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Panipat News: पेयजल सप्लाई का टेंडर रद्द, अब दोबारा लगेगा
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पानीपत। शहरवासियों को जल्द से जल्द पेयजल उपलब्ध कराने की निगम की योजना विभागीय अधिकारियों की उदासीनता से अधर में लटक गई है। इंजीनियरिंग ब्रांच के अधिकारियों ने वैकल्पिक अवकाश के दिन कार्यालय आकर पेयजल सप्लाई के 20 करोड़ के दोनों टेंडर रद्द कर दिए। इसमें सात करोड़ के टेंडर का एल-1 रेट 5.71 करोड़ रुपये भी खुल गया। बावजूद इसे निरस्त कर दिया गया। अधिकारियों ने अब इन दोनों टेंडर को दोबारा मर्ज कर प्रशासकीय अनुमति के अनुरूप एक टेंडर लगाने का फैसला लिया।
शहर की पेयजल सप्लाई के लिए निगम अधिकतम 30 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च करता आ रहा है। यह पैसा जनस्वास्थ्य विभाग के 300 ट्यूबवेलों की रिपेयरिंग और मेंटेनेंस पर खर्च होता है। ये टेंडर कई माह पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन अधिकारी इसे मासिक भुगतान के रेटों पर लगातार चलाते आ रहे हैं। अब जनस्वास्थ्य विभाग नगर निगम में मर्ज हो चुका है। विभाग के 300 और निगम के 300 ट्यूबवेल मिलाकर 600 ट्यूबवेल के लिए निगम ने 20 करोड़ के दो टेंडर लगाए। ये टेंडर 18 माह के लिए थे। यानी एक माह पर औसतन 1.11 करोड़ बनता है। यह अनुमानित पहले के हिसाब से करीब 60 लाख रुपये होना चाहिए।
निगम ने शहरी स्थानीय निकाय से पेजयल सप्लाई का टेंडर 20 करोड़ का लगाने की प्रशासकीय अनुमति मांगी। अनुमति एक टेंडर की मिली, लेकिन अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए इसे दो भागों में बांट दिया। चार महीने तक इस मामले को लंबित रखा। न टेंडर को रद्द किया और न आवंटित किया। मामले का भंडा फूटा तो अधिकारियों ने गलती मानी तो इसे रद्द करने की घोषणा की। तब तक टेंडर की तकनीकी और फाइनेंशियल बिड खोली जा चुकी थी। जिसमें एल-1 तक के रेट सामने आ गए थे।
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रिकॉर्ड लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी : भट्ट
दोनों टेंडर रद्द कर दिए हैं। शुक्रवार को वैकल्पिक अवकाश था। इसलिए अधिकारियों से रिकॉर्ड नहीं मिला। सोमवार को रिकॉर्ड लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर।
वर्जन:
मंत्री के सामने भी रखा जाएगा मुद्दा : शर्मा
अवकाश के चलते बैठक नहीं हो सकी। सोमवार को बैठक बुलाई जाएगी। निकाय मंत्री के सामने भी मुद्दा रखा जाएगा।
अंजलि शर्मा, पार्षद एवं प्रधान वॉटर एंड डिस्पोजल एडहॉक कमेटी।
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शहर की पेयजल सप्लाई के लिए निगम अधिकतम 30 लाख रुपये प्रतिमाह खर्च करता आ रहा है। यह पैसा जनस्वास्थ्य विभाग के 300 ट्यूबवेलों की रिपेयरिंग और मेंटेनेंस पर खर्च होता है। ये टेंडर कई माह पहले समाप्त हो चुका है, लेकिन अधिकारी इसे मासिक भुगतान के रेटों पर लगातार चलाते आ रहे हैं। अब जनस्वास्थ्य विभाग नगर निगम में मर्ज हो चुका है। विभाग के 300 और निगम के 300 ट्यूबवेल मिलाकर 600 ट्यूबवेल के लिए निगम ने 20 करोड़ के दो टेंडर लगाए। ये टेंडर 18 माह के लिए थे। यानी एक माह पर औसतन 1.11 करोड़ बनता है। यह अनुमानित पहले के हिसाब से करीब 60 लाख रुपये होना चाहिए।
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निगम ने शहरी स्थानीय निकाय से पेजयल सप्लाई का टेंडर 20 करोड़ का लगाने की प्रशासकीय अनुमति मांगी। अनुमति एक टेंडर की मिली, लेकिन अधिकारियों ने अपने चहेते ठेकेदारों को टेंडर देने के लिए इसे दो भागों में बांट दिया। चार महीने तक इस मामले को लंबित रखा। न टेंडर को रद्द किया और न आवंटित किया। मामले का भंडा फूटा तो अधिकारियों ने गलती मानी तो इसे रद्द करने की घोषणा की। तब तक टेंडर की तकनीकी और फाइनेंशियल बिड खोली जा चुकी थी। जिसमें एल-1 तक के रेट सामने आ गए थे।
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रिकॉर्ड लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी : भट्ट
दोनों टेंडर रद्द कर दिए हैं। शुक्रवार को वैकल्पिक अवकाश था। इसलिए अधिकारियों से रिकॉर्ड नहीं मिला। सोमवार को रिकॉर्ड लेकर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
दुष्यंत भट्ट, सीनियर डिप्टी मेयर।
वर्जन:
मंत्री के सामने भी रखा जाएगा मुद्दा : शर्मा
अवकाश के चलते बैठक नहीं हो सकी। सोमवार को बैठक बुलाई जाएगी। निकाय मंत्री के सामने भी मुद्दा रखा जाएगा।
अंजलि शर्मा, पार्षद एवं प्रधान वॉटर एंड डिस्पोजल एडहॉक कमेटी।