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राजस्थान में मूसलाधार बारिश के बाद साहबी बह चला पानी....13,14,15
Updated Sun, 22 Jul 2018 11:56 PM IST
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राजस्थान में मूसलाधार बारिश: धारूहेड़ा से 20 किलोमीटर दूर साहबी में आया पानी
अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। 22 सालों से पूरी तरह से सूख पड़ी साहबी नदी में इस बार के मानसून में रेवाड़ी के मसाणी बैराज तक पानी आने की संभावना बढ़ गई है। राजस्थान में अच्छी बारिश के बाद नदी के इलाकों में पड़ने वाले कुछ हिस्सों में पानी आ गया है। धारूहेड़ा से 20 किलोमीटर दूर बिलाहेड़ी और कोटपूतली में नदी में प्राकृतिक प्रवाह में बह रही है। बिलाहेड़ी से आगे कई नदी के प्राकृतिक प्रवाह में जगह-जगह अवरोध हैं। इस कारण राजस्थान समेत हरियाणा में भारी बारिश होने पर मसाणी बैराज तक साहबी के पुराने प्रवाह में बहने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्थान के जयपुर जिले की पहाड़ियों से निकलने वाली साहबी राजस्थान और हरियाणा के कई जिलों के लिए लाभदायक है। जब नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध नहीं था तब उस समय साहबी का पानी गुरुग्राम और झज्जर जिले तक पहुंचता था। वर्ष 1976 में आई साहबी नदी में बाढ़ ने इन दोनों राज्यों में खूब तबाही मचाई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में धारूहेड़ा में साहबी बैराज बनाया गया था। इस बैराज के बनने के बाद साहबी नदी में वर्ष 1995 और 1996 में आई बाढ़ के दौरान ही पानी आया था। इन दोनों साल में आई बाढ़ का असर रेवाड़ी शहर तक पहुंच गया। बावल तथा कोटकासिम क्षेत्र में भी काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद से साहबी नदी में पानी नहीं आया। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बिल्कुल ही अवरुद्ध कर दिया गया है। राजस्थान की तरफ से अपने जिलों में कई स्थानों पर तटबंध बना दिए हैं। कई क्षेत्रों में तो नदी क्षेत्र में ही निर्माण हो गए हैं। ऐसे में पिछले 22 सालों से नदी में पानी तक की धारा बहकर नहीं चली है। पहले नदी का पानी जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़ से होता बावल के पावटी गांव से जिला में प्रवेश करता था तथा उसके बाद फिर यह राजस्थान के कोटकासिम से होता हुआ धारूहेड़ा के बैराज में पहुंचाता था। हालांकि बैराज के निर्माण का उद्देश्य भी साहबी में आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करके इसके पानी का उपयोग करना था। लेकिन अब निर्माण के बाद ही से बैराज सूखा पड़ा हुआ है।
अलवर जिले में बारिश के बाद बनी संभावना
शनिवार रात को अलवर जिले के कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश हुई है जिसके बाद कोटकासिम-रेवाड़ी मार्ग पर बीलाहेड़ी गांव के समीप साहबी नदी के एक क्षेत्र में पानी बहकर आया है। सुबह के समय पानी की मात्रा काफी अधिक थी लेकिन दोपहर के समय यह कम हो गया लेकिन इसकी वजह से वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग तीन-तीन फीट तक पानी होने के कारण स्कूटर-बाइक चालकों के साथ कार चालकों को भी परेशानी हुई।
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जिले में भी झमाझम बारिश अब तक 160 एमएम बारिश
वर्ष 2016 को छोड़ दें तो जिला जुलाई माह में औसत बारिश को भी तरस जाता है लेकिन इस बार अभी तक जुलाई माह में रविवार तक 160 एमएम बारिश हो चुकी है जबकि औसत रूप से यह बारिश जिले में लगभग 145 एमएम पर्याप्त मानी जाती है। इस बार जिले में भी जुलाई माह में औसत से अधिक बारिश हुई तथा अभी आने वाले दिनों में और अधिक बारिश की संभावना बनी हुई है।
रविवार सुबह 8 बजे तक हुई बारिश
रेवाड़ी: 24 एमएम
बावल: 12 एमएम
जाटूसाना: 32 एमएम
नाहड़: 08 एमएम
---------------------
जुलाई में अब तक हुई बारिश
वर्ष माह जुलाई
वर्ष 2010 ------------264.0
वर्ष 2011 113 एमएम
वर्ष 2012 55 एमए
वर्ष 2013 123 एमएम
वर्ष 2014 141 एमएम
वर्ष 2015 142 एमएम
वर्ष 2016 276 एमएम
वर्ष 2017 75 एमएम
वर्ष 2018 160 एमएम अब तक
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अमर उजाला ब्यूरो
रेवाड़ी। 22 सालों से पूरी तरह से सूख पड़ी साहबी नदी में इस बार के मानसून में रेवाड़ी के मसाणी बैराज तक पानी आने की संभावना बढ़ गई है। राजस्थान में अच्छी बारिश के बाद नदी के इलाकों में पड़ने वाले कुछ हिस्सों में पानी आ गया है। धारूहेड़ा से 20 किलोमीटर दूर बिलाहेड़ी और कोटपूतली में नदी में प्राकृतिक प्रवाह में बह रही है। बिलाहेड़ी से आगे कई नदी के प्राकृतिक प्रवाह में जगह-जगह अवरोध हैं। इस कारण राजस्थान समेत हरियाणा में भारी बारिश होने पर मसाणी बैराज तक साहबी के पुराने प्रवाह में बहने की उम्मीद जताई जा रही है।
राजस्थान के जयपुर जिले की पहाड़ियों से निकलने वाली साहबी राजस्थान और हरियाणा के कई जिलों के लिए लाभदायक है। जब नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध नहीं था तब उस समय साहबी का पानी गुरुग्राम और झज्जर जिले तक पहुंचता था। वर्ष 1976 में आई साहबी नदी में बाढ़ ने इन दोनों राज्यों में खूब तबाही मचाई थी। इसके बाद वर्ष 1980 में धारूहेड़ा में साहबी बैराज बनाया गया था। इस बैराज के बनने के बाद साहबी नदी में वर्ष 1995 और 1996 में आई बाढ़ के दौरान ही पानी आया था। इन दोनों साल में आई बाढ़ का असर रेवाड़ी शहर तक पहुंच गया। बावल तथा कोटकासिम क्षेत्र में भी काफी नुकसान हुआ था। उसके बाद से साहबी नदी में पानी नहीं आया। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि नदी का प्राकृतिक प्रवाह बिल्कुल ही अवरुद्ध कर दिया गया है। राजस्थान की तरफ से अपने जिलों में कई स्थानों पर तटबंध बना दिए हैं। कई क्षेत्रों में तो नदी क्षेत्र में ही निर्माण हो गए हैं। ऐसे में पिछले 22 सालों से नदी में पानी तक की धारा बहकर नहीं चली है। पहले नदी का पानी जयपुर, कोटपूतली, बहरोड़ से होता बावल के पावटी गांव से जिला में प्रवेश करता था तथा उसके बाद फिर यह राजस्थान के कोटकासिम से होता हुआ धारूहेड़ा के बैराज में पहुंचाता था। हालांकि बैराज के निर्माण का उद्देश्य भी साहबी में आने वाली बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करके इसके पानी का उपयोग करना था। लेकिन अब निर्माण के बाद ही से बैराज सूखा पड़ा हुआ है।
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अलवर जिले में बारिश के बाद बनी संभावना
शनिवार रात को अलवर जिले के कई क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश हुई है जिसके बाद कोटकासिम-रेवाड़ी मार्ग पर बीलाहेड़ी गांव के समीप साहबी नदी के एक क्षेत्र में पानी बहकर आया है। सुबह के समय पानी की मात्रा काफी अधिक थी लेकिन दोपहर के समय यह कम हो गया लेकिन इसकी वजह से वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगभग तीन-तीन फीट तक पानी होने के कारण स्कूटर-बाइक चालकों के साथ कार चालकों को भी परेशानी हुई।
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जिले में भी झमाझम बारिश अब तक 160 एमएम बारिश
वर्ष 2016 को छोड़ दें तो जिला जुलाई माह में औसत बारिश को भी तरस जाता है लेकिन इस बार अभी तक जुलाई माह में रविवार तक 160 एमएम बारिश हो चुकी है जबकि औसत रूप से यह बारिश जिले में लगभग 145 एमएम पर्याप्त मानी जाती है। इस बार जिले में भी जुलाई माह में औसत से अधिक बारिश हुई तथा अभी आने वाले दिनों में और अधिक बारिश की संभावना बनी हुई है।
रविवार सुबह 8 बजे तक हुई बारिश
रेवाड़ी: 24 एमएम
बावल: 12 एमएम
जाटूसाना: 32 एमएम
नाहड़: 08 एमएम
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जुलाई में अब तक हुई बारिश
वर्ष माह जुलाई
वर्ष 2010 ------------264.0
वर्ष 2011 113 एमएम
वर्ष 2012 55 एमए
वर्ष 2013 123 एमएम
वर्ष 2014 141 एमएम
वर्ष 2015 142 एमएम
वर्ष 2016 276 एमएम
वर्ष 2017 75 एमएम
वर्ष 2018 160 एमएम अब तक