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Panipat News: गुरुद्वारा पहली पातशाही में नौ साल बाद सजेंगे गुरु ग्रंथ साहिब

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 12 Apr 2026 02:38 AM IST
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The Guru Granth Sahib will be installed at Gurdwara Pehli Patshahi after nine years.
पानीपत। जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा पहली पातशाही में नौ साल बाद 12 अप्रैल रविवार को गुरु ग्रंथ साहिब विराजे जाएंगे। जीटी रोड स्थित पहली पातशाही बनकर तैयार हो गया है। गुरु ग्रंथ साहिब के आठ स्वरूपों को पंच प्यारों की अगुवाई में नगर कीर्तन के रूप में गुरुद्वारा में लाया जाएगा। इसमें आकर्षण का केंद्र गुरु ग्रंथ साहिब की पालकी रहेगी। इसके साथ तीन दिवसीय कीर्तन समागम आयोजित किया जाएगा। 14 अप्रैल को कथा कीर्तन समागम किया जाएगा।
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जीटी रोड स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा पहली पातशाही वर्ष 2017 में मरम्मत कार्य के दौरान ढह गया था। इसमें कई लोगों की मौत हो गई थी। गुरु ग्रंथ साहिब को जीटी रोड स्थित गुरु तेगबहादुर भवन में रखा था। गुरुद्वारा का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है, इसमें आधुनिक सुविधा दी गई हैं। गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के वरिष्ठ सदस्य जसविंदर सिंह व ग्रंथी बलविंदर सिंह ने बताया कि सात साल बाद 12 अप्रैल रविवार को गुरुद्वारा पहली पातशाही में गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश होगा। रविवार को सुबह करीब साढ़े आठ बजे गुरु तेग बहादुर भवन से गुरु ग्रंथ साहिब के आठ स्वरूपों को नगर कीर्तन के रूप में लाया जाएगा, इसके बाद श्री अखंड साहिब पाठ किया जाएगा। गुरुद्वारा में 14 अप्रैल मंगलवार को खालसा साजना दिवस पर कथा कीर्तन समागम होगा। इसमें श्री अखंड साहिब पाठ होगा। कथा-कीर्तन और समागम के माध्यम से संगत को गुरु के जीवन संदेशों से अवगत कराया जाएगा। समापन पर अटूट लंगर बरताया जाएगा।
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तीन मंजिला गुरुद्वारा, प्रथम तल पर कार्यालय
गुरुद्वारा पहली पातशाही तीन मंजिला बनाया है। प्रथम तल पर कार्यालय, दूसरे पर गुरु ग्रंथ साहिब पालकी और तीसरे पर अन्य व्यवस्थाओं के लिए कमरे बनाए गए हैं। गुरुद्वारा में लिफ्ट लगाई गई है। इसमें एक समय में आठ से दस लोग आ जा सकेंगे। गुरुद्वारा लिफ्ट, सेंसर युक्त दरवाजे, साउंड प्रूफ सुविधा बढ़ाई गई हैं। गुरुद्वारा में जयपुर, मकराना व आगरा के कारीगरों ने फूलों व सामानों से नक्काशी और पिलरों पर लकड़ी में आकर्षक डिजाइनिंग की गई है। गुरुद्वारा के भूतल में लंगर भवन बनाया है। यहां हर रोज लंगर लगेगा और संगत गुरु का प्रसाद चखेगी।
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गुरुनानक देव गुरुद्वारा में आए थे
गुरुद्वारा पहली पातशाही में गुरुनानक देव दिल्ली से पहली उदासी (1507-1515) के समय आए थे। यहां गुरु नानक देव ने शेख शरफ (बू अली कलंदर) और उनके शिष्य टिहरी के साथ चर्चा की थी। ग्रंथी बलविंदर सिंह ने बताया कि श्री गुरुद्वारा सिंह सभा पहली पातशाही जीटी रोड का इतिहास बहुत पुराना है।
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