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Panipat News: प्रदूषण मापक यंत्र न लगाने पर सख्ती, निशाने पर पानीपत की 20 समेत दिल्ली एनसीआर की 204 फैक्टरी
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पानीपत। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषण ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीएममएस) और पीटीजेड कैमरा न लगाने पर मेटल और टेक्सटाइल फैक्टरी पर कार्रवाई तेज कर दी है। सीपीसीबी ने पानीपत की 20 समेत दिल्ली एनसीआर की 204 फैक्टरी कार्रवाई के दायरे में शामिल किया है। बोर्ड इनको पहले क्लोजर नोटिस जारी कर चुका है। बोर्ड की टीम की जांच में पांच फैक्टरी ओसीएमएस और कैमरे नहीं मिले हैं। सीपीसीबी को निरीक्षण की रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। ऐसे में उद्यमियों की परेशानी बढ़ गई है।
पानीपत समेत आसपास के क्षेत्र का पर्यावरण प्रदूषण लगातार बिगड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-25, 29, कुराड़, पुराना औद्योगिक क्षेत्र व समालखा के फाउंड्री क्षेत्र में सबसे अधिक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पानीपत की 22 समेत दिल्ली एनसीआर की 204 फैक्टरी चिह्नित की थी। इनको क्लोजर नोटिस जारी किए थे। बोर्ड के क्लोजर नोटिस के बाद कई उद्यमियों ने अपनी फैक्टरी बंद कर ली थी तो कई ने ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीएममएस) और पीटीजेड कैमरा लगा लिया था। वे इसके बाद भी प्रदूषण की रिपोर्ट नियमित रूप से नहीं दे रहे थे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दूसरे विभागों के अधिकारियों की देखरेख में टीम ने धरातल पर मौका देखा। जिले की 22 में से पांच फैक्टरी पर ओसीएमएस व कैमरे नहीं मिले थे। टीम इनको सील कर दिया। निरीक्षण में 12 नियमों पर खरी मिली। दो यूनिट को बंद कर दिया गया था और दो पर ताले लगे मिले। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक फैक्टरी को पहले सील कर चुकी है। सीपीसीबी की टीम अब इन पर जुर्माना लगाने के साथ अन्य कार्रवाई अमल में लाएगी।
टीमों ने यहां पर की कार्रवाई
एचएसपीसीबी के आरओ भूपेंद्र सिंह की टीम ने सेक्टर-29-टू में कृष्णा प्रोससर, जगदीश ओवरसीज, माई डायर्स, और सुपर वूलन की जांच की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नगर निगम के एक्सईएन सुमित नांदल रहे। एचएसपीसीबी के एईई कुलदीप सिंह की देखरेख में टीम रही। टीम ने बरसत रोड के श्री राम कास्टिक, कच्चा काबड़ी फाटक कट्नजदीक अशोका आयरन, पुराना औद्योगिक क्षेत्र की डीआरसी वूलन मिल, श्रीबालाजी स्पीनर्स, कैंपीटल वूलन व जेएम टेक्सटाइल की जांच की। बोर्ड के एईई हरेंदर गोयल की अगुवाई में टीम ने समालखा की दुर्गा इंजीनियरिंग, मित्तल फाउंड्री, श्री स्टील, हरियाणा आयरन और जमुना आयरन फाउंड्री की जांच की। एईई दिव्यांश कृष्ण की देखरेख में टीम ने सेक्टर-29-1 में निशुन इंडस्ट्री, अंबिका वेलवेट्स, अवार्ड्स वेलवेट की जांच की। जेईई वीरेंद्र सिंह की टीम ने सेक्टर-29 टू में भारत डाई हाउस, शिव ज्योति प्रोसेस, श्री श्याम प्रोसेसर्स और राधे-राधे इंटरप्राइजेज की जांच की।
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वर्जन
पश्चिमी एशिया के देशों में तनाव के चलते पहले से ही कलर और दूसरे रॉ मैटीरियल महंगे होने से उद्योग चलाने मुश्किल हो गए हैं। इसके बीच प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की शर्त लगाई जा रही है। वे इनकी पालना भी कर रहे हैं। इसके बीच लगातार जांच करने से उद्यमी फैक्टरी बंद करने को मजबूर हैं। वे उचित मंच पर आवाज उठाएंगे।
नितिन अरोड़ा, प्रधान, पानीपत डायर्स एसोसिएशन।
वर्जन :
सीपीसीबी की गाइडलाइन के अनुसार फैक्टरी की जांच की है। इनकी रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
कुलदीप सिंह, एईई, एचएसपीसीबी।
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पानीपत समेत आसपास के क्षेत्र का पर्यावरण प्रदूषण लगातार बिगड़ रहा है। औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-25, 29, कुराड़, पुराना औद्योगिक क्षेत्र व समालखा के फाउंड्री क्षेत्र में सबसे अधिक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पानीपत की 22 समेत दिल्ली एनसीआर की 204 फैक्टरी चिह्नित की थी। इनको क्लोजर नोटिस जारी किए थे। बोर्ड के क्लोजर नोटिस के बाद कई उद्यमियों ने अपनी फैक्टरी बंद कर ली थी तो कई ने ऑनलाइन कंटीन्यूअस एमिशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओसीएममएस) और पीटीजेड कैमरा लगा लिया था। वे इसके बाद भी प्रदूषण की रिपोर्ट नियमित रूप से नहीं दे रहे थे। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और दूसरे विभागों के अधिकारियों की देखरेख में टीम ने धरातल पर मौका देखा। जिले की 22 में से पांच फैक्टरी पर ओसीएमएस व कैमरे नहीं मिले थे। टीम इनको सील कर दिया। निरीक्षण में 12 नियमों पर खरी मिली। दो यूनिट को बंद कर दिया गया था और दो पर ताले लगे मिले। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एक फैक्टरी को पहले सील कर चुकी है। सीपीसीबी की टीम अब इन पर जुर्माना लगाने के साथ अन्य कार्रवाई अमल में लाएगी।
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टीमों ने यहां पर की कार्रवाई
एचएसपीसीबी के आरओ भूपेंद्र सिंह की टीम ने सेक्टर-29-टू में कृष्णा प्रोससर, जगदीश ओवरसीज, माई डायर्स, और सुपर वूलन की जांच की। ड्यूटी मजिस्ट्रेट नगर निगम के एक्सईएन सुमित नांदल रहे। एचएसपीसीबी के एईई कुलदीप सिंह की देखरेख में टीम रही। टीम ने बरसत रोड के श्री राम कास्टिक, कच्चा काबड़ी फाटक कट्नजदीक अशोका आयरन, पुराना औद्योगिक क्षेत्र की डीआरसी वूलन मिल, श्रीबालाजी स्पीनर्स, कैंपीटल वूलन व जेएम टेक्सटाइल की जांच की। बोर्ड के एईई हरेंदर गोयल की अगुवाई में टीम ने समालखा की दुर्गा इंजीनियरिंग, मित्तल फाउंड्री, श्री स्टील, हरियाणा आयरन और जमुना आयरन फाउंड्री की जांच की। एईई दिव्यांश कृष्ण की देखरेख में टीम ने सेक्टर-29-1 में निशुन इंडस्ट्री, अंबिका वेलवेट्स, अवार्ड्स वेलवेट की जांच की। जेईई वीरेंद्र सिंह की टीम ने सेक्टर-29 टू में भारत डाई हाउस, शिव ज्योति प्रोसेस, श्री श्याम प्रोसेसर्स और राधे-राधे इंटरप्राइजेज की जांच की।
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पश्चिमी एशिया के देशों में तनाव के चलते पहले से ही कलर और दूसरे रॉ मैटीरियल महंगे होने से उद्योग चलाने मुश्किल हो गए हैं। इसके बीच प्रदूषण मापक यंत्र लगाने की शर्त लगाई जा रही है। वे इनकी पालना भी कर रहे हैं। इसके बीच लगातार जांच करने से उद्यमी फैक्टरी बंद करने को मजबूर हैं। वे उचित मंच पर आवाज उठाएंगे।
नितिन अरोड़ा, प्रधान, पानीपत डायर्स एसोसिएशन।
वर्जन :
सीपीसीबी की गाइडलाइन के अनुसार फैक्टरी की जांच की है। इनकी रिपोर्ट बनाकर भेज दी है। उच्चाधिकारियों के निर्देश पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
कुलदीप सिंह, एईई, एचएसपीसीबी।