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Panipat News: वृंदावन के कान्हा और मथुरा की पोशाक से बाजार में भक्ति की बयार
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खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
- दुकानों पर दिख रही ग्राहकों की कतार, बांसुरी और मोरपंख की भी बढ़ी मांग
संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जन्माष्टमी के लिए बाजार में रौनक बढ़ गई है। खासकर लड्डू गोपाल की दुकान कान्हा की मूर्तियों, बांसुरी, मोरपंख, मुकुट, सजावट के सामान से सज गई है। सुबह से शाम तक ग्राहकों की कतार लग रही है। कान्हा की मूर्तियों में चार, पांच और छह नंबर साइज की मांग ज्यादा है। बाजार में ज्यादातर वृंदावन से कान्हा की मूर्तियां आ रही हैं। जिन्हें लोग पसंद भी कर रहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल ज्यादा खरीदारी की जा रही है।
इंसार बाजार स्थित हन्नी की दुकान के संचालक हन्नी ने बताया कि कान्हा की पोशाक मथुरा से लाई जा रही हैं। इसकी कीमत 200 रुपये से दो हजार तक है। वहीं कान्हा के मोर पंख की कीमत 10 से 50 रुपये तक है। 50 से दो हजार रुपये तक के झूले मिल रहे हैं। वृंदावन से कान्हा की मूर्तियां लाई जा रही हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से शुरू होकर पांच हजार तक है, जिन्हें लोग पसंद भी कर रहे हैं।
सेक्टर 13-17 निवासी आरती ने बताया कि वह कई महीने से कान्हा घर लेकर आने की सोच रही थी। फिर परिवार वालों ने सुझाव दिया कि जन्माष्टमी पर ही कान्हा को घर लाना चाहिए, इसलिए वह इंसार बाजार से कान्हा घर लेकर जाएंगी। उसने कान्हा के लिए झूला, बांसुरी, मोर पंख, पोशाक खरीद ली हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
पानीपत। जन्माष्टमी के लिए बाजार में रौनक बढ़ गई है। खासकर लड्डू गोपाल की दुकान कान्हा की मूर्तियों, बांसुरी, मोरपंख, मुकुट, सजावट के सामान से सज गई है। सुबह से शाम तक ग्राहकों की कतार लग रही है। कान्हा की मूर्तियों में चार, पांच और छह नंबर साइज की मांग ज्यादा है। बाजार में ज्यादातर वृंदावन से कान्हा की मूर्तियां आ रही हैं। जिन्हें लोग पसंद भी कर रहे हैं। पिछले साल की अपेक्षा इस साल ज्यादा खरीदारी की जा रही है।
इंसार बाजार स्थित हन्नी की दुकान के संचालक हन्नी ने बताया कि कान्हा की पोशाक मथुरा से लाई जा रही हैं। इसकी कीमत 200 रुपये से दो हजार तक है। वहीं कान्हा के मोर पंख की कीमत 10 से 50 रुपये तक है। 50 से दो हजार रुपये तक के झूले मिल रहे हैं। वृंदावन से कान्हा की मूर्तियां लाई जा रही हैं। इनकी कीमत 100 रुपये से शुरू होकर पांच हजार तक है, जिन्हें लोग पसंद भी कर रहे हैं।
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सेक्टर 13-17 निवासी आरती ने बताया कि वह कई महीने से कान्हा घर लेकर आने की सोच रही थी। फिर परिवार वालों ने सुझाव दिया कि जन्माष्टमी पर ही कान्हा को घर लाना चाहिए, इसलिए वह इंसार बाजार से कान्हा घर लेकर जाएंगी। उसने कान्हा के लिए झूला, बांसुरी, मोर पंख, पोशाक खरीद ली हैं।
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