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Panipat News: रिफाइनरी ने पराली लेने से खड़े किए हाथ, अब किसानों को भारी नुकसान
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मतलौडा। रिफाइनरी ने धान के सीजन के बीच में ही पराली लेने से मना कर दिया है। यही नहीं किसानों को चार नवंबर से पराली की पेमेंट तक नहीं मिल पा रही है। ऐसे में किसानों की परेशानी बढ़ गई है। रिफाइनरी अधिकारी और डिपो अधिकारी किसानों के लिए रास्ता निकालने की बजाय एक दूसरे पर बात डाल रहे हैं।
रिफाइनरी ने पराली के गट्ठे खरीदने के लिए ठेकेदारों को टेंडर दिया है, लेकिन अचानक 22 नवंबर से रिफाइनरी ने पराली खरीदना बंद कर दिया है। इतना ही नहीं चार नवंबर से रिफाइनरी किसानों की पराली के बिके हुए गट्ठों का भुगतान तक नहीं कर पाई है, जिससे कई किसान अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
किसान अनुज कुमार और सतनारायण ने बताया कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करके ट्रैक्टर व मशीनें खरीदी ताकि पराली का व्यापार किया जा सके। पूरी रुचि के साथ दिन रात काम किया। इसके बाद भी रिफाइनरी प्रबंधन की ओर से पराली के करोड़ों का भुगतान चार नवंबर से लटका दिया गया है, जिससे अब उनका आर्थिक बजट बिगड़ गया है। इतना ही नहीं रिफाइनरी के अधिकारी मांग पूरी होने की बात कह रहे हैं, जबकि उन्होंने व अन्य किसानों के पास पराली के दो से 25 हजार क्विंटल गट्ठों तक के स्टाॅक खेतों में लगे हुए हैं। सैकड़ों एकड़ धान की कटाई अभी बाकी है। गट्ठे बनाने में उनका लाखों रुपये का खर्च आ चुका है। अगर रिफाइनरी द्वारा उनकी खरीद नहीं की गई तो उन्हें मोटा नुकसान होगा। ऐसे में अब अगर उन्होंने पराली के गट्ठे खरीदने बंद कर दिए तो पराली खेतों में ही रह जाएगी और इसमें किसान आग भी लगा सकते हैं।
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रिफाइनरी के पीआरओ विवेक ने बताया कि पराली न खरीदने की जानकारी मुझे नहीं है और न ही मैं इस बारे में कुछ भी कहने का अधिकारिक हूं। इस बारे में बिजनेस डेवलपमेंट के चीफ मैनेजर सचिन ने बताया कि रिफाइनरी कृषि विभाग के माध्यम पराली खरीदती है। छह लोकेशन पर पराली स्टॉक की जा रही है। उन्होंने कहा कि पराली खरीदना बंद करने की जानकारी मुझे नहीं है।
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रिफाइनरी ने पराली के गट्ठे खरीदने के लिए ठेकेदारों को टेंडर दिया है, लेकिन अचानक 22 नवंबर से रिफाइनरी ने पराली खरीदना बंद कर दिया है। इतना ही नहीं चार नवंबर से रिफाइनरी किसानों की पराली के बिके हुए गट्ठों का भुगतान तक नहीं कर पाई है, जिससे कई किसान अब अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
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किसान अनुज कुमार और सतनारायण ने बताया कि उन्होंने लाखों रुपये खर्च करके ट्रैक्टर व मशीनें खरीदी ताकि पराली का व्यापार किया जा सके। पूरी रुचि के साथ दिन रात काम किया। इसके बाद भी रिफाइनरी प्रबंधन की ओर से पराली के करोड़ों का भुगतान चार नवंबर से लटका दिया गया है, जिससे अब उनका आर्थिक बजट बिगड़ गया है। इतना ही नहीं रिफाइनरी के अधिकारी मांग पूरी होने की बात कह रहे हैं, जबकि उन्होंने व अन्य किसानों के पास पराली के दो से 25 हजार क्विंटल गट्ठों तक के स्टाॅक खेतों में लगे हुए हैं। सैकड़ों एकड़ धान की कटाई अभी बाकी है। गट्ठे बनाने में उनका लाखों रुपये का खर्च आ चुका है। अगर रिफाइनरी द्वारा उनकी खरीद नहीं की गई तो उन्हें मोटा नुकसान होगा। ऐसे में अब अगर उन्होंने पराली के गट्ठे खरीदने बंद कर दिए तो पराली खेतों में ही रह जाएगी और इसमें किसान आग भी लगा सकते हैं।
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रिफाइनरी के पीआरओ विवेक ने बताया कि पराली न खरीदने की जानकारी मुझे नहीं है और न ही मैं इस बारे में कुछ भी कहने का अधिकारिक हूं। इस बारे में बिजनेस डेवलपमेंट के चीफ मैनेजर सचिन ने बताया कि रिफाइनरी कृषि विभाग के माध्यम पराली खरीदती है। छह लोकेशन पर पराली स्टॉक की जा रही है। उन्होंने कहा कि पराली खरीदना बंद करने की जानकारी मुझे नहीं है।