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Panipat News: पॉलिसीधारक ने जमा नहीं किया प्रीमियम, नहीं मिलेगा रिफंड
Fri, 05 Jun 2026 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत
Updated Fri, 05 Jun 2026 01:26 AM IST
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पानीपत। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग, पानीपत ने एक बीमा कंपनी के खिलाफ दायर शिकायत को खारिज कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पॉलिसीधारक ने समय पर प्रीमियम जमा नहीं किया, जिसके कारण पॉलिसी लैप्स हो गई। ऐसे में बीमा कंपनी किसी प्रकार का भुगतान या रिफंड देने के लिए बाध्य नहीं है।
समालखा क्षेत्र निवासी एक युवक ने रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने 23 दिसंबर 2022 को करीब 20 हजार रुपये एकमुश्त निवेश के उद्देश्य से पॉलिसी ली थी, लेकिन कंपनी ने उसे 12 वर्ष की नियमित प्रीमियम जमा करने वाली पॉलिसी जारी कर दी।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि समस्या के समाधान के लिए उसने कई बार कंपनी कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन उसकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद उसने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर पॉलिसी में संशोधन करने अथवा जमा राशि वापस करने की मांग की।
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वहीं, बीमा कंपनी की ओर से आयोग में दलील दी गई कि पॉलिसी दस्तावेज समय पर शिकायतकर्ता को उपलब्ध करा दिए गए थे और उसे पॉलिसी की सभी शर्तों की जानकारी थी। यदि उसे किसी प्रकार की आपत्ति थी तो वह निर्धारित अवधि के भीतर पॉलिसी रद्द कर सकता था। कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने पहले वर्ष के बाद कोई प्रीमियम जमा नहीं किया, जिसके कारण पॉलिसी स्वतः लैप्स हो गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने केवल एक वर्ष का प्रीमियम जमा किया था और उसके बाद कोई भुगतान नहीं किया। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, निर्धारित तिथि और 30 दिन की ग्रेस पीरियड के भीतर प्रीमियम जमा न होने पर पॉलिसी स्वतः समाप्त हो जाती है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कोई कमी साबित नहीं हुई। इसी आधार पर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी गई।
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समालखा क्षेत्र निवासी एक युवक ने रिलायंस निप्पॉन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि उसने 23 दिसंबर 2022 को करीब 20 हजार रुपये एकमुश्त निवेश के उद्देश्य से पॉलिसी ली थी, लेकिन कंपनी ने उसे 12 वर्ष की नियमित प्रीमियम जमा करने वाली पॉलिसी जारी कर दी।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि समस्या के समाधान के लिए उसने कई बार कंपनी कार्यालय के चक्कर लगाए, लेकिन उसकी शिकायत का समाधान नहीं किया गया। इसके बाद उसने कंपनी को कानूनी नोटिस भेजकर पॉलिसी में संशोधन करने अथवा जमा राशि वापस करने की मांग की।
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वहीं, बीमा कंपनी की ओर से आयोग में दलील दी गई कि पॉलिसी दस्तावेज समय पर शिकायतकर्ता को उपलब्ध करा दिए गए थे और उसे पॉलिसी की सभी शर्तों की जानकारी थी। यदि उसे किसी प्रकार की आपत्ति थी तो वह निर्धारित अवधि के भीतर पॉलिसी रद्द कर सकता था। कंपनी ने यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने पहले वर्ष के बाद कोई प्रीमियम जमा नहीं किया, जिसके कारण पॉलिसी स्वतः लैप्स हो गई।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने केवल एक वर्ष का प्रीमियम जमा किया था और उसके बाद कोई भुगतान नहीं किया। पॉलिसी की शर्तों के अनुसार, निर्धारित तिथि और 30 दिन की ग्रेस पीरियड के भीतर प्रीमियम जमा न होने पर पॉलिसी स्वतः समाप्त हो जाती है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी की ओर से सेवा में कोई कमी साबित नहीं हुई। इसी आधार पर शिकायतकर्ता की याचिका खारिज कर दी गई।