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Panipat News: शिक्षकों ने समझा आंतरिक और बाह्य फल का अंतर
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ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक
पानीपत। जीटी रोड स्थित राजकीय मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में चल रहे हरियाणा कर्मयोगी प्रशिक्षण के तहत कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। इस प्रशिक्षण के दौरान समूह चर्चा के माध्यम से जागृत कर्तव्य का पाठ पढ़ाया।
इसके साथ ही शिविर में कर्म के बाह्य फल और आंतरिक फल के बारे में चर्चा की। इस दौरान हरियाणा के कर्मयोगियों के लिए बाह्यफल और आंतरिक फल को कई गतिविधियों के माध्यम से परिपूर्णता वृक्ष के माध्यम से समझाया गया।
जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप दहिया और डाइट प्राचार्या बिजेंद्र नरवाल के नेतृत्व में कर्मयोगी ट्रेनिंग के बैच नंबर 26 की मास्टर ट्रेनर रेखा दूहन और ममता दहिया ने शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। एक दिवसीय प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर ने कर्तव्य निर्वहन के माध्यम से कमजोर कर्तव्य और जागृत कर्तव्य के अंतर को समझाया।
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एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के तीसरे चरण में मास्टर ट्रेनर ने जीवन के विभिन्न चरणों के श्रेयस और प्रेयस भाव को उदाहरणों के द्वारा बताया कि एक कर्मचारी किस तरह से श्रेयस भाव तक जा सकता है जिसमें सबकी भलाई का भाव प्रभावी होता है। प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी प्राचार्य सुरजीत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान सभी कर्मचारियों में सकारात्मक भाव से कर्म और कर्तव्य को पूरी निष्ठा से करने का भाव जागृत किया गया। एक हरियाणा कर्मयोगी वही है, जो सदैव दूसरों की भलाई, आंतरिक फल और जागृत कर्तव्य को अपनाता है।
इस अवसर पर स्टेट अवार्डी ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक, मुख्य शिक्षक जयदीप, दीपिका धवन, उमेद सिंह, मनीषा, ज्योति, प्रमिला, सुनील कादियान, सीमा मलिक मौजूद रहे।
कर्मयोगी प्रशिक्षण में शिक्षकों ने साझा किए विचार-
वास्तव में हमें कर्मयोगी बनना चाहिए : प्रदीप
एक दिवसीय कर्मयोगी प्रशिक्षण में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली से पहुंचे ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित कर्मयोगी प्रशिक्षण के माध्यम से वास्तव में कर्म व कर्त्तव्य को अपनाने की सीख मिली। मलिक ने बताया कि एक अच्छे और विकसित राष्ट्र का निर्माण करने के लिए हर कर्मचारी और नागरिक को कर्मयोगी बनना होगा।
श्रेयस पथ और आंतरिक फल के लिए कर्म करेंं : सीमा
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तहसील कैंप से आई प्राध्यापिका सीमा ने बताया कि अपने कर्त्तव्य को पूरा करते हुए हमें सबके भले के लिए कार्य करते हुए आंतरिक फल को पाना चाहिए। ताकि हम एक समृद्ध समाज का निर्माण कर सके।
जागृत कर्तव्य के रास्ते को अपनाएं : जयदीप
राजकीय प्राथमिक पाठशाला नांगल खेड़ी के मुख्य शिक्षक जयदीप सिंह ने बताया कि अपने कर्मयोगी भाव को ग्रहण करते हुए जागृत कर्तव्य को अपनाना चाहिए। हर कर्मचारी को सर्वहित के लिए पूरी निष्ठा के कार्य करना चाहिए।
कर्मयोगी भाव को अपने कर्म में अपनाएं : ज्योति
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कृष्णपुरा की प्राध्यापिका ज्योति ने बताया कि हमें अपने कर्म में कर्मयोगी भाव को अपनाना चाहिए। अपनी काबिलियत के माध्यम से पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्य को पूरा करना चाहिए। अगर हम सब कर्म को महत्व देते हैं तो सफल जीवन महसूस होता है।
कर्म के पथ पर अग्रसर करता है भाव : रेखा दूहन
मास्टर ट्रेनर रेखा दूहन ने बताया कि कर्मयोगी मिशन के तहत जो मॉड्यूल तैयार किया गया है, वो हर कर्मचारी को कर्म के पथ पर अग्रसर करता है। प्रशिक्षण के माध्यम से जो भाव और कर्त्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाया गया है, उसे व्यवहार में अपनाना होगा। तभी हम सच्चे कर्मयोगी बन पाएंगे।
हर इंसान को कर्त्तव्य पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए : ममता
कर्मयोगी ट्रेनिंग के दौरान मास्टर ट्रेनर ममता दहिया ने बताया कि जो इंसान कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाता है, वह सही मायने में कर्मयोगी बनता है। अपने कर्तव्य को इस प्रकार करना चाहिए जो सर्व कल्याण के पक्ष में हो। अपने स्वार्थ को छोड़कर हमें राष्ट्र निर्माण में अपने कर्म से सहयोग करना चाहिए।
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इसके साथ ही शिविर में कर्म के बाह्य फल और आंतरिक फल के बारे में चर्चा की। इस दौरान हरियाणा के कर्मयोगियों के लिए बाह्यफल और आंतरिक फल को कई गतिविधियों के माध्यम से परिपूर्णता वृक्ष के माध्यम से समझाया गया।
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जिला शिक्षा अधिकारी कुलदीप दहिया और डाइट प्राचार्या बिजेंद्र नरवाल के नेतृत्व में कर्मयोगी ट्रेनिंग के बैच नंबर 26 की मास्टर ट्रेनर रेखा दूहन और ममता दहिया ने शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया। एक दिवसीय प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर ने कर्तव्य निर्वहन के माध्यम से कमजोर कर्तव्य और जागृत कर्तव्य के अंतर को समझाया।
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एक दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के तीसरे चरण में मास्टर ट्रेनर ने जीवन के विभिन्न चरणों के श्रेयस और प्रेयस भाव को उदाहरणों के द्वारा बताया कि एक कर्मचारी किस तरह से श्रेयस भाव तक जा सकता है जिसमें सबकी भलाई का भाव प्रभावी होता है। प्रशिक्षण के नोडल अधिकारी प्राचार्य सुरजीत सिंह ने बताया कि ट्रेनिंग के दौरान सभी कर्मचारियों में सकारात्मक भाव से कर्म और कर्तव्य को पूरी निष्ठा से करने का भाव जागृत किया गया। एक हरियाणा कर्मयोगी वही है, जो सदैव दूसरों की भलाई, आंतरिक फल और जागृत कर्तव्य को अपनाता है।
इस अवसर पर स्टेट अवार्डी ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक, मुख्य शिक्षक जयदीप, दीपिका धवन, उमेद सिंह, मनीषा, ज्योति, प्रमिला, सुनील कादियान, सीमा मलिक मौजूद रहे।
कर्मयोगी प्रशिक्षण में शिक्षकों ने साझा किए विचार-
वास्तव में हमें कर्मयोगी बनना चाहिए : प्रदीप
एक दिवसीय कर्मयोगी प्रशिक्षण में राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय बड़ौली से पहुंचे ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक ने बताया कि हरियाणा सरकार द्वारा आयोजित कर्मयोगी प्रशिक्षण के माध्यम से वास्तव में कर्म व कर्त्तव्य को अपनाने की सीख मिली। मलिक ने बताया कि एक अच्छे और विकसित राष्ट्र का निर्माण करने के लिए हर कर्मचारी और नागरिक को कर्मयोगी बनना होगा।
श्रेयस पथ और आंतरिक फल के लिए कर्म करेंं : सीमा
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय तहसील कैंप से आई प्राध्यापिका सीमा ने बताया कि अपने कर्त्तव्य को पूरा करते हुए हमें सबके भले के लिए कार्य करते हुए आंतरिक फल को पाना चाहिए। ताकि हम एक समृद्ध समाज का निर्माण कर सके।
जागृत कर्तव्य के रास्ते को अपनाएं : जयदीप
राजकीय प्राथमिक पाठशाला नांगल खेड़ी के मुख्य शिक्षक जयदीप सिंह ने बताया कि अपने कर्मयोगी भाव को ग्रहण करते हुए जागृत कर्तव्य को अपनाना चाहिए। हर कर्मचारी को सर्वहित के लिए पूरी निष्ठा के कार्य करना चाहिए।
कर्मयोगी भाव को अपने कर्म में अपनाएं : ज्योति
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय कृष्णपुरा की प्राध्यापिका ज्योति ने बताया कि हमें अपने कर्म में कर्मयोगी भाव को अपनाना चाहिए। अपनी काबिलियत के माध्यम से पूरी ईमानदारी से अपने कर्तव्य को पूरा करना चाहिए। अगर हम सब कर्म को महत्व देते हैं तो सफल जीवन महसूस होता है।
कर्म के पथ पर अग्रसर करता है भाव : रेखा दूहन
मास्टर ट्रेनर रेखा दूहन ने बताया कि कर्मयोगी मिशन के तहत जो मॉड्यूल तैयार किया गया है, वो हर कर्मचारी को कर्म के पथ पर अग्रसर करता है। प्रशिक्षण के माध्यम से जो भाव और कर्त्तव्यनिष्ठा का पाठ पढ़ाया गया है, उसे व्यवहार में अपनाना होगा। तभी हम सच्चे कर्मयोगी बन पाएंगे।
हर इंसान को कर्त्तव्य पूरी निष्ठा से निभाना चाहिए : ममता
कर्मयोगी ट्रेनिंग के दौरान मास्टर ट्रेनर ममता दहिया ने बताया कि जो इंसान कर्तव्य को पूरी निष्ठा से निभाता है, वह सही मायने में कर्मयोगी बनता है। अपने कर्तव्य को इस प्रकार करना चाहिए जो सर्व कल्याण के पक्ष में हो। अपने स्वार्थ को छोड़कर हमें राष्ट्र निर्माण में अपने कर्म से सहयोग करना चाहिए।

ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक

ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक

ललित कला प्राध्यापक प्रदीप मलिक

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