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Panipat News: श्रीराम के अग्नि बाण ने किया रावण के कुनबे का अंत
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पानीपत। विजयदशमी पर्व पर मंगलवार को बुराई के प्रतीक लंकापति दशानन का पुतला दहन किया गया। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के धनुष से निकला अग्नि बाण जैसे ही अधर्म के प्रतीक रावण की नाभि पर लगा, रावण का पुतला धूं-धूं कर जलने लगा। अहंकार रूपी रावण का पुतला जलते ही मैदान में जयकारे गूंज उठे। रामलीला मंचन देख रहे लोगों ने एक-दूसरे को विजय पर्व की बधाई दी। श्रीकृष्णा क्लब, दशहरा कमेटी सनौली रोड, श्रीराम दशहरा कमेटी बरसत रोड और देवी मंदिर सहित जिले के अनेक स्थानों पर शाम 5:41 बजे रावण, मेघनाद व कुंभकर्ण के पुतले दहन किए गए। श्री कृष्णा क्लब ने इस बार 101 फीट व अन्य कमेटियों ने रावण का पुतला 70, मेघनाद व कुंभकर्ण का पुतला 65 फीट ऊंचा बनाया था। 1200 हनुमान स्वरूप और श्रीराम की झांकियां दशहरा स्थल पर पहुंचीं। भगवान राम का विजय तिलक हुआ। अतिथियों के द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण, माता सीता व हनुमानजी की आरती उतारी गई।
बरसत रोड श्रीराम दशहरा कमेटी ने सेक्टर 13-17 दशहरा स्थल पर सोने की लंका बनाई थी। रावण दहन से पहले हनुमान ने अपनी पूंछ में आग लगाकर सोने की लंका में आ लगा दी। पांच मिनट में सोने की लंका राख हो गई। इसके बाद रावण पर श्रीराम ने तीर चलाकर बुराई का अंत कर दिया।
सेक्टर 13-17 में विधायक महिपाल ढांडा ने गुब्बारे हवा में छोड़कर दशहरा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ऋषिकेश से पधारे महंत लोकेश दास महाराज, सांसद कृष्ण लाल पंवार, सांसद संजय भाटिया, पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी व सुरेंद्र रेवड़ी, डाॅ. दिनेश, डाॅ. सुमन वशिष्ठ, जितेंद्र अहलावत, विजय जैन, राजेश त्रिखा, चंद्र शेखर शर्मा, प्रवीन मुंजाल, सतीष ढींगड़ा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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रावण दहन के साथ ही दैवीय शक्ति के पूजकों ने जयघोष लगाने शुरू कर दिए। पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। यह दृश्य सभी दशहरा ग्राउंड में देखने को मिला। शहर सहित ग्रामीण अंचल में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व विजयदशमी उत्साह से मनाया गया। जगह-जगह अहंकारी दशानन के पुतले का पारंपरिक रूप से दहन किया गया। जैसे ही राम-लक्ष्मण व हनुमान दशहरा स्थल पहुंचे, माहौल भक्तिमय हो गया। रावण के पुतले पर तीर मारकर आग लगाई और रावण धू-धूकर जलने लगा। दहन के बाद अधिकांश घरों में विशेष भोज का आनंद लिया गया। कई श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।
देवी मंदिर में 20 हजार से अधिक लोगों की भीड़ रही। यहां पर 5:41 बजे रावण का दहन हुआ। रावण दहन के वक्त पुतले से पहले अनार जले। उसके बाद मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ रावण धू-धू कर जला, जिसके बाद पूरा पंडाल जय श्री राम के नारे से गूंज उठा। लोगों ने कहा कि एक बार फिर असत्य पर सत्य की जीत हुई।
सेक्टर 24 में श्री कृष्णा क्लब की तरफ से दूसरी बार रावण दहन का आयोजन किया गया। रावण दहन देखने के लिए लोग घरों की छतों पर चढ़ गए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर रामभक्त हनुमान सेवकों के साथ नृत्य करते दिखाई दिए। जय श्री राम के जयकारों से मैदान गूंज उठा।
आचार्य लालमणि पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है। शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज में रक्त में वीरता प्रकट हो, इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरे का पर्व भाईचारे का प्रतीक है। इसलिए समाज के हर समुदाय को भाईचारे की भावना से रहना चाहिए।
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बरसत रोड श्रीराम दशहरा कमेटी ने सेक्टर 13-17 दशहरा स्थल पर सोने की लंका बनाई थी। रावण दहन से पहले हनुमान ने अपनी पूंछ में आग लगाकर सोने की लंका में आ लगा दी। पांच मिनट में सोने की लंका राख हो गई। इसके बाद रावण पर श्रीराम ने तीर चलाकर बुराई का अंत कर दिया।
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सेक्टर 13-17 में विधायक महिपाल ढांडा ने गुब्बारे हवा में छोड़कर दशहरा कार्यक्रम का शुभारंभ किया। ऋषिकेश से पधारे महंत लोकेश दास महाराज, सांसद कृष्ण लाल पंवार, सांसद संजय भाटिया, पूर्व विधायक रोहिता रेवड़ी व सुरेंद्र रेवड़ी, डाॅ. दिनेश, डाॅ. सुमन वशिष्ठ, जितेंद्र अहलावत, विजय जैन, राजेश त्रिखा, चंद्र शेखर शर्मा, प्रवीन मुंजाल, सतीष ढींगड़ा को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
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रावण दहन के साथ ही दैवीय शक्ति के पूजकों ने जयघोष लगाने शुरू कर दिए। पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयकारे से गूंज उठा। यह दृश्य सभी दशहरा ग्राउंड में देखने को मिला। शहर सहित ग्रामीण अंचल में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक पर्व विजयदशमी उत्साह से मनाया गया। जगह-जगह अहंकारी दशानन के पुतले का पारंपरिक रूप से दहन किया गया। जैसे ही राम-लक्ष्मण व हनुमान दशहरा स्थल पहुंचे, माहौल भक्तिमय हो गया। रावण के पुतले पर तीर मारकर आग लगाई और रावण धू-धूकर जलने लगा। दहन के बाद अधिकांश घरों में विशेष भोज का आनंद लिया गया। कई श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने पहुंचे।
देवी मंदिर में 20 हजार से अधिक लोगों की भीड़ रही। यहां पर 5:41 बजे रावण का दहन हुआ। रावण दहन के वक्त पुतले से पहले अनार जले। उसके बाद मेघनाद और कुंभकर्ण के साथ रावण धू-धू कर जला, जिसके बाद पूरा पंडाल जय श्री राम के नारे से गूंज उठा। लोगों ने कहा कि एक बार फिर असत्य पर सत्य की जीत हुई।
सेक्टर 24 में श्री कृष्णा क्लब की तरफ से दूसरी बार रावण दहन का आयोजन किया गया। रावण दहन देखने के लिए लोग घरों की छतों पर चढ़ गए। ढोल-नगाड़ों की थाप पर रामभक्त हनुमान सेवकों के साथ नृत्य करते दिखाई दिए। जय श्री राम के जयकारों से मैदान गूंज उठा।
आचार्य लालमणि पांडे ने कहा कि भारतीय संस्कृति वीरता की पूजक है। शौर्य की उपासक है। व्यक्ति और समाज में रक्त में वीरता प्रकट हो, इसलिए दशहरे का उत्सव रखा गया है। दशहरे का पर्व भाईचारे का प्रतीक है। इसलिए समाज के हर समुदाय को भाईचारे की भावना से रहना चाहिए।