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Panipat News: टेक्सटाइल नगरी ने छुआ आसमान

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 09 Jan 2025 03:50 AM IST
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Textile city touched the sky
पानीपत। भारत प्रवासी दिवस प्रवासियों के लिए किसी क्षेत्र के विकास में योगदान को दर्शाता है। प्रवासी एक स्थान से दूसरे स्थान पर अपनी संस्कृति को लेकर जाते हैं और इसका विस्तार करते हैं। विश्व विख्यात टेक्सटाइल नगरी के असल सूत्रधार यहां रह रहे चार लाख प्रवासी हैं। इन प्रवासियों ने उद्योगों में 24 घंटे मेहनत कर पानीपत के उत्पाद तैयार किए और पानीपत को विश्व में एक पहचान दिलाई है।
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पानीपत के तौलिये, बेडसीट, बाथमेट, कुशन कवर व कंबल विश्व भर में प्रसिद्ध है। इन उत्पादों को बनाने वाले कारीगर प्रवासी ही हैं। पानीपत के 20 हजार उद्योगों में काम करने वाले 90 प्रतिशत सुरक्षाकर्मी, मशीनों के मैकेनिक, लेबर, डिजाइनर, मैनेजर, मास्टर सुपरवाइजर प्रवासी ही हैं। पानीपत का वार्षिक निर्यात 16 हजार करोड़ व घरेलू बाजार 80 हजार करोड़ से अधिक है।
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पानीपत प्रदेश में गुरुग्राम के बाद सबसे अधिक 12 हजार करोड़ रुपये टैक्स देने वाली नगरी है। पानीपत को इस कदर सक्षम बनाने के पीछे प्रवासियों की कड़ी मेहनत है। यहां देश के हर कोने का व्यक्ति काम करते हुए मिल जाएगा। यहां उत्तराखंड, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, पश्चिमी बंगाल, हिमाचल प्रदेश व राजस्थान के सबसे अधिक लोग रहते हैं। यहां के लोग पानीपत की राजनीति में भी अहम रोल निभाते हैं। पानीपत में 50 हजार से अधिक मतदाता प्रवासी ही हैं। पानीपत के उद्योग नगरी बनने की कहानी 1969 में शुरू हुई थी। जब दो उद्यमियों ने यहां खड्डी लगाई थी। इसके बाद टेक्सटाइल उद्योग में 1974 में क्रांति आई थी।

कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में बनाया गया आईसालेशन वार्ड। संवाद

कुरुक्षेत्र। एलएनजेपी अस्पताल में बनाया गया आईसालेशन वार्ड। संवाद

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