{"_id":"627c1ee7bbf4ad0ba6346679","slug":"toppers-will-make-constructive-and-reasoned-answers-not-rote-bye-panipat-news-knl1078842197","type":"story","status":"publish","title_hn":"रटे-रटाए नहीं, रचनात्मक व तर्कपूर्ण उत्तर बनाएंगे टॉपर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रटे-रटाए नहीं, रचनात्मक व तर्कपूर्ण उत्तर बनाएंगे टॉपर
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पानीपत। तीन घंटे की बोर्ड परीक्षा में 100 में से 100 अंक लाने वाले जीनियस हैं। यह सोच बदलना जरूरी है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) इसके लिए मूल्यांकन व्यवस्था बदलने की तैयारी में है। रटे-रटाए नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के तर्कशील और रचनात्मक उत्तर बेहतर अंक दिलाएगा। इसकी शुरुआत बोर्ड की टर्म टू परीक्षा से हो गई है। शिक्षाविदों ने बताया कि मूल्यांकन में बदलाव के लिए इस बार 10वीं में 30 और 12वीं में 20 प्रतिशत प्रश्न इसी पद्धति पर पूछे गए हैं, जिनके उत्तर रचनात्मक होने पर ही विद्यार्थियों को बेहतर अंक मिलेंगे।
सीबीएसई के अनुसार लोगों में भ्रम है कि तीन घंटे की बोर्ड परीक्षा में 100 में 100 अंक रटकर ही लाए जा सकते हैं। इस भ्रम को दूर करना है। इसे बदलने के लिए प्रश्नों की गुणवत्ता बदलेगी और भविष्य में ऐसे प्रश्न होंगे, जिनके उत्तर विद्यार्थी रटकर न दे पाएंगे। उत्तर क्षमतापरक, कौशलपरक और रचनात्मक हों और विद्यार्थियों को सोचना-समझना, आकलन करके रचनात्मक उत्तर देना होगा। बोर्ड सैंपल पेपर भी अपलोड करेगा।
सीबीएसई के अनुसार कक्षा तीन, पांच और आठवीं के विद्यार्थियों का लर्निंग आउटकम सर्वे होगा। इसमें उन्हें जो पढ़ाया गया, वह उन्हें समझ आया या नहीं, आंकलन किया जाएगा। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट जारी है, जो अगले साल से राष्ट्रीय स्तर पर सीबीएसई द्वारा सभी स्कूलों में लागू होगा। इसमें ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जो अलग तरह के होंगे और रचनात्मक एवं कलात्मक तरीके से सोच-समझकर उत्तर देने होंगे। प्रश्न जानकारी परखने वाले होंगे, उत्तर सीधे-सीधे नहीं, सोच-समझकर बौद्धिक स्तर परखने वाले होंगे। बाद में इसे नौवीं और 11वीं के स्तर तक ले जाया जाएगा।
विज्ञापन
आंतरिक मूल्यांकन बना रहे पारदर्शी
बोर्ड परीक्षा के आंतरिक मूल्यांकन को पारदर्शी, त्वरित और नियमित बनाना है। स्कूलों को सभी नियमों का पालन करना होगा। शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर, दस्तावेज अपलोड कराए जा रहे हैं। जिन स्कूलों में मिड टर्म और प्रैक्टिकल के अंकों में अधिक भिन्नता मिली, उन्हें चेतावनी दी गई। अमान्य कार्य करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी हुई। डमी परीक्षार्थियों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। भविष्य में आनलाइन आफलाइन कोर्स संचालित रहेंगे, क्योंकि आनलाइन शिक्षण के कई फायदे हैं। इसमें हजारों विद्यार्थियों को एकसाथ पढ़ाकर लेक्चर रिकार्ड कर रिवीजन भी कर सकते हैं।
वर्जन-
सीबीएसई मूल्यांकन व्यवस्था बदलने की तैयारी में हैं। सीबीएसई विद्यार्थियों को रटे-रटाए नहीं, बल्कि उनके तर्कशील, क्षमतावान और रचनात्मक उत्तर के आधार पर अंक देगा। इसकी शुरुआत बोर्ड की टर्म टू परीक्षा से हो गई है।
- विनीता तोमर, जिला कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई, पानीपत।
विज्ञापन
सीबीएसई के अनुसार लोगों में भ्रम है कि तीन घंटे की बोर्ड परीक्षा में 100 में 100 अंक रटकर ही लाए जा सकते हैं। इस भ्रम को दूर करना है। इसे बदलने के लिए प्रश्नों की गुणवत्ता बदलेगी और भविष्य में ऐसे प्रश्न होंगे, जिनके उत्तर विद्यार्थी रटकर न दे पाएंगे। उत्तर क्षमतापरक, कौशलपरक और रचनात्मक हों और विद्यार्थियों को सोचना-समझना, आकलन करके रचनात्मक उत्तर देना होगा। बोर्ड सैंपल पेपर भी अपलोड करेगा।
विज्ञापन
सीबीएसई के अनुसार कक्षा तीन, पांच और आठवीं के विद्यार्थियों का लर्निंग आउटकम सर्वे होगा। इसमें उन्हें जो पढ़ाया गया, वह उन्हें समझ आया या नहीं, आंकलन किया जाएगा। फिलहाल पायलट प्रोजेक्ट जारी है, जो अगले साल से राष्ट्रीय स्तर पर सीबीएसई द्वारा सभी स्कूलों में लागू होगा। इसमें ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जो अलग तरह के होंगे और रचनात्मक एवं कलात्मक तरीके से सोच-समझकर उत्तर देने होंगे। प्रश्न जानकारी परखने वाले होंगे, उत्तर सीधे-सीधे नहीं, सोच-समझकर बौद्धिक स्तर परखने वाले होंगे। बाद में इसे नौवीं और 11वीं के स्तर तक ले जाया जाएगा।
विज्ञापन
आंतरिक मूल्यांकन बना रहे पारदर्शी
बोर्ड परीक्षा के आंतरिक मूल्यांकन को पारदर्शी, त्वरित और नियमित बनाना है। स्कूलों को सभी नियमों का पालन करना होगा। शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर, दस्तावेज अपलोड कराए जा रहे हैं। जिन स्कूलों में मिड टर्म और प्रैक्टिकल के अंकों में अधिक भिन्नता मिली, उन्हें चेतावनी दी गई। अमान्य कार्य करने वाले स्कूलों पर कार्रवाई भी हुई। डमी परीक्षार्थियों पर सख्ती बढ़ाई जाएगी। भविष्य में आनलाइन आफलाइन कोर्स संचालित रहेंगे, क्योंकि आनलाइन शिक्षण के कई फायदे हैं। इसमें हजारों विद्यार्थियों को एकसाथ पढ़ाकर लेक्चर रिकार्ड कर रिवीजन भी कर सकते हैं।
वर्जन-
सीबीएसई मूल्यांकन व्यवस्था बदलने की तैयारी में हैं। सीबीएसई विद्यार्थियों को रटे-रटाए नहीं, बल्कि उनके तर्कशील, क्षमतावान और रचनात्मक उत्तर के आधार पर अंक देगा। इसकी शुरुआत बोर्ड की टर्म टू परीक्षा से हो गई है।
- विनीता तोमर, जिला कोऑर्डिनेटर, सीबीएसई, पानीपत।