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Panipat News: प्रताड़ित महिलाओं को नहीं मिल रहा सुकून
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पानीपत। घरेलू और यौन हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए फरवरी 2015 में जिला नागरिक अस्पताल में खुला सुकून सेंटर बंद हो गया है। पिछले आठ माह से सुकून सेंटर पर ताला लगा है। सरकार सुकून सेंटर में काउंसलर के लिए नियुक्ति नहीं कर पाई। इसलिए इसको बंद करना पड़ा। अब जिला नागरिक अस्पताल में आने वाली यौन व घरेलू हिंसा की पीड़ित महिलाओं की काउंसलिंग नहीं की जा रही है। उनको कानूनी सहायता की जानकारी नहीं मिल पा रही है।
सुकून केंद्र में फरवरी 2015 से सितंबर 2023 तक 1088 केस आए हैं। प्रदेश के 12 जिलाें में सुकून केंद्र चल रहा है। पानीपत घरेलू व यौन हिंसा के मामलों में प्रदेश में चौथे स्थान पर है। हरियाणा स्टेट हेल्थ रिसॉर्स सेंटर (एचएसएचआरसी) की ओर से सिविल अस्पताल में फरवरी-2015 में सुकून सेंटर खोला गया था। साल-दर-साल महिलाओं और बेटियों के उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सुकून सेंटर में शारीरिक, यौन हिंसा, आर्थिक, मौखिक और भावनात्मक हिंसा जैसे मामलों में मदद दी जाती है। पीड़िताओं को एक छत के नीचे स्वास्थ्य, कानूनी और पुलिस मदद प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं हताश-निराश पीड़िताओं की काउंसिलिंग कर उन्हें फिर से समाज की मुख्य धारा से जोड़ दिया जाता है।
पीड़िता को सबसे पहले चिकित्सा सुविधा, इसके बाद काउंसिलिंग होती है। पीड़िता शिकायत दर्ज कराना चाहे तो सेंटर में ही पुलिस उसकी शिकायत ले लेती है, उसे थाना जाने की जरूरत नहीं पड़ती। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से वकील उपलब्ध रहते हैं। पीड़िता घर न जाना चाहे तो बालिग को वन स्टॉप सेंटर, नाबालिग को चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन भेजा जाता है।
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प्रदेश सरकार ने फरवरी 2015 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चार जिले पानीपत, अंबाला पंचकूला और यमुनानगर में सुकून सेंटरों की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य पीड़िताओं को एक छत के नीचे मदद पहुंचाना है। सुकून सेंटर हर जिले के सिविल अस्पताल में खोले गए हैं। सरकार का मानना था कि घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, शारीरिक-मानसिक शोषण, एसिड अटैक की अधिकांश पीड़िता मेडिकल और इलाज के लिए अस्पताल जरूर पहुंचती हैं।
बॉक्स
12 जिलों में खोले जा चुके सेंटर
प्रदेश हर जिले में सुकून सेंटर खोले जाने हैं, 12 जिलों में खोले गए थे। इनमें पानीपत, अंबाला पंचकूला, यमुनानगर के अलावा करनाल, रोहतक, हिसार, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी शामिल हैं। पानीपत का सुकून केंद्र काउंसलर के अभाव में बंद हो चुका है।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि हमारे पास काउंसलर नहीं है। इसलिए फिलहाल सुकून केंद्र की सेवाएं रोकनी पड़ी है। आचार संहिता के बाद काउंसलर की नियुक्ति की जाएगी। फिर महिलाओं के लिए यह सेवा दोबारा शुरू होगी।
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सुकून केंद्र में फरवरी 2015 से सितंबर 2023 तक 1088 केस आए हैं। प्रदेश के 12 जिलाें में सुकून केंद्र चल रहा है। पानीपत घरेलू व यौन हिंसा के मामलों में प्रदेश में चौथे स्थान पर है। हरियाणा स्टेट हेल्थ रिसॉर्स सेंटर (एचएसएचआरसी) की ओर से सिविल अस्पताल में फरवरी-2015 में सुकून सेंटर खोला गया था। साल-दर-साल महिलाओं और बेटियों के उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सुकून सेंटर में शारीरिक, यौन हिंसा, आर्थिक, मौखिक और भावनात्मक हिंसा जैसे मामलों में मदद दी जाती है। पीड़िताओं को एक छत के नीचे स्वास्थ्य, कानूनी और पुलिस मदद प्रदान की जाती है। इतना ही नहीं हताश-निराश पीड़िताओं की काउंसिलिंग कर उन्हें फिर से समाज की मुख्य धारा से जोड़ दिया जाता है।
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पीड़िता को सबसे पहले चिकित्सा सुविधा, इसके बाद काउंसिलिंग होती है। पीड़िता शिकायत दर्ज कराना चाहे तो सेंटर में ही पुलिस उसकी शिकायत ले लेती है, उसे थाना जाने की जरूरत नहीं पड़ती। जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण की ओर से वकील उपलब्ध रहते हैं। पीड़िता घर न जाना चाहे तो बालिग को वन स्टॉप सेंटर, नाबालिग को चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशन भेजा जाता है।
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प्रदेश सरकार ने फरवरी 2015 में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चार जिले पानीपत, अंबाला पंचकूला और यमुनानगर में सुकून सेंटरों की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य पीड़िताओं को एक छत के नीचे मदद पहुंचाना है। सुकून सेंटर हर जिले के सिविल अस्पताल में खोले गए हैं। सरकार का मानना था कि घरेलू हिंसा, दुष्कर्म, शारीरिक-मानसिक शोषण, एसिड अटैक की अधिकांश पीड़िता मेडिकल और इलाज के लिए अस्पताल जरूर पहुंचती हैं।
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12 जिलों में खोले जा चुके सेंटर
प्रदेश हर जिले में सुकून सेंटर खोले जाने हैं, 12 जिलों में खोले गए थे। इनमें पानीपत, अंबाला पंचकूला, यमुनानगर के अलावा करनाल, रोहतक, हिसार, जींद, गुरुग्राम, फरीदाबाद और रेवाड़ी शामिल हैं। पानीपत का सुकून केंद्र काउंसलर के अभाव में बंद हो चुका है।
वर्जन-
सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने बताया कि हमारे पास काउंसलर नहीं है। इसलिए फिलहाल सुकून केंद्र की सेवाएं रोकनी पड़ी है। आचार संहिता के बाद काउंसलर की नियुक्ति की जाएगी। फिर महिलाओं के लिए यह सेवा दोबारा शुरू होगी।