंटे अपनी ड्यूटी में लगाने वाले पुलिसकर्मियों की भी पीठ थपथपाई जानी चाहिए ताकि उसका उत्साहवर्धन हो। सभी को मानव अधिकारियों की पालना करनी चाहिए।
डीएसपी कोसली अनिल कुमार ने कहा कि 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा ने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा को अंगीकृत किया गया। देश के सभी नागरिकों को समता या समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार व संवैधानिक अधिकार शामिल हैं। केएलपी कॉलेज की प्रो. रुचि शर्मा ने कहा कि सामान्य रूप से मानवाधिकारों को देखा जाए तो मानव जीवन में भोजन पाने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, बाल शोषण, उत्पीड़न पर अंकुश, महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा से सुरक्षा, शारीरिक शोषण पर अंकुश, प्रवास का अधिकार, धार्मिक हिंसा से रक्षा आदि को लेकर बहुत सारे कानून बनाए गए हैं, जिन्हें मानवाधिकार की श्रेणी में रखा गया है। मानव अधिकार का ढांचा मानव अधिकारों की शक्ति का सही उपयोग करने के लिए उनकी पर्याप्त जानकारी और आम लोगों तक उनकी पहुंच अति आवश्यक है। इस अवसर पर डीएसपी सतपाल यादव, एसएचओ खोल बिजेंद्र कुमार, विद्यासागर ने भी विचार रखे।
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। पुलिस उपाधीक्षक (मुख्यालय) डॉ. गजेंद्र शर्मा ने कहा कि कोई भी व्यक्ति पुलिस के पास न्याय व मदद की उम्मीद लेकर आता है। पुलिसकर्मियों को भी चाहिए कि उसे अपने बर्ताव में नम्रता दिखाएं और पीड़ित की पूरी मदद करें। यदि पीड़ित के साथ व्यवहार रूखा होगा तो वह गलत धारणा लेकर जाएगा। रविवार को दिल्ली रोड स्थित जिला पुलिस लाइन में मानव अधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही।
उन्होंने कहा कि कानून के दायरे में रहते हुए हर संभव मदद करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनता स्वामी होती है तथा पुलिस सेवक। सेवक को स्वामी के प्रति विवेकशील रहना चाहिए। दूसरी ओर परिवार से दूर रह कर 24 घंटे अपनी ड्यूटी में लगाने वाले पुलिसकर्मियों की भी पीठ थपथपाई जानी चाहिए ताकि उसका उत्साहवर्धन हो। सभी को मानव अधिकारियों की पालना करनी चाहिए।
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डीएसपी कोसली अनिल कुमार ने कहा कि 10 दिसंबर को पूरी दुनिया में मानवाधिकार दिवस के रूप में मनाया जाता है। 10 दिसंबर 1948 को संयुक्त राष्ट्र की साधारण सभा ने संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकारों की विश्वव्यापी घोषणा को अंगीकृत किया गया। देश के सभी नागरिकों को समता या समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार, संस्कृति और शिक्षा संबंधी अधिकार व संवैधानिक अधिकार शामिल हैं। केएलपी कॉलेज की प्रो. रुचि शर्मा ने कहा कि सामान्य रूप से मानवाधिकारों को देखा जाए तो मानव जीवन में भोजन पाने का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, बाल शोषण, उत्पीड़न पर अंकुश, महिलाओं के लिए घरेलू हिंसा से सुरक्षा, शारीरिक शोषण पर अंकुश, प्रवास का अधिकार, धार्मिक हिंसा से रक्षा आदि को लेकर बहुत सारे कानून बनाए गए हैं, जिन्हें मानवाधिकार की श्रेणी में रखा गया है। मानव अधिकार का ढांचा मानव अधिकारों की शक्ति का सही उपयोग करने के लिए उनकी पर्याप्त जानकारी और आम लोगों तक उनकी पहुंच अति आवश्यक है। इस अवसर पर डीएसपी सतपाल यादव, एसएचओ खोल बिजेंद्र कुमार, विद्यासागर ने भी विचार रखे।
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