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आवारा कुत्ते के काटने से बच्चे की मौत
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बस स्टेंड नजदीक सुखदेव नगर में पांच वर्षीय मासूम की आवारा कुत्ते के काटने से शुक्रवार सुबह सात बजे मौत हो गई। परिजनों ने बताया कि 18 जनवरी को गली में घुम रहे आवारा कुत्ते ने उनके बच्चे को मुंह पर काटकर घायल कर दिया था, बच्चे को प्राथमिक उपचार के दौरान 13 टांके आए थे, लेकिन वीरवार देर शाम उसकी हालत बिगड़ी और शुक्रवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। कॉलोनी निवासियों ने नगर निगम पर आरोप लगाया कि वह करोड़ों रुपये टेक्स देते है, सैंकड़ों बार नगर निगम के अधिकारियों को शिकायत दे चुके है। विधायक और मौजूदा वार्ड पार्षद को मौकेे पर बुला चुके है, लेकिन किसी ने कोई समाधान नहीं किया, जिसके नतीजा उन्हें अपना बच्चा गवाना पड़ा।
सुखेदव नगर निवासी आशीष गोयल ने बताया कि उसके दो बच्चे है, जिनमें एक देव (5) और दूसरा प्रणव (3) है। देव एलकेजी कक्षा में पढ़ता था। उनकी छाजपुर के पास हैंडलूम की फैक्ट्री है। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी को बड़ा बेटा देव रात करीब आठ बजे खाना खाकर घर के बाहर खेलने के लिए निकला था, उसी समय घर के बाहर खड़े कुत्ते ने उसे काटकर घायल कर दिया। वहीं पड़ोसी महिला ने मासूम को आवारा कुत्तों के कब्जे से छुडवाया और लाठी मारकर कॉलोनी से भगाया। पड़ौसी महिला ने बच्चे की मां सुजाता को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वह और उनकी पत्नी सुजाता बाहर आए, उस समय बच्चा बाहर बेहोशी हालत में पड़ा हुआ था। वह पास के ही एक निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे सिर में 13 टांके लगाए। वहीं उसके बाद बच्चें को डॉक्टर ने पांच टिक्के लगाने के लिए कहा, वह रेबीज के सभी कोर्स को पूरा कर रहे थे, लेकिन वीरवार देर शाम देव की हालत बिगड़ गई। जिसके बाद उसे वह बच्चे को उसी निजी अस्पताल लेकर गए, जहां से कोर्स चल रहा था, लेकिन वहां से डॉक्टर ने दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। पूरी रात अलग अलग अस्पताल में लेकर घुमने के बाद बच्चे को सही इलाज न मिलने के कारण उसकी शुक्रवार सुबह सात बजे मौत हो गई। परिजनों ने नगर निगम व प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
इसके अलावा 18 जनवरी के दिन ही पांच बच्चों को कुत्तों ने काटकर किया था घायल-
परिजनों ने बताया कि 18 जनवरी के दिन ही आवारा कुत्तों ने पांच ओर बच्चों को काटकर घायल किया था, जिनको उनके माता पिता अस्पताल लेजाकर इलाज करवाकर ले गए थे। उन्होंने बताया कि जिनमें तीन बच्चें कॉलोनी के और दो स्कूटी सवार थे। कुत्तों के आंतक से कॉलोनी में आने जाने वाले लोगों को भय महसूस होने लगा था। पूरे दिन पांच बच्चों को काटने के बाद देर शाम उन्होंने देव के मुंह पर काट लिया और उसे भी गंभीर घायल कर दिया।
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
बच्चे की मां रोते हुए बोली कि उसे नहीं पता था कि यही आवारा कुत्ते उसके बच्चे की जान ले लेंगे। अगर उसे यह पहले ही पता होता तो वह अपने बच्चे को घर से बाहर ही नहीं निकलने देती। मां ने बताया कि पूरी कॉलोनी पहले से ही अनुभव हो रहा था कि यहीं कुत्ते एक दिन बड़ी घटना को अंजाम देंगे, जिसके चलते उन्होंने नगर निगम को शिकायत भी दी थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
परिजनों को सही कोर्स के बारे में नहीं किया सूचित
परिजनों ने डॉक्टर पर भी आरोप लगाया कि उनके बच्चे को रेबीज के कोर्स के बारे में सही सूचित नहीं किया गया। जैसे जैसे डॉक्टर ने कहा, वैसे वैसे वह चलते गए। वहीं जब हालत बिगड़ी तो डॉक्टर ने तुरंत प्रभाव से बच्चे का इलाज करने से मना कर दिया और उसे दिल्ली अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां पर उन्हें बताया गया कि बच्चे का सही कोर्स नहीं चलाया गया है।
समय पर लगवाएं इंजेक्शन- डॉ. कुमार
कुत्ते के काटने को हलके में नहीं लेना चाहिए। कुत्ते के काटते ही सबसे पहले घाव को पानी व साबून से अच्छी तरह धोएं और साबून को नष्ट कर दें। इसके बाद अस्पताल जाकर रेबिज का इंजेक्शन लगवाएं। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार समय समय पर इंजेक्शन लगवाते रहे। अगर जख्म से खून व मोआद आ रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
डॉ. अमित कुमार, इंचार्ज सेक्टर 29 सीएचसी पानीपत।
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सुखेदव नगर निवासी आशीष गोयल ने बताया कि उसके दो बच्चे है, जिनमें एक देव (5) और दूसरा प्रणव (3) है। देव एलकेजी कक्षा में पढ़ता था। उनकी छाजपुर के पास हैंडलूम की फैक्ट्री है। उन्होंने बताया कि 18 जनवरी को बड़ा बेटा देव रात करीब आठ बजे खाना खाकर घर के बाहर खेलने के लिए निकला था, उसी समय घर के बाहर खड़े कुत्ते ने उसे काटकर घायल कर दिया। वहीं पड़ोसी महिला ने मासूम को आवारा कुत्तों के कब्जे से छुडवाया और लाठी मारकर कॉलोनी से भगाया। पड़ौसी महिला ने बच्चे की मां सुजाता को घटना की सूचना दी। सूचना मिलते ही वह और उनकी पत्नी सुजाता बाहर आए, उस समय बच्चा बाहर बेहोशी हालत में पड़ा हुआ था। वह पास के ही एक निजी अस्पताल में लेकर गए, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसे सिर में 13 टांके लगाए। वहीं उसके बाद बच्चें को डॉक्टर ने पांच टिक्के लगाने के लिए कहा, वह रेबीज के सभी कोर्स को पूरा कर रहे थे, लेकिन वीरवार देर शाम देव की हालत बिगड़ गई। जिसके बाद उसे वह बच्चे को उसी निजी अस्पताल लेकर गए, जहां से कोर्स चल रहा था, लेकिन वहां से डॉक्टर ने दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। पूरी रात अलग अलग अस्पताल में लेकर घुमने के बाद बच्चे को सही इलाज न मिलने के कारण उसकी शुक्रवार सुबह सात बजे मौत हो गई। परिजनों ने नगर निगम व प्रशासन पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है।
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इसके अलावा 18 जनवरी के दिन ही पांच बच्चों को कुत्तों ने काटकर किया था घायल-
परिजनों ने बताया कि 18 जनवरी के दिन ही आवारा कुत्तों ने पांच ओर बच्चों को काटकर घायल किया था, जिनको उनके माता पिता अस्पताल लेजाकर इलाज करवाकर ले गए थे। उन्होंने बताया कि जिनमें तीन बच्चें कॉलोनी के और दो स्कूटी सवार थे। कुत्तों के आंतक से कॉलोनी में आने जाने वाले लोगों को भय महसूस होने लगा था। पूरे दिन पांच बच्चों को काटने के बाद देर शाम उन्होंने देव के मुंह पर काट लिया और उसे भी गंभीर घायल कर दिया।
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शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
बच्चे की मां रोते हुए बोली कि उसे नहीं पता था कि यही आवारा कुत्ते उसके बच्चे की जान ले लेंगे। अगर उसे यह पहले ही पता होता तो वह अपने बच्चे को घर से बाहर ही नहीं निकलने देती। मां ने बताया कि पूरी कॉलोनी पहले से ही अनुभव हो रहा था कि यहीं कुत्ते एक दिन बड़ी घटना को अंजाम देंगे, जिसके चलते उन्होंने नगर निगम को शिकायत भी दी थी, लेकिन किसी ने नहीं सुनी।
परिजनों को सही कोर्स के बारे में नहीं किया सूचित
परिजनों ने डॉक्टर पर भी आरोप लगाया कि उनके बच्चे को रेबीज के कोर्स के बारे में सही सूचित नहीं किया गया। जैसे जैसे डॉक्टर ने कहा, वैसे वैसे वह चलते गए। वहीं जब हालत बिगड़ी तो डॉक्टर ने तुरंत प्रभाव से बच्चे का इलाज करने से मना कर दिया और उसे दिल्ली अपोलो अस्पताल में रेफर कर दिया। वहां पर उन्हें बताया गया कि बच्चे का सही कोर्स नहीं चलाया गया है।
समय पर लगवाएं इंजेक्शन- डॉ. कुमार
कुत्ते के काटने को हलके में नहीं लेना चाहिए। कुत्ते के काटते ही सबसे पहले घाव को पानी व साबून से अच्छी तरह धोएं और साबून को नष्ट कर दें। इसके बाद अस्पताल जाकर रेबिज का इंजेक्शन लगवाएं। डॉक्टर के परामर्श के अनुसार समय समय पर इंजेक्शन लगवाते रहे। अगर जख्म से खून व मोआद आ रही है तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
डॉ. अमित कुमार, इंचार्ज सेक्टर 29 सीएचसी पानीपत।