शाह नहीं लड़ेंगे अगला चुनाव

अमर उजाला, पानीपत Updated Tue, 21 Jan 2014 12:30 AM IST
पानीपत। पानीपत शहर से विधायक बलबीर पाल शाह अगला चुनाव नहीं लडे़ंगे। उनका कहना है कि उनके भाई वीरेंद्र पाल शाह चुनाव लड़ना चाहेंगे तो वे उनकी मदद करेंगे।

साथ ही कहा कि अगर पार्टी उनके राजनीतिक अनुभव का फायदा उठाने के लिए राज्यसभा में भेजेगी तो वे इसके लिए तैयार हैं। इसके कई मतलब निकाले जा रहे हैं मगर इसके राजनीतिक मायने क्या हैं यह सिर्फ विधायक ही जानते हैं।

विधायक शाह ने सोमवार को अपने निवास पर अपने नजदीकी मित्रों के साथ बातचीत में चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई। बाद में उनकी यह बातचीत बाहर तक पहुंच गई। उनके द्वारा अगला चुनाव न लड़ने की चर्चाओं से कांग्रेसियाें और विपक्षियाें के खूब फोन घनघनाते रहे। सब एक दूसरे से इस बारे में जानकारी लेने में लगे रहे।  
शाह ने अमर उजाला से बातचीत में अगला चुनाव न लड़ने की पुष्टि की है।

उन्हाेंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह कह रहे हैं कि 70 साल की आयु के बाद राजनेताआें को सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। वे पीएम की बात पर पहल करते हुए ऐसा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार से उनके भाई वीरेंद्र पाल शाह चुनाव लड़ना चाहते हैं तो उनका प्राथमिकता दी जाएगी। छोटे भाई का चुनाव में भरपूर सहयोग करेंगे।

उनके भाई पिछले सभी चुनाव में उनका कामकाज देखते रहे हैं और वे शहर के लोगों सीधे जुडे़ हुए हैं। यह उनकी इच्छा पर निर्भर है कि वीरेंद्र चुनाव लड़ें या नहीं।    

शाह ने बातचीत में कहा कि सरकार को पुराने नेताओं के अनुभव का फायदा उठाना चाहिए। नए-नए नेताओं की बजाय पुराने नेताआें को मौका देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें राज्यसभा में भेजा जाता है तो वे अपने अनुभव का फायदा पार्टी व सरकार को पहुंचाने के  लिए तैयार हैं।

विधायक शाह ने हाल ही में गठित हरियाणा कांग्रेस चुनाव समिति से 18 जनवरी को अपने आपको अलग कर लिया था। उन्हाेंने कहा कि उनकी पार्टी से किसी तरह की कोई नाराजगी नहीं है बल्कि वे इसके लिए अपने आपको फिट नहीं समझते।

इससे पूर्व चार अगस्त 2013 को विधायक शाह ने विधानसभा अध्यक्ष को अपना इस्तीफा सौंपकर सरकार को झटका दे दिया था। इससे कई दिन तक कांग्रेस व सरकार में बैचेनी छाई रही। बाद में मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा 15 अगस्त को उनके निवास स्थान पर पहुंचे और जैसे तैसे इस्तीफा वापस लेने के लिए मना लिया।

बलबीर पाल शाह ने पहली बार 1987 में चुनाव लड़ा और देवीलाल की आंधी के बावजूद 10974 मताें के अंतर से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। उनकी जीत से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कमान उनके हाथाें पर सौंप दी थी।

वे 1987 से 89 तक हरियाणा कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे। बाद 1991 में भी उन्होंने शानदार जीत दर्ज की। इस बार मुख्यमंत्री भजनलाल की सरकार में परिवहन मंत्री बने और लगातार पांच साल तक उनकी कैबिनेट में मंत्री रहे। वर्ष 1996 में चुनाव हार गए थे। उसके बाद 2000 और 2005 पानीपत से विधायक चुने गए। बाद में पानीपत में शहरी व ग्रामीण सीट बनने पर 2009 में पानीपत शहरी सीट में विधायक चुने गए।

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