{"_id":"157015a03e6c002167e0c27ba70127d8","slug":"panipat-fraud-money-police","type":"story","status":"publish","title_hn":"जीआरपी थानेदार समेत तीन 10 हजार की रिश्वत लेते दबोचे ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जीआरपी थानेदार समेत तीन 10 हजार की रिश्वत लेते दबोचे
ब्यूरो/अमर उजाला, पानीपत
Updated Sun, 06 Jul 2014 12:33 AM IST
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सीबीआई की टीम ने जीआरपी पानीपत में तैनात एक एएसआई और एक प्रॉपर्टी डीलर समेत तीन लोगों को 10 हजार रुपये की रिश्वत के साथ काबू किया है। एएसआई करनाल के एक युवक को मारपीट के मामले में शामिल करने की धमकी दे रहा था।
एएसआई के कहने पर ही प्रॉपर्टी डीलर व उसके रिश्तेदार को रिश्वत के पैसे दिए थे। बाद में सीबीआई की टीम ने तीनों आरोपियों को स्टेट का मामला होने पर विजिलेंस को सौंप दिया है। विजिलेंस ने एएसआई समेत तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर लिया है और तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई चंडीगढ़ की एंटी करप्शन ब्रांच के डीएसपी जगदीश के नेतृत्व में टीम ने बीती शाम को रेलवे स्टेशन के नजदीक प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार और उसके रिश्तेदार विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को रामनगर करनाल निवासी पंकज से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते काबू किया।
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सुरेंद्र कुमार और विजेंद्र ने रिश्वत की राशि जीआरपी पानीपत में तैनात एएसआई राजबीर सिंह के कहने पर लेने की बात कही। इसके बाद सीबीआई की टीम देर शाम को रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी के थाने में पहुंची और मामले की जांच की।
सीबीआई की जांच में जीआरपी के एएसआई द्वारा रिश्वत लेने का मामला स्टेट विजिलेंस के अंतर्गत पाया और स्टेट विजिलेंस की टीम को सौंप दिया। पानीपत और करनाल की विजिलेंस टीम ने एएसआई राजबीर सिंह, प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार व विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को काबू कर लिया और तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। विजिलेंस टीम ने तीनों को कोर्ट में पेश किया। जहां से तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई ने आठ घंटे तक थाना खंगाला
सीबीआई के डीएसपी की अगुवाई में टीम शुक्रवार देर शाम को जीआरपी रेलवे स्टेशन पर पहुंची। सीबीआई की टीम ने थाने में तैनात सभी कर्मियों को बाहर निकाल दिया और पूरे थाने को खंगाला। इसके बाद जीआरपी कर्मियों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि सीबीआई की पूछताछ तड़के करीब तीन बजे तक चली। इस दौरान जीआरपी कर्मियों व अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं।
यह है मामला
पानीपत रेलवे स्टेशन पर 15 दिन पहले एक वेंडर के साथ मारपीट हो गई थी। करनाल निवासी पंकज व उसके एक साथी ने मारपीट करने वालाें को आपस में छुड़वाया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में मोटी राशि का लेन-देन होने के बाद समझौता हो गया था। आरोप है कि जीआरपी एएसआई राजबीर सिंह ने पंकज से संपर्क साधा और उसके खिलाफ इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी। पंकज ने इस मामले में बेकसूर बताया तो एएसआई राजबीर ने कानूनी दाव पेंचों के सहारे फंसाने की धमकी दी। आरोप है कि एएसआई ने पंकज से इसकी एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। पंकज ने एएसआई को टालने का प्रयास किया, लेकिन उसने उनका पीछा नहीं छोड़ा। इससे तंग आकर पंकज ने एएसआई की सारी बातों की रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। वह उसके जीआरपी या आरपीएफ में होने का पता नहीं लगा सका था। बताया जा रहा है कि पंकज ने एएसआई राजबीर की रिकार्डिंग सीबीआई के चंडीगढ़ एसपी को सुनाई और इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद एसपी ने डीएसपी के नेतृत्व में टीम का गठन किया और पानीपत में दबिश दी।
प्रॉपर्टी डीलर के यहां राजबीर का आना-जाना था
प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार और एएसआई राजबीर का आपस में आना-जाना था। दोनों एक दूसरे के राजदार भी थे। एएसआई राजबीर का लेन-देन यहीं पर होता था। राजबीर पंकज से 10 हजार रुपये लेने पर राजी हो गया और उसने सुरेंद्र कुमार की दुकान पर भेज दिया। पंकज ने सुरेंद्र कुमार को एएसआई राजबीर का नाम लेकर रिश्वत के 10 हजार रुपये दे दिए। सुरेंद्र कुमार ने ये पैसे गिनने के लिए विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को दे दिए। इसी बीच इशारा पाकर सीबीआई की टीम ने दोनों को काबू कर लिया।
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एएसआई के कहने पर ही प्रॉपर्टी डीलर व उसके रिश्तेदार को रिश्वत के पैसे दिए थे। बाद में सीबीआई की टीम ने तीनों आरोपियों को स्टेट का मामला होने पर विजिलेंस को सौंप दिया है। विजिलेंस ने एएसआई समेत तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा दर्ज कर लिया है और तीनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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सीबीआई चंडीगढ़ की एंटी करप्शन ब्रांच के डीएसपी जगदीश के नेतृत्व में टीम ने बीती शाम को रेलवे स्टेशन के नजदीक प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार और उसके रिश्तेदार विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को रामनगर करनाल निवासी पंकज से 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते काबू किया।
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सुरेंद्र कुमार और विजेंद्र ने रिश्वत की राशि जीआरपी पानीपत में तैनात एएसआई राजबीर सिंह के कहने पर लेने की बात कही। इसके बाद सीबीआई की टीम देर शाम को रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी के थाने में पहुंची और मामले की जांच की।
सीबीआई की जांच में जीआरपी के एएसआई द्वारा रिश्वत लेने का मामला स्टेट विजिलेंस के अंतर्गत पाया और स्टेट विजिलेंस की टीम को सौंप दिया। पानीपत और करनाल की विजिलेंस टीम ने एएसआई राजबीर सिंह, प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार व विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को काबू कर लिया और तीनों के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया। विजिलेंस टीम ने तीनों को कोर्ट में पेश किया। जहां से तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
सीबीआई ने आठ घंटे तक थाना खंगाला
सीबीआई के डीएसपी की अगुवाई में टीम शुक्रवार देर शाम को जीआरपी रेलवे स्टेशन पर पहुंची। सीबीआई की टीम ने थाने में तैनात सभी कर्मियों को बाहर निकाल दिया और पूरे थाने को खंगाला। इसके बाद जीआरपी कर्मियों से पूछताछ की। बताया जा रहा है कि सीबीआई की पूछताछ तड़के करीब तीन बजे तक चली। इस दौरान जीआरपी कर्मियों व अधिकारियों की सांसें अटकी रहीं।
यह है मामला
पानीपत रेलवे स्टेशन पर 15 दिन पहले एक वेंडर के साथ मारपीट हो गई थी। करनाल निवासी पंकज व उसके एक साथी ने मारपीट करने वालाें को आपस में छुड़वाया था। बताया जा रहा है कि इस मामले में मोटी राशि का लेन-देन होने के बाद समझौता हो गया था। आरोप है कि जीआरपी एएसआई राजबीर सिंह ने पंकज से संपर्क साधा और उसके खिलाफ इस मामले में मुकदमा दर्ज करने की धमकी दी। पंकज ने इस मामले में बेकसूर बताया तो एएसआई राजबीर ने कानूनी दाव पेंचों के सहारे फंसाने की धमकी दी। आरोप है कि एएसआई ने पंकज से इसकी एवज में 20 हजार रुपये की मांग की। पंकज ने एएसआई को टालने का प्रयास किया, लेकिन उसने उनका पीछा नहीं छोड़ा। इससे तंग आकर पंकज ने एएसआई की सारी बातों की रिकार्डिंग करनी शुरू कर दी। वह उसके जीआरपी या आरपीएफ में होने का पता नहीं लगा सका था। बताया जा रहा है कि पंकज ने एएसआई राजबीर की रिकार्डिंग सीबीआई के चंडीगढ़ एसपी को सुनाई और इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की। इसके बाद एसपी ने डीएसपी के नेतृत्व में टीम का गठन किया और पानीपत में दबिश दी।
प्रॉपर्टी डीलर के यहां राजबीर का आना-जाना था
प्रॉपर्टी डीलर सुरेंद्र कुमार और एएसआई राजबीर का आपस में आना-जाना था। दोनों एक दूसरे के राजदार भी थे। एएसआई राजबीर का लेन-देन यहीं पर होता था। राजबीर पंकज से 10 हजार रुपये लेने पर राजी हो गया और उसने सुरेंद्र कुमार की दुकान पर भेज दिया। पंकज ने सुरेंद्र कुमार को एएसआई राजबीर का नाम लेकर रिश्वत के 10 हजार रुपये दे दिए। सुरेंद्र कुमार ने ये पैसे गिनने के लिए विजेंद्र कुमार उर्फ विजय को दे दिए। इसी बीच इशारा पाकर सीबीआई की टीम ने दोनों को काबू कर लिया।