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Panipat: जीजा के हत्यारे दो भाई साढ़े 28 साल बाद गिरफ्तार, 1500 रुपये के लेनदेन में गला रेतकर की थी हत्या

Thu, 01 Feb 2024 06:55 PM IST
नवीन दलाल माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत (हरियाणा)
माई सिटी रिपोर्टर, पानीपत (हरियाणा) Published by: नवीन दलाल Updated Thu, 01 Feb 2024 06:55 PM IST
सार

पानीपत पुलिस को साढ़े 28 साल बाद आरोपियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त हुई है। आरोपी दो भाइयों ने रिफाइनरी के पास झुग्गियों में जीजा की हत्या थी। अब पुलिस ने इन आरोपियों को एक दिन के रिमांड पर लिया गया है।

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Two brothers murderers of brother in law arrested After twenty eight years, murdered by slitting throat in Pan
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

1995 में रिफाइनरी के पास झुग्गियों में जीजा की हत्या के बाद 29 साल तक फरार रहे दो भाइयों को पानीपत सीआईए वन की टीम ने कड़े प्रयासों के बाद गिरफ्तार कर लिया है। हत्यारोपी छोटा भाई हत्या के बाद दक्षिणी दिल्ली में एक सैन्य अधिकारी के घर पर नौकरी करने लगा। बड़ा भाई मथूरा में का आश्रम में छुपकर रह रहा था।

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ये दोनों माह में एक दो बार रात को छुपकर अपने बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित घर जाते थे। पुलिस ने इनके गांव में डेरा डाला था। यहां मंगलवार रात को परिवार से मिलने आए आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया। उसकी निशानदेही पर छोटे भाई को दक्षिणी दिल्ली स्थित सैन्य अधिकारी के घर से पकड़ा। दोनों को गिरफ्तार कर पुलिस पानीपत लेकर आई। यहां इनको एक दिन के रिमांड पर लिया गया है।
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ऐसे की थी हत्या
सीआईए वन प्रभारी दीपक कुमार ने बताया कि 1995 में बोहली गांव स्थित रिफाइनरी का निर्माण कार्य चल रहा था। यहां बिहार के पूर्वी चंपारण जिले के गांव रत्नपुर निवासी शुंभू यादव सीसीपीएल कंपनी के माध्यम से रिफाइनरी में मजदूरी करता था। उसके बड़े भाई का साला जगत राय व बलिराय बेरोजगार थे। शुंभू ने दोनों को बिहार से पानीपत रिफानरी में मजदूरी के लिए बुला लिया। ये शुंभू यादव का छोटा भाई नगीना भी यहीं पर मजदूरी करता था।
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ये सभी रिफाइनरी के पास बनी झुग्गियों में ही रहते थे। 26 जुलाई 1995 को शुंभू का 1500 रुपये के लेनदेन में जगत राय व बलिराय का विवाद हो गया था। रात को जगत राज व बलिराज ने शुंभू यादव के साथ मारपीट की और चाकू से उसका गला काटकर उसकी हत्या कर दी थी। इस पूरी वारदात को शुंभू यादव के छोटे भाई नगीना ने देख लिया था लेकिन वो डर के मारे भाई को नहीं बचा पाया। जगत राय व बलिराय दोनों वारदात के बाद फरार हो गए थे। इस मामले में कंपनी के मुंशी मुख्तियार की शिकायत पर केस दर्ज किया था लेकिन पुलिस इनको पकड़ नहीं पाई। 1995 से ही दोनों फरार थे। 

जानिये पुलिस ने कैसे दोनों को पकड़ा
29 साल से दोनों आरोपी भाई फरार चल रहे थे। इस केस की फाइल भी फट चुकी थी। फाइल की स्याही भी फैल गई थी। शिकायतकर्ता, आरोपी व मृतक के नाम व इनके घर के पते भी मिट चुके थे। पुलिस के पास  आरोपियों के फोटो तक नहीं थे। पुलिस ने कोर्ट से 1995 की फाइल निकलवाई। इस फाइल में सभी के नाम व पते मिले। दिसंबर 2023 में सीआईए वन की आठ सदस्यीय टीम एएसआई कृपाल के नेतृत्व में बिहार गई और यहां शिकायकर्ता मुख्तियार की तलाश की लेकिन भेद नहीं लगा। फिर पुलिस मृतक शुंभू यादव की पत्नी के पास उसके रत्नपुर गांव में गई।

उसकी पत्नी की दूसरी शादी हो चुकी है। यहां से भी कुछ खास सुराग हाथ नहीं लगा। फिर पुलिस आरोपी जगत राय के घर गई। यहां उसके परिजन मिले लेकिन उन्होंने जगत के बारे में कोई भी जानकारी होने से इंकार कर दिया। पुलिस की टीम वापस पानीपत आ गई। पिछले सप्ताह टीम दोबारा आरोपी जगत राव बलिराय के पूर्व चंपारण स्थित गांव में गई। यहां से पुलिस को इनपुट मिला कि जगत राय माह में एक दो बार घर पर आता है। पुलिस ने गांव में ही डेरा डाल लिया और सिविल ड्रेस में जगत राय के घर पर नजर रखने लगी। मंगलवार रात को जैसे ही जगत राय घर पर आया पुलिस ने उसे पकड़ लिया। 


18 साल बाद मिले दोनों भाई फूट फूटकर रोए
2005 के बाद से ही जगत राय व बलिराय एक दूसरे से नहीं मिले। जब जगत राय को पुलिस ने पकड़ा। उसने पुलिस के सामने ये कबूल करने से इंकार कर दिया कि वो जगतराय नहीं है।ग्रामीणों ने उसकी पहचान कराई। फिर पुलिस जगत राय की निशानदेही पर दक्षिणी दिल्ली में सैन्य अधिकारी के घर पहुंची और यहां से बलिराय को गिरफ्तार किया। दोनों भई एक दूसरे को देखकर भावुक हो गए और गले लगकर रोए। दोनों हत्या का जिम्मा खुद पर लेने पर लगे।

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