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Panipat News: एक्सचेंज डीड के जरिए रजिस्ट्री कराने के खेल पर कसी लगाम

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 24 Sep 2026 02:46 AM IST
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Crackdown on the practice of property registration via exchange deeds
­लाभ सिंहमतलौडा। अधिसूचित और नियंत्रित क्षेत्रों में धारा 7-ए की पाबंदियों से बचने के लिए एक्सचेंज डीड (अदल-बदली के दस्तावेज) के जरिए जमीन की रजिस्ट्री कराने के खेल पर सरकार ने लगाम कस दी है। हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट, 1975 की धारा 7-ए में संशोधन कर इसमें अदला-बदली डीड को भी शामिल किया गया है। अब एक्सचेंज डीड से जुड़ी रजिस्ट्री से पहले धारा 7-ए के प्रावधानों का पालन करना अनिवार्य होगा।
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राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग और नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग ने प्रदेश के सभी मंडलायुक्त, उपायुक्त, उप-रजिस्ट्रार और तहसीलदारों को संशोधित प्रावधान जारी कर दिए हैं। अधिकारियों को इनका सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इसलिए किया गया संशोधन : विभाग के संज्ञान में आया था कि नियंत्रित क्षेत्रों में कुछ कॉलोनाइजर धारा 7-ए के तहत एनओसी और अन्य कानूनी पाबंदियों से बचने के लिए जमीन की सीधी खरीद-फरोख्त के बजाय एक्सचेंज डीड का सहारा ले रहे थे। इसके जरिए अप्रत्यक्ष रूप से प्लॉटों की खरीद-फरोख्त कर अनधिकृत कॉलोनियां बसाई जा रही थीं। इस खामी को दूर करने के लिए अध्यादेश के माध्यम से धारा 7-ए में ‘लीज’ शब्द के बाद ‘या अदला-बदली डीड’ शब्द जोड़ा गया है। संवाद
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तत्काल प्रभाव से लागू हुए आदेश
अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्तायुक्त कार्यालय से जारी आदेशों के अनुसार नियंत्रित क्षेत्रों में जमीन की अदला-बदली से संबंधित रजिस्ट्री से पहले धारा 7-ए के सभी प्रावधानों का पालन जरूरी होगा। आदेशों की अवहेलना करने वाले राजस्व अधिकारियों और अवैध निर्माणकर्ताओं के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। -वीरेंद्र गिल, तहसीलदार मतलौडा

जीटी रोड पर नए ढाबों, व्यावसायिक निर्माण पर रोक, 60 दिन में हटेंगे कब्जे
पानीपत। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद राष्ट्रीय राजमार्गों (जीटी रोड) की सुरक्षा और सुचारू यातायात को लेकर प्रशासन ने सख्ती के निर्देश दिए हैं। अब राष्ट्रीय राजमार्ग के राइट ऑफ वे (आरओडब्ल्यू) क्षेत्र में नए ढाबे, भोजनालय और अन्य व्यावसायिक ढांचे बनाने व संचालित करने पर रोक रहेगी। साथ ही राजमार्ग सीमा में मौजूद अवैध कब्जों को हटाने की समयबद्ध कार्रवाई की जाएगी।
जिला न्यायालय के एडवोकेट जोगिंद्र पाल राठी ने उपायुक्त-सह-जिला मजिस्ट्रेट को शिकायत देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का सख्ती से पालन कराने की मांग की है। उन्होंने 13 अप्रैल 2026 को स्वप्रेरणा याचिका में पारित आदेश का हवाला देते हुए बताया कि एनएच-44 पर किलोमीटर 86 से 96 के बीच कई अवैध व्यावसायिक अतिक्रमण और ढांचे मौजूद हैं। एनएचएआई और एलएंडटी के अनुबंध में भी 24 प्रमुख अतिक्रमणकारियों का रिकॉर्ड दर्ज है। आदेशों के अनुसार जिला मजिस्ट्रेट को संबंधित कानून की प्रक्रिया के तहत 60 दिनों के भीतर राजमार्ग सीमा से कब्जे हटाने या ध्वस्त कराने की कार्रवाई करनी होगी। इसकी जिम्मेदारी उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक की संयुक्त रूप से तय की गई है। ब्यूरो


हाईवे सेफ्टी टास्क फोर्स गठित की गई है। एनएचएआई को राष्ट्रीय राजमार्ग पर उपयुक्त स्थानों पर अतिरिक्त ट्रक ले-बाय (विश्राम स्थल) विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। -डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ, उपायुक्त
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