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Panipat News: अनाथों और वृद्धों के लिए बनेगा अनाथालय और वृद्ध आश्रम
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पानीपत। शहर में रहने वाले वृद्धों, अनाथों के लिए आश्रम और प्रवासी मजदूरों के लिए निगम अब हॉस्टल बनाने जा रहा है। नगर निगम के इस बड़े प्रोजेक्ट को मुख्यमंत्री घोषणा का नंबर 27814 मिल गया है। जिसके बाद निगम ने करीब एक साल से लंबित इस प्रोजेक्ट को बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। अब निगम इस प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार कराने की जुगत में है। इसके लिए निगम ने एचएसआईआईडीसी की पुराना औद्योगिक एरिया स्थित छह एकड़ जमीन निर्धारित की गई थी। जिसके लिए निगम ने एचएसआईआईडीसी को एनओसी देने के लिए पत्राचार किया है। अब देखना ये है कि अपनी करीब छह एकड़ जमीन में से एचएसआईआईडीसी नगर निगम को कितनी जमीन प्रोजेक्ट के लिए सौंपता है।
अधिकारियों का अनुमान है कि एचएसआईआईडीसी ने अगर पांच से छह एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए दी तो इस पर करीब 100 से 120 करोड़ रुपये खर्च होगा। जमीन मिलने के बाद प्रोजेक्ट का साइट प्लान बनाया जाएगा। जिसमें इमारत से लेकर उसके डिजाइन और लागत का अनुमान लगाया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट की डीपीआर में ही तय होगा कि ये भवन कितने मंजिला होना चाहिए। इसका डिजाइन, मैश, शौचालय, पार्किंग के साथ इसमें अन्य क्या सुविधाएं दी जा सकेंगी।
गौरतलब है कि ये निगम का ये प्रोजेक्ट शहरी विधायक की ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक रहा है। इसके लिए विधायक ने काफी समय पहले सरकार से जमीन की मांग की थी। इस जमीन की एनओसी मिलने के बाद निगम यहां करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक भवन तैयार कराएगा। जिसका फायदा शहर के अनाथ बच्चों, बेघर लोगों और प्रवासी मजदूरों को मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि शहर में लेबर यानी श्रमिक वर्ग ज्यादा है। इनमें से काफी परिवार ऐसे भी हैं जिनके पास शहर में आते ही आवास मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। इनको ध्यान में रखते हुए लेबर हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। जो दिल्ली की तर्ज पर फ्लैट सिस्टम पर आधारित होगा। इनमें एक सामान्य रेट के हिसाब से श्रमिक वर्ग शुल्क देकर रह सकेगा। इनमें श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए पानी, लाइट और शौचालयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसी जमीन पर अलग से अनाथालय और वृद्धाश्रम भी बनाया जाएगा।
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वर्जन:
लेबर हॉस्टल, वृद्धाश्रम और अनाथालय बनाने का ये बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पर मुख्यमंत्री घोषणा का नंबर लग चुका है। इसी नंबर और बजट के हिसाब से इसका निर्माण होगा। सबसे पहले एचएसआईडीसी से जमीन ली जाएगी। जिसके लिए आवेदन किया है। जमीन मिलने के बाद प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार होगी। जिसमें सभी जानकारी दर्ज हो सकेंगी।
राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।
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अधिकारियों का अनुमान है कि एचएसआईआईडीसी ने अगर पांच से छह एकड़ जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए दी तो इस पर करीब 100 से 120 करोड़ रुपये खर्च होगा। जमीन मिलने के बाद प्रोजेक्ट का साइट प्लान बनाया जाएगा। जिसमें इमारत से लेकर उसके डिजाइन और लागत का अनुमान लगाया जा सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि प्रोजेक्ट की डीपीआर में ही तय होगा कि ये भवन कितने मंजिला होना चाहिए। इसका डिजाइन, मैश, शौचालय, पार्किंग के साथ इसमें अन्य क्या सुविधाएं दी जा सकेंगी।
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गौरतलब है कि ये निगम का ये प्रोजेक्ट शहरी विधायक की ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक रहा है। इसके लिए विधायक ने काफी समय पहले सरकार से जमीन की मांग की थी। इस जमीन की एनओसी मिलने के बाद निगम यहां करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक भवन तैयार कराएगा। जिसका फायदा शहर के अनाथ बच्चों, बेघर लोगों और प्रवासी मजदूरों को मिलेगा। अधिकारियों का मानना है कि शहर में लेबर यानी श्रमिक वर्ग ज्यादा है। इनमें से काफी परिवार ऐसे भी हैं जिनके पास शहर में आते ही आवास मिलना काफी मुश्किल हो जाता है। इनको ध्यान में रखते हुए लेबर हॉस्टल का निर्माण कराया जाएगा। जो दिल्ली की तर्ज पर फ्लैट सिस्टम पर आधारित होगा। इनमें एक सामान्य रेट के हिसाब से श्रमिक वर्ग शुल्क देकर रह सकेगा। इनमें श्रमिक वर्ग के लोगों के लिए पानी, लाइट और शौचालयों की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसी जमीन पर अलग से अनाथालय और वृद्धाश्रम भी बनाया जाएगा।
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लेबर हॉस्टल, वृद्धाश्रम और अनाथालय बनाने का ये बड़ा प्रोजेक्ट है। इस पर मुख्यमंत्री घोषणा का नंबर लग चुका है। इसी नंबर और बजट के हिसाब से इसका निर्माण होगा। सबसे पहले एचएसआईडीसी से जमीन ली जाएगी। जिसके लिए आवेदन किया है। जमीन मिलने के बाद प्रोजेक्ट की डीपीआर तैयार होगी। जिसमें सभी जानकारी दर्ज हो सकेंगी।
राहुल पूनिया, एक्सईएन, नगर निगम।