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रूसी सेना कर रही सहयोग यू्क्रेनियन से नहीं मिली मदद
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समालख्या। यूक्रेन से लौटा छात्र शुभम शर्मा अपने परिजनों व ग्रामीणों के साथ
- फोटो : Panipat
समालखा (पानीपत)। यूक्रेन से भारतीयों को ऑपरेशन गंगा के तहत भारत सरकार वापस ला रही है। वीरवार की शाम को गांव चुलकाना निवासी एमबीबीएस के छात्र शुभम शर्मा भी सुरक्षित घर लौट आए। उन्होंने बताया कि रूसी सेना तो भारतीयों से सहयोग कर रही है लेकिन यूक्रेनियन सेना से मदद नहीं मिल रही। गांव पहुंचने पर परिजनों और ग्रामीणों ने शुभम का स्वागत किया।
शुभम शर्मा ने बताया कि यूक्रेन में हालात हर दिन बीतने के साथ खराब होते जा रहे हैं। वह यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर ट्रनोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी में थे। ट्रनोपिल शहर के आसपास भी बमबारी हुई है। वहां से निकलने के लिए 25 फरवरी की रात 10 साथियों के साथ बस के माध्यम से बॉर्डर के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद रोमानिया बॉर्डर पार करने में दो दिन लग गए। वहां पर यूक्रेनियन सेना ने उनकी मदद नहीं की लेकिन रूसी सेना ने सहयोग किया।
शुभम ने बताया कि यूनिवर्सिटी से रोमानिया बॉर्डर तक मुश्किल से आम दिनों में एक हजार रुपये लगते हैं। युद्ध के चलते वहां पर लूट मची है। 10 विद्यार्थियों से बस के लिए एक लाख रुपये लिए गए। वतन लौटे शुभम ने भारत सरकार का शुक्रिया करते हुए कहा कि वहां फंसे अन्य भारतीयों को भी जल्द से जल्द निकालें। शुभम के पिता कृष्ण शर्मा एवं भाई रवि ने खुशी जताते हुए भारत सरकार का आभार जताया। इस अवसर पर प्रकाश, राजेश, रामफल, प्रवीन आदि मौजूद रहे।
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यूनिवर्सिटी बहकाती रही, इससे बढ़ी परेशानी
शुभम ने बताया कि भारतीय विद्यार्थी वहां काफी परेशानी में हैं। सभी बंकर में छिपे रहे। दो दिन तो केवल पानी पर ही गुजारा किया। यूनिवर्सिटी ने उन्हें बंधक के रूप में रखा था और कहते रहे कि युद्ध नहीं होगा। विद्यार्थियों को बहकाते रहे, जिसके चलते उनकी परेशानी बढ़ी।
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शुभम शर्मा ने बताया कि यूक्रेन में हालात हर दिन बीतने के साथ खराब होते जा रहे हैं। वह यूक्रेन की राजधानी कीव से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर ट्रनोपिल नेशनल यूनिवर्सिटी में थे। ट्रनोपिल शहर के आसपास भी बमबारी हुई है। वहां से निकलने के लिए 25 फरवरी की रात 10 साथियों के साथ बस के माध्यम से बॉर्डर के लिए रवाना हुए थे। इसके बाद रोमानिया बॉर्डर पार करने में दो दिन लग गए। वहां पर यूक्रेनियन सेना ने उनकी मदद नहीं की लेकिन रूसी सेना ने सहयोग किया।
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शुभम ने बताया कि यूनिवर्सिटी से रोमानिया बॉर्डर तक मुश्किल से आम दिनों में एक हजार रुपये लगते हैं। युद्ध के चलते वहां पर लूट मची है। 10 विद्यार्थियों से बस के लिए एक लाख रुपये लिए गए। वतन लौटे शुभम ने भारत सरकार का शुक्रिया करते हुए कहा कि वहां फंसे अन्य भारतीयों को भी जल्द से जल्द निकालें। शुभम के पिता कृष्ण शर्मा एवं भाई रवि ने खुशी जताते हुए भारत सरकार का आभार जताया। इस अवसर पर प्रकाश, राजेश, रामफल, प्रवीन आदि मौजूद रहे।
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यूनिवर्सिटी बहकाती रही, इससे बढ़ी परेशानी
शुभम ने बताया कि भारतीय विद्यार्थी वहां काफी परेशानी में हैं। सभी बंकर में छिपे रहे। दो दिन तो केवल पानी पर ही गुजारा किया। यूनिवर्सिटी ने उन्हें बंधक के रूप में रखा था और कहते रहे कि युद्ध नहीं होगा। विद्यार्थियों को बहकाते रहे, जिसके चलते उनकी परेशानी बढ़ी।