{"_id":"59b6e5814f1c1bee7f8b606f","slug":"41505158529-rewari-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूल बसों में सुरक्षा के इंतजाम अधूरे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूल बसों में सुरक्षा के इंतजाम अधूरे
Updated Tue, 12 Sep 2017 01:05 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
स्कूल बसों में सुरक्षा के इंतजाम अधूरे
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
स्कूलों को लेकर सीबीएससी और सुप्रीम कोर्ट तक ने सुरक्षा मानकों को लेकर गाइड लाइन जारी की हुई है। बावजूद इसके शिक्षा के नाम पर धंधे में तब्दील हो चुके कुछ निजी स्कूल बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे। घटना को लेकर मंगलवार को ट्रैफिक पुलिस ने भी बसों में पड़ताल की। जिसमें कई तरह की खामियां पाई गईं। कार्रवाई में तीन वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के साथ दर्जनभर से अधिक स्कूल बसों के चालान भी काटे गए। अमर उजाला की टीम ने भी मंगलवार को कई स्कूलों में सुरक्षा मानकों को देखा। जिनमें कई तरह की खामियां पाई गईं।
-----------------
सुरक्षा से दिखा समझौता
कौनसीवास रोड स्थित शहर के निजी स्कूल में सुरक्षा मानक अधूरे मिले। स्कूल के मुख्यद्वार पर सीसीटीवी नहीं है। गाइड लाइन के अनुसार चारदीवारी पर फेसिंग जरूरी है। कंडम वैन से बच्चों को छोड़ा जा रहा है। वहीं दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल की वैन में बच्चों को ठूंसकर भरा हुआ था। ट्रैफिक पुलिस ने जब वैन को रुकवाकर जांच की तो चालक के पास ना तो गाड़ी के कागज मिले और ना ही उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस मिला। बच्चे जहां क्षमता के अनुसार आठ होने चाहिए थे। वहां 14 बच्चे बैठे थे। यातायात प्रभारी ने इस वैन को जब्त कर लिया। वहीं
-------------------------
हाइटेंशन लाइन के नीचे स्कूल
दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल के ऊपर से हाइटेंशन लाइन के तार गुजर रहे हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बताता है। हालांकि स्कूल प्रबंधन इसमें नियमों का हवाला भी देता है।
विज्ञापन
-------------------
साहब हमारी क्या गलती है
शहर के अभय सिंह चौक पर यातायात पुलिस ने बीस से अधिक बसों की जांच की। जांच में एक भी बस में सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं मिले। अधिकांश बसों में सीसीटीवी बंद मिले। जब इस बाबत ड्राइवरों से बात की गई तो उनका साफ कहना था कि साहब हमारी क्या गलती है। सुरक्षा के इंतजाम करना स्कूल मालिक का काम है। बसों में ना तो जीपीएस काम कर रहा था और ना ही इनमें प्राथमिक उपचार बॉक्स पूरा था। कुछ बसों के प्राथमिक उपचार बॉक्स में तो दवाइयां ही एक्सपायर हो गई। ऐसे में स्कूल प्रबंधन से नौनिहालों की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। कुछ चालकों के पास जहां भारी वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं मिला तो कुछ के पास लाइसेंस नहीं था।
---------------
हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं लिया सबक
कुछ दिनों पूर्व जिले में स्कूल एवं स्कूल वाहनों की सुरक्षा का निरीक्षण करने के लिए हाईकोर्ट से टीम आई थी। निरीक्षण के दौरान टीम ने खामियों पर स्कूल संचालकों को कड़ी फटकार लगाई थी। अधिकांश स्कूलों ने नई मानक पूरा करने वाली बसों को आगे और खटारा वाहनों को पीछे खड़ा किया हुआ था। इस पर टीम ने स्कूलों को शीघ्र ही मानक पूरे करने की बात भी कही थी। बावजूद इसके हालात नहीं सुधरे।
-------------
20 स्कूली बसों का निरीक्षण किया। खामी पाए जाने पर वाहन जब्त करने के साथ चालान भी काटे गए। बड़े स्कूलों की बसों में सीसीटीवी कैमरे खराब थे। किसी के पास लाइसेंस नहीं था तो किसी के पास हैवी लाइसेंस नहीं मिला। फर्स्ट एक्ट बॉक्स में भी दवाइयां एक्सपायर मिली। गाड़ियों की पासिंग के दौरान गाड़ियां पास होना भी संदेह पैदा करता है। हमारी ओर से प्रतिदिन स्कूली बसों की चैकिंग की जाएगी। - हरीसिंह, यातायात प्रभारी, रेवाड़ी
----------------
जिले में करीब 250 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं। एक दो स्कूल को छोड़ दिया जाए तो सभी में मासूम बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूलों के पास न तो जरूरी फायर एनओसी है और न ही स्कूल की दीवारों पर फैंसिंग तक की गई है। गुरुग्राम में मासूम की हत्या भी सुरक्षा इंतजामों में कमियों के चलते ही हुई है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। स्कूल शिक्षा के मंदिर की बजाय मोटी कमाई के साधन बनकर रह गए हैं। - एडवोकेट कैलाश चंद, दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन, रेवाड़ी प्रभारी
------------
आलीशान इमारतें बनाकर अभिभावकों को बड़े स्वप्न दिखाकर जेबें काटीं जा रही हैं। स्कूल सरकार से सस्ते दामों पर जमीन एवं अन्य सुविधाएं तो वसूलती हैं। लेकिन जब बच्चों की सुरक्षा की बात आती है तो ये कहीं भी नहीं ठहरते। रेवाड़ी प्रशासन एवं शिक्षा विभाग को सुरक्षा में कोताही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो मान्यता रद्द करने से भी नहीं चूकना चाहिए। अधिकतर स्कूल सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर पैसा कमाने में लगे हुए हैं। - अनिल पाल्हावास, समाज सेवी
------------
स्कूल में पहले से ही 90 सीसीटीवी लगवाए हुए हैं। बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। मुख्य गेट के साथ अन्य बची हुई जगहों पर भी सीसीटीवी लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन कराने के लिए फाइल पुलिस विभाग के पास भेज दी गई है। गुरुगाम की घटना के बाद छोटे से छोटा प्वाइंट को भी पूरा किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। - प्रीतिका मुंझाल, प्रिंसिपल कैंब्रिज स्कूल
----------------
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी।
स्कूलों को लेकर सीबीएससी और सुप्रीम कोर्ट तक ने सुरक्षा मानकों को लेकर गाइड लाइन जारी की हुई है। बावजूद इसके शिक्षा के नाम पर धंधे में तब्दील हो चुके कुछ निजी स्कूल बच्चों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने से नहीं चूक रहे। घटना को लेकर मंगलवार को ट्रैफिक पुलिस ने भी बसों में पड़ताल की। जिसमें कई तरह की खामियां पाई गईं। कार्रवाई में तीन वाहनों का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के साथ दर्जनभर से अधिक स्कूल बसों के चालान भी काटे गए। अमर उजाला की टीम ने भी मंगलवार को कई स्कूलों में सुरक्षा मानकों को देखा। जिनमें कई तरह की खामियां पाई गईं।
-----------------
सुरक्षा से दिखा समझौता
कौनसीवास रोड स्थित शहर के निजी स्कूल में सुरक्षा मानक अधूरे मिले। स्कूल के मुख्यद्वार पर सीसीटीवी नहीं है। गाइड लाइन के अनुसार चारदीवारी पर फेसिंग जरूरी है। कंडम वैन से बच्चों को छोड़ा जा रहा है। वहीं दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल की वैन में बच्चों को ठूंसकर भरा हुआ था। ट्रैफिक पुलिस ने जब वैन को रुकवाकर जांच की तो चालक के पास ना तो गाड़ी के कागज मिले और ना ही उसके पास ड्राइविंग लाइसेंस मिला। बच्चे जहां क्षमता के अनुसार आठ होने चाहिए थे। वहां 14 बच्चे बैठे थे। यातायात प्रभारी ने इस वैन को जब्त कर लिया। वहीं
विज्ञापन
-------------------------
हाइटेंशन लाइन के नीचे स्कूल
दिल्ली रोड स्थित एक स्कूल के ऊपर से हाइटेंशन लाइन के तार गुजर रहे हैं। इससे कभी भी बड़ा हादसा होने का खतरा बताता है। हालांकि स्कूल प्रबंधन इसमें नियमों का हवाला भी देता है।
विज्ञापन
-------------------
साहब हमारी क्या गलती है
शहर के अभय सिंह चौक पर यातायात पुलिस ने बीस से अधिक बसों की जांच की। जांच में एक भी बस में सुरक्षा के पूरे इंतजाम नहीं मिले। अधिकांश बसों में सीसीटीवी बंद मिले। जब इस बाबत ड्राइवरों से बात की गई तो उनका साफ कहना था कि साहब हमारी क्या गलती है। सुरक्षा के इंतजाम करना स्कूल मालिक का काम है। बसों में ना तो जीपीएस काम कर रहा था और ना ही इनमें प्राथमिक उपचार बॉक्स पूरा था। कुछ बसों के प्राथमिक उपचार बॉक्स में तो दवाइयां ही एक्सपायर हो गई। ऐसे में स्कूल प्रबंधन से नौनिहालों की सुरक्षा की उम्मीद करना बेमानी है। कुछ चालकों के पास जहां भारी वाहन चलाने का लाइसेंस नहीं मिला तो कुछ के पास लाइसेंस नहीं था।
---------------
हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी नहीं लिया सबक
कुछ दिनों पूर्व जिले में स्कूल एवं स्कूल वाहनों की सुरक्षा का निरीक्षण करने के लिए हाईकोर्ट से टीम आई थी। निरीक्षण के दौरान टीम ने खामियों पर स्कूल संचालकों को कड़ी फटकार लगाई थी। अधिकांश स्कूलों ने नई मानक पूरा करने वाली बसों को आगे और खटारा वाहनों को पीछे खड़ा किया हुआ था। इस पर टीम ने स्कूलों को शीघ्र ही मानक पूरे करने की बात भी कही थी। बावजूद इसके हालात नहीं सुधरे।
-------------
20 स्कूली बसों का निरीक्षण किया। खामी पाए जाने पर वाहन जब्त करने के साथ चालान भी काटे गए। बड़े स्कूलों की बसों में सीसीटीवी कैमरे खराब थे। किसी के पास लाइसेंस नहीं था तो किसी के पास हैवी लाइसेंस नहीं मिला। फर्स्ट एक्ट बॉक्स में भी दवाइयां एक्सपायर मिली। गाड़ियों की पासिंग के दौरान गाड़ियां पास होना भी संदेह पैदा करता है। हमारी ओर से प्रतिदिन स्कूली बसों की चैकिंग की जाएगी। - हरीसिंह, यातायात प्रभारी, रेवाड़ी
----------------
जिले में करीब 250 मान्यता प्राप्त निजी स्कूल हैं। एक दो स्कूल को छोड़ दिया जाए तो सभी में मासूम बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। स्कूलों के पास न तो जरूरी फायर एनओसी है और न ही स्कूल की दीवारों पर फैंसिंग तक की गई है। गुरुग्राम में मासूम की हत्या भी सुरक्षा इंतजामों में कमियों के चलते ही हुई है। ऐसे स्कूलों के खिलाफ शिक्षा विभाग को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। स्कूल शिक्षा के मंदिर की बजाय मोटी कमाई के साधन बनकर रह गए हैं। - एडवोकेट कैलाश चंद, दो जमा पांच मुद्दे जन आंदोलन, रेवाड़ी प्रभारी
------------
आलीशान इमारतें बनाकर अभिभावकों को बड़े स्वप्न दिखाकर जेबें काटीं जा रही हैं। स्कूल सरकार से सस्ते दामों पर जमीन एवं अन्य सुविधाएं तो वसूलती हैं। लेकिन जब बच्चों की सुरक्षा की बात आती है तो ये कहीं भी नहीं ठहरते। रेवाड़ी प्रशासन एवं शिक्षा विभाग को सुरक्षा में कोताही बरतने वाले स्कूलों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। जरूरत पड़े तो मान्यता रद्द करने से भी नहीं चूकना चाहिए। अधिकतर स्कूल सुरक्षा को ठेंगा दिखाकर पैसा कमाने में लगे हुए हैं। - अनिल पाल्हावास, समाज सेवी
------------
स्कूल में पहले से ही 90 सीसीटीवी लगवाए हुए हैं। बच्चों की सुरक्षा से किसी तरह का समझौता नहीं होगा। मुख्य गेट के साथ अन्य बची हुई जगहों पर भी सीसीटीवी लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। कर्मचारियों का पुलिस वैरिफिकेशन कराने के लिए फाइल पुलिस विभाग के पास भेज दी गई है। गुरुगाम की घटना के बाद छोटे से छोटा प्वाइंट को भी पूरा किया जा रहा है। हमारी प्राथमिकता बच्चों की सुरक्षा है। - प्रीतिका मुंझाल, प्रिंसिपल कैंब्रिज स्कूल
----------------