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Panipat News: प्राथमिक विद्यार्थियों के लिए लागू होगा पंचकोष विकास सिद्धांत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 09 Dec 2024 02:44 AM IST
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Panchakosh development principle will be applicable for primary students
पानीपत। प्रदेश सहित जिले के राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक विद्यार्थियों के लिए पंचकोष विकास सिद्धात लागू किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को एक घंटे के लिए योग एवं स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद् ने इस संबंध में सभी जिला शिक्षा एवं जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। देश में पंचकोशी व्यवस्था शैक्षणिक सत्र 2023-24 से लागू करने की योजना थी जिसे इस शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाएगा। एनसीईआरटी ने इसका फ्रेमवर्क तैयार कर देश की सभी एससीईआरटी और शिक्षा बोर्ड को पाठ्यक्रम में शामिल करने के लिए प्रेषित कर दिया है।
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निर्देशानुसार प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए पंचकोष विकास सिद्धांत लागू किया जा रहा है। एससीईआरटी ने कहा है कि योग की अवधारणा के अनुरूप मानव का अस्तित्व पाँच भागों में बंटा है। इनमें अन्नमय कोश, प्राणमय कोश, मनमय कोश, विज्ञानमय कोश व आनंदमय कोश शामिल हैं जिसे पंचकोष कहते है। राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा इन्हीं पांच सिद्धांतों पर आधारित है। प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए इन पंचकोष सिद्धांतों का विकास अत्यंत आवश्यक है। इस आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक शनिवार को एक घंटे के लिए योग एवं स्वास्थ्य की जानकारी हेतु विद्यालय में कार्यरत शिक्षकों के साथ-साथ विद्यालय के आस-पास रहने वाले योग प्रशिक्षकों एवं स्वास्थ्य संबंधी विशेषज्ञों को बुलाया जा सकता है या आभासीय व्याख्यान की व्यवस्था भी की जा सकती है।
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पंचकोश पर आधारित होंगे पांच साल
बच्चों की स्कूली शिक्षा के शुरुआती पांच साल पंचकोश विकास पर आधारित होंगे। बच्चों को संतुलित भोजन, पारंपरिक खेल खेलने और कसरत व योग करने का प्रशिक्षण मिलेगा। योग के जरिए बच्चों को सही ढंग से सांस लेना सिखाया जाएगा। इससे बच्चों का उच्चारण भी सुधरेगा। स्कूल में रोज कहानियां, गीत, लोरी, कविताएं, प्रार्थनाएं सुनाई जाएंगी। इससे बच्चों में संस्कृति के लिए समझ विकसित होगी। इंद्रियों का विकास भी तेजी से होगा। स्कूल में पढ़ाने का तरीका ऐसा होगा जिससे बच्चों का शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास हो सकेगा।
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योग की अवधारणा है पंचकोश विकास

पंचकोश विकास योग की अवधारणा है जिसके मुताबिक, मानव अस्तित्व पांच हिस्सों में बंटा है जिसे पंचकोश कहते हैं। इनके जरिए चेतन, अवचेतन व अचेतन मन की अनुभूति होती है। सभी एक-दूसरे से संबंधित हैं और ये एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं।



ये हैं पंचकोश विकास सिद्धांत
अन्नमय कोश- इसमें शारीरिक विकास, फिटनेस, लचीलापन, ताकत और स्वस्थ जीवन को ध्यान में रखकर शरीर व आदतों को बनाना शामिल है।

प्राणमय कोश- जीवन ऊर्जा विकास से संंबंधित है। प्रमुख प्रणालियों जैसे पाचन, श्वसन और तंत्रिका तंत्र का सुचारू कामकाज इसमें शामिल है।

मनमय कोश- मानसिक व भावनात्मक विकास से संबंधित है। नकारात्मक भावनाओं को संभालना, गुण विकास, प्रदर्शन कला, संस्कृति और साहित्य के प्रति झुकाव इसमें शामिल है।


विज्ञानमय कोश- ये बौद्धिक विकास से संबंधित है। चेतना, तर्क, भाषाई कौशल, कल्पना, रचनात्मकता शामिल है।

आनंदमय कोश- आध्यात्मिक या चैतसिक विकास से जुड़ा है। प्रेम, करुणा, सौंदर्य बोध, खुद को जानना शामिल है।

वर्जन-
राजकीय विद्यालयों में प्राथमिक विद्यार्थियों के लिए पंचकोष विकास सिद्धात लागू किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में प्रत्येक शनिवार को एक घंटे के लिए योग एवं स्वास्थ्य शिविर लगाया जाएगा। एससीईआरटी ने इस संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशानुसार योजना को अमल में लाया जाएगा।
- सुभाष चंद्र भारद्वाज, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, पानीपत।
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