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रेवाड़ी की अनाज मंडी के हालात सुधरे,कोसली व बावल में जस के तस------11से 16

Thu, 04 Apr 2019 11:32 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 04 Apr 2019 11:32 PM IST
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रेवाड़ी की अनाज मंडी के हालात सुधरे,कोसली व बावल में जस के तस------11से 16

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रेवाड़ी। जिले की अनाज मंडियों में चल रही सरसों की खरीददारी के दौरान किसानों को दिक्कत न हो इसके लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम के दावे किए जा रहे हैं। शहर के बावल रोड स्थित मंडी में उपायुक्त की देखरेख में किसानों के लिए न केवल टेंट की व्यवस्था की गई है बल्कि पानी व अन्य सुविधाएं भी की गई है, लेकिन जिले के कोसली व बावल की अनाज मंडियों में डीसी के आदेश के बावजूद टेंट की व्यवस्था नहीं की गई। कड़ी धूम में छांव के लिए किसानों को अस्थाई व्यवस्था करनी पड़ रही है। कई किसान पेड़ों की छांव में दिन बिताना पड़ रहा है। पीने के पानी के लिए भी भटकना पड़ रहा है। वहीं अनाज मंडी वीरवार को ----क्विंटल सरसों की खरीद की गई।
उल्लेखनीय है कि जिले की रेवाड़ी, बावल व कोसली की अनाज मंडियों में 28 मार्च से सरसों की खरीद की जा रही है। शुरूआत में किसानों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। डीसी के निर्देश पर बिठवाना अनाज मंडी में धूप से बचने के लिए टेंट और पानी की व्यवस्था की गई । वहीं कोसली व बावल की मंडियों में सरसों बेचने आए किसानों की सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ा रहा है। कोसली अनाज मंडी में तो धूप से बचने के लिए किसानों ने अस्थाई रूप से कपड़े और प्लास्टिक तान कर छाया की व्यवस्था की है। कुछ किसान तो अपने ट्रैक्टरों की छतरी के नीचे बैठकर समय बीता रहे हैं। कमोबेश यहीं हाल बावल की अनाज मंडी का है। यहां भी किसानों को पेड़ों की छांव तलाशनी पड़ी रही है। हालांकि किसानों ने संबंधित अधिकारियों को भी कई बार अवगत करा दिया है, लेकिन समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
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सुबह से मंडी में सरसों बेचने के लिए आए हूं। अपने नंबर का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन किसानों के लिए कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
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-शमशेर
कोसली की मंडी में न तो पानी, बिजली व टेंट जैसी कोई सुविधा नहीं है। किसानों को दिनभर छांव के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है।
-श्योकरण
तेज धूप से बचने के लिए किसानों को कपड़ों से अस्थाई व्यवस्था करनी पड़ रही है। अधिकारियों को भी कई बार अवगत कराया है। लेकिन व्यवस्था नहीं र्हुई।
-नरेंद्र
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