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तीन माह में 36 हजार बच्चों की जांच, आठ हजार में मिला खून कम
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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग टेस्ट, ट्रीट व टाक आधारित थीम पर जिले में एनीमिया मुक्त अभियान चला रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने तीन माह में 36 हजार बच्चों की जांच की है। इनमें से 12 साल की आयु के आठ हजार बच्चों में रक्त की मात्रा पूर्ण नहीं है जबकि जिले की 69 प्रतिशत गर्भवतियों में खून की मात्रा 11 ग्राम से कम मिली है। 20 प्रतिशत तो ऐसी गर्भवती महिलाएं हैं, जिनमें रक्त की मात्रा आठ ग्राम से भी कम मिलीं। इन हालात में प्री मैच्योर डिलीवरी होने का खतरा बढ़ जाता है।
आरबीएस के तहत स्वास्थ्य विभाग अब तक 37 हजार से अधिक बच्चों की जांच कर चुका है। 15 हजार से अधिक बच्चों विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले हैं। गांवों में कैंप लगाकर अभिभावकों को एनीमिया के खिलाफ जागरूक कर रहा है। जिले के सभी 108 आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी एनीमिया मुक्त जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
कोरोना के कारण पिछले दो साल से अभियान में आई बाधा
2020 व 2021 में स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से एनीमिया के खिलाफ अभियान नहीं चला सका। स्कूल अधिकतर समय बंद रहे। स्कूलों में एलबेंडाजोल की गोलियां खिलाने का अभियान भी रुक गया इसलिए इन दो सालों में एनीमिया के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
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गर्भवतियों में खून की कमी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती गर्भवतियों में खून की कमी है। खून की कमी के कारण ही प्री मैच्योर डिलीवरी भी बढ़ रही है। महिलाओं को एनीमिया के खिलाफ जागरूक करने के लिए हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत हर सीएचसी व पीएचसी में कैंप भी लगाए जाते हैं। बावजूद इसके स्थिति नहीं सुधर रही है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत भी 37,292 बच्चों की हुई जांच
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले चार माह में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 37,292 बच्चों की जांच की है। इनमें से 15,677 बच्चे किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त मिले हैं। अधिकतर बच्चों में चिपका तालू, कटे होंठ, दिल में छेद, खून एवं विटामिन-बी की कमी, दांत सड़ने, हकलाने, बहरेपन, गूंगापन और अंग सुन्न होने की शिकायत मिली। इनको परामर्श के लिए सिविल अस्पताल में भेजा गया है।
बच्चों को बीमारियों से मुक्त करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं : डिप्टी सिविल सर्जन
एनीमिया बड़ी चुनौती है। एनीमिया मुक्त अभियान के तहत बच्चों की जांच भी चल रही है। आने वाले समय में ये कार्यक्रम और तेज किए जाएंगे। आरबीएस के तहत 37 हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई है। - डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन
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आरबीएस के तहत स्वास्थ्य विभाग अब तक 37 हजार से अधिक बच्चों की जांच कर चुका है। 15 हजार से अधिक बच्चों विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मिले हैं। गांवों में कैंप लगाकर अभिभावकों को एनीमिया के खिलाफ जागरूक कर रहा है। जिले के सभी 108 आंगनबाड़ी केंद्रों पर भी एनीमिया मुक्त जागरूकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं।
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कोरोना के कारण पिछले दो साल से अभियान में आई बाधा
2020 व 2021 में स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से एनीमिया के खिलाफ अभियान नहीं चला सका। स्कूल अधिकतर समय बंद रहे। स्कूलों में एलबेंडाजोल की गोलियां खिलाने का अभियान भी रुक गया इसलिए इन दो सालों में एनीमिया के मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है।
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गर्भवतियों में खून की कमी बड़ी चुनौती
स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती गर्भवतियों में खून की कमी है। खून की कमी के कारण ही प्री मैच्योर डिलीवरी भी बढ़ रही है। महिलाओं को एनीमिया के खिलाफ जागरूक करने के लिए हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा अभियान के तहत हर सीएचसी व पीएचसी में कैंप भी लगाए जाते हैं। बावजूद इसके स्थिति नहीं सुधर रही है।
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत भी 37,292 बच्चों की हुई जांच
स्वास्थ्य विभाग ने पिछले चार माह में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत 37,292 बच्चों की जांच की है। इनमें से 15,677 बच्चे किसी न किसी बीमारी से ग्रस्त मिले हैं। अधिकतर बच्चों में चिपका तालू, कटे होंठ, दिल में छेद, खून एवं विटामिन-बी की कमी, दांत सड़ने, हकलाने, बहरेपन, गूंगापन और अंग सुन्न होने की शिकायत मिली। इनको परामर्श के लिए सिविल अस्पताल में भेजा गया है।
बच्चों को बीमारियों से मुक्त करने के लिए विभिन्न कार्यक्रम चल रहे हैं : डिप्टी सिविल सर्जन
एनीमिया बड़ी चुनौती है। एनीमिया मुक्त अभियान के तहत बच्चों की जांच भी चल रही है। आने वाले समय में ये कार्यक्रम और तेज किए जाएंगे। आरबीएस के तहत 37 हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई है। - डॉ. ललित वर्मा, डिप्टी सिविल सर्जन