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छह माह में 6 लाख की लागत से लगाए गए 132 डस्टबिन गायब
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रेवाड़ी। लोकसभा चुनाव से पहले शहर के 31 वार्ड में करीब 6 लाख रुपए की लागत से लगाए गए 132 डस्टबिन 6 माह में गायब हो चुके हैं। ये डस्टबिन सांसद निधि के तहत शहर के सभी वार्ड में लगाए गए थे। अब अधिकारियों का कहना है कि पहले तो डस्टबिन किसी ने लगाने नहीं दिए, बाद में घरों के सामने से ही गायब कर दिए । शहर को स्वच्छ रखने में प्रशासन के साथ आम लोगों को भी भागेदारी जरूरी है। बिन जनसहयोग के कुछ भी संभव नहीं है।
स्वच्छता मिशन के तहत सांसद निधि से डस्टबिन खरीद नगर परिषद की ओर से सभी वार्ड में कचरा एकत्रित करने के लिए ये डस्टबिन लगाए गए थे। बताया जा रहा है कि अनदेखी के अभाव में कुछ लोगों द्वारा इन डस्टबिन को वहां से चोरी कर लिया गया या फिर से घर के सामने से उखाड़कर फेंक दिया गया। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि 6 लाख रुपए की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है।
घटिया क्वालिटी के थे डस्टबिन - पूर्व पार्षद
पूर्व पार्षद प्रदीप भार्गव ने कहा कि बड़े शर्म की बात है कि सांसद निधि का लाखों रुपये बर्बाद कर दिया गया। हमें शंका है कि डस्टबिन हल्की क्वालिटी के थे, इसके चलते या तो वे टूट गए या फिर गायब कर दिए गए। उन्होंने कहा कि डस्टबिन नगर परिषद की ओर से लगाए गए थे, ऐसे मेेें बर्बादी का जिम्मेदार कौन है, जांच होनी चाहिए।
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जैम पोर्टल से आईएसआई मार्क के खरीदे थे डस्टबिन: ईओ
नगर परिषद ईओ मनोज यादव ने कहा कि हल्की क्वालिटी का मतलब ही नहीं है। पूरी पारदर्शिता के साथ जैम पोर्टल से डस्टबिन की खरीद हुई थी। सभी डस्टबिन आईएसआई मार्का थे। पोर्टल से खरीदने का मतलब है कि गुणवत्ता खराब नहीं हो सकती है। डस्टबिन लगाते समय भी लोगों ने इनका विरोध किया था। ऐसे में नप अधिकारी हर समय मौके पर मौजूद नहीं हो सकते हैं, सभी के सहयोग से ही व्यवस्था को चलाया जा सकता है। डस्टबिन करीब 6 लाख रुपए के खरीदे गए थे।
स्वच्छता मिशन के तहत सांसद निधि से डस्टबिन खरीद नगर परिषद की ओर से सभी वार्ड में कचरा एकत्रित करने के लिए ये डस्टबिन लगाए गए थे। बताया जा रहा है कि अनदेखी के अभाव में कुछ लोगों द्वारा इन डस्टबिन को वहां से चोरी कर लिया गया या फिर से घर के सामने से उखाड़कर फेंक दिया गया। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि 6 लाख रुपए की बर्बादी का जिम्मेदार कौन है।
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घटिया क्वालिटी के थे डस्टबिन - पूर्व पार्षद
पूर्व पार्षद प्रदीप भार्गव ने कहा कि बड़े शर्म की बात है कि सांसद निधि का लाखों रुपये बर्बाद कर दिया गया। हमें शंका है कि डस्टबिन हल्की क्वालिटी के थे, इसके चलते या तो वे टूट गए या फिर गायब कर दिए गए। उन्होंने कहा कि डस्टबिन नगर परिषद की ओर से लगाए गए थे, ऐसे मेेें बर्बादी का जिम्मेदार कौन है, जांच होनी चाहिए।
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जैम पोर्टल से आईएसआई मार्क के खरीदे थे डस्टबिन: ईओ
नगर परिषद ईओ मनोज यादव ने कहा कि हल्की क्वालिटी का मतलब ही नहीं है। पूरी पारदर्शिता के साथ जैम पोर्टल से डस्टबिन की खरीद हुई थी। सभी डस्टबिन आईएसआई मार्का थे। पोर्टल से खरीदने का मतलब है कि गुणवत्ता खराब नहीं हो सकती है। डस्टबिन लगाते समय भी लोगों ने इनका विरोध किया था। ऐसे में नप अधिकारी हर समय मौके पर मौजूद नहीं हो सकते हैं, सभी के सहयोग से ही व्यवस्था को चलाया जा सकता है। डस्टबिन करीब 6 लाख रुपए के खरीदे गए थे।