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‘गरीबों का खून चूस रहे अधिकारी, मांगते हैं रिश्वत’
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पानीपत। हाउस की बैठक के दौरान सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट बोलते हुए की प्रधानमंत्री आवास यो?
- फोटो : Panipat
पानीपत। ‘प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों को घर बनाने के लिए निगम अधिकारियों ने प्रलोभन देकर उनके घर तुड़वा दिए। इसके बाद कमीशन नहीं दिया तो लाभार्थियों को डेढ़ साल से किस्त न देकर धक्के खिलाए जा रहे हैं। इसके लिए एक निगम कर्मी ने एक गरीब से दस हजार रुपये मांगे। वह गरीब आत्महत्या करने जा रहा था, उसे बड़ी मुश्किल से रोका। गरीबों का ये दर्द देखकर मैं रोया हूं। इसके बाद कई लोग ऐसे मिले जिनसे अधिकारी रिश्वत मांग रहे थे।’ ये बातें सदन में सीनियर डिप्टी मेयर दुष्यंत भट्ट ने कही।
इस पर मेयर अवनीत कौर ने कहा कि उनके पास भी आई एक शिकायत में एक निगम कर्मी पर 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पार्षद अशोक कटारिया ने आरोप लगाए कि ये अधिकारी गरीबों का खून चूस रहे हैं। इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षद संजीव दहिया ने कहा कि गरीबों से पैसा लिए बगैर ये काम नहीं करते। इस पर पूरा सदन प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉफ पर भड़क गया। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर फैसला लिया कि इस पूरे स्टॉफ को बदला जाए। हालांकि आयुक्त ने आश्वासन देते हुए इस मुद्दे का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया है।
निगम को बंद करने का प्रस्ताव सदन में पास करो: भाटिया
पार्षद रविंद्र भाटिया बोले कि जब नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर समेत सभी पार्षद रो रहे हैं, उनके काम तो दूर की बात एक गरीब आदमी का काम तक नहीं हो रहा। हर चीज के लिए अधिकारी मोटी रिश्वत मांगते हैं। शहर की पूरी जनता तक परेशान हैं। इनकी शिकायत दो या न दो, इन अधिकारियों को मनमर्जी करनी होती है तो निगम को क्यों खोला रखा है। निगम को बंद करने का प्रस्ताव सदन में पास किया जाना चाहिए। इस पर पूरे सदन में सहमति जताई लेकिन फिर से आयुक्त ने मुद्दे का बीचबचाव करते हुए दो सप्ताह में लाभार्थियों को पीएमवाई की किस्त देने का भरोसा दिलवाया।
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सामान को हल्का कर घोटाला करने में लगे हैं: धींगड़ा
आखिर में पार्षद अश्वनी धींगड़ा एक स्ट्रीट लाइट को लेकर सदन की बैठक में पहुंचे और लाइटों के क्लैंप आपस में बजाने शुरू कर दिए। इसे देख सदन पदाधिकारियों ने बैठक छोड़ दी। उनके साथ अधिकारी भी चले गए। धींगड़ा ने कहा कि डेढ साल पहले 740 ग्राम के क्लैंप पर एक किलो 135 ग्राम की लाइट लगाई जाती थी और अब 810 ग्राम के क्लैंप पर 3 किलो 165 ग्राम की लाइट लगाई जा रही है, जो लटक रही है। लाइटों को खरीदने के लिए टीम गई थी, इसलिए लाइटों में घोटाला नहीं हो पाया, लेकिन अब बाकी के सामान को हल्का लगाकर घोटाला करने में लगे हुए हैं।
20 हजार की पुलिया बनाई नहीं, 6 करोड़ की सड़क बनवाने चले हैं: कटारिया
पार्षद अशोक कटारिया ने निगम अधिकारियों को घेरा। अधिकारी उनके सवालों से बचते नजर आए। एमसी फंड से बनाए जाने वाली करीब 6 करोड़ की सड़कों का विरोध सबसे पहले अशोक कटारिया ने किया। उन्होंने कहा कि ये काम अमरूत का है तब एमसी फंड से क्यों करवाया जा रहा है। जिस पर तकरीबन पार्षदों ने सहमति जताई। कटारिया ने कहा कि पार्षदों के छोटे मोटे काम तो होते नहीं। निगम से 20 हजार की पुलिया तो बनी नहीं और निगम एमसी से फंड से 6 करोड़ की तीन सड़क बनाने चला है। इसे वे नहीं बनने देंगे। अगर बजट वहां लगाया तो हर छोटे से छोटे काम के लिए सभी पार्षदों को निगम अधिकारियों का मुंह ताकना पड़ेगा। इस पर आयुक्त ने कहा कि वे इसके लिए धन की व्यवस्था कराएंगे।
शकुंतला गर्ग ने पूछ लिया, जेबीएम से कितने में बात हुई
जब शहर की सफाई को चार जोन में बांट कर टेंडर लगाने पर चर्चा चल रही थी तो पार्षद शकुंतला गर्ग ने कहा वे वार्ड वार टेंडर लगवाना चाहती हैं। जिससे दूसरे पार्षद या वार्ड को किसी भी वार्ड में हस्तक्षेप न हो। इस पर कई पार्षद बोले की अगर तकनीकी हिसाब से देखा जाए तो इसमें समय काफी ज्यादा लगेगा। इसकी बीच एक पार्षद ने उनके इस सुझाव को पूरे तरीक से नकारते हुए इस पर आपत्ति लगा दी तो पार्षद शकुंतला गर्ग का गुस्सा फूट गया। उन्होंने भरे सदन में पार्षद से पूछ लिया कि क्यों उनकी जेबीएम से कितने में बात हुई है। इस पर पहले सदन में ठहाके लगे, जब बात पार्षद की समझ में आई तो सन्नाटा छा गया।
अब तो हमें भी दिखने लगा है अंधेरा, मांसाखोरों के लिए जगह दो: विधायक प्रमोद विज
स्ट्रीट लाइटों की खरीद व इंस्टॉलेशन पर निगम करीब सवा चार करोड़ का बजट लगा रहा है। इसके बाद भी करीब 6 महीने से ये काम सही तरीके से चालू नहीं हो पाया है। इस पर शहरी विधायक ने भी निगम पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब तो हमें भी अंधेरा दिखने लगा है, अब तो लाइटों को लगवाने का काम निगम को कर देना चाहिए। वहीं, शहरी विधायक ने मांसाखोरों के लिए भी जगह मांगी है। इसके लिए उन्होंने वार्ड नंबर 9 के वाटर वर्क्स की जगह पर विचार भी किया है। इस पर निगम सहमति से जल्द मासाखोरों के लिए जगह निर्धारित की जा सकती है।
शहर में कट रही 15 अवैैध कॉलोनियां: पवन गोगोलिया
शहर में कई कॉलोनियों को नियमित करवाने के प्रस्ताव का शुरू में कई पार्षदों ने विरोध किया। जब बताया गया कि ये कॉलोनियों 70 प्रतिशत से ज्यादा बस चुकी हैं। पहले सरकार 79 कॉलोनियों वैध कर चुकी है। इनको भी नियमित करवा देना चाहिए, बाकी अन्य किसी अवैध कॉलोनी का पनपने नहीं दिया जाएगा। इस पर कटारिया ने कहा कि कुछ कॉलोनाइजर गरीब लोगों को लूट रहे हैं। सस्ता प्लाट दिखा उनकी जमा पूंजी को हड़प कर रहे हैं। उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षद पवन गोगलिया और अशोक कटारिया ने कहा कि इस समय भी शहर में 15 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं और निगम चुप है।
साढ़े 5 करोड से नहीं हुई सफाई तो अब क्या होगी
सफाई के विषय पर पार्षद अश्वनी धींगड़ा ने कहा कि जब शहर की सफाई साढ़े 5 करोड़ में नहीं हो पाई तो अब कैसे होगी। इस पर पार्षद से कहा गया कि इसकी शिकायत वे संबंधित सफाई कंपनी से भी कर सकते हैं, तो पार्षद ने जवाब दिया कि कंपनी को कहने की हिम्मत तो आज तक मेयर तक की नहीं हुई वे तो फिर भी पार्षद हैं। इस पर आयुक्त ने कहा कि नए टेंडरों के नियम व शर्ते निगम सदन अनुसार ही बनाए जाएंगी, ताकि सभी टेंडरों को कोई व्यक्ति विशेष न ले पाए।
मेरे वार्ड में कोई टेंडर ही नहीं: सहगल
मीटिंग के बीच में पार्षद पति विजय सहगल ने कहा कि पिछले दो साल में उनके वार्ड में एक भी विकास कार्य नहीं हुआ है। उनके वार्ड में केवल दो टेंडर अब लगाए गए हैं उन दोनों टेंडरों को भी निगम अधिकारियों ने पुरानी वार्ड बंदी के हिसाब से लगा दिया है। जिससे वे और उनके वार्ड के लोग परेशान हैं। इस पर उन्होंने सदन से गुजारिश की है कि उनके वार्ड के प्रस्तावित सभी एजेंडों को पास करवाकर उनके टेंडर लगवाएं जाएं। जिस पर निगम सदन ने सहमति जाहिर की।
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इस पर मेयर अवनीत कौर ने कहा कि उनके पास भी आई एक शिकायत में एक निगम कर्मी पर 50 हजार रिश्वत मांगने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद पार्षद अशोक कटारिया ने आरोप लगाए कि ये अधिकारी गरीबों का खून चूस रहे हैं। इन पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षद संजीव दहिया ने कहा कि गरीबों से पैसा लिए बगैर ये काम नहीं करते। इस पर पूरा सदन प्रधानमंत्री आवास योजना के स्टॉफ पर भड़क गया। सभी पार्षदों ने एकजुट होकर फैसला लिया कि इस पूरे स्टॉफ को बदला जाए। हालांकि आयुक्त ने आश्वासन देते हुए इस मुद्दे का जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया है।
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निगम को बंद करने का प्रस्ताव सदन में पास करो: भाटिया
पार्षद रविंद्र भाटिया बोले कि जब नगर निगम के मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर समेत सभी पार्षद रो रहे हैं, उनके काम तो दूर की बात एक गरीब आदमी का काम तक नहीं हो रहा। हर चीज के लिए अधिकारी मोटी रिश्वत मांगते हैं। शहर की पूरी जनता तक परेशान हैं। इनकी शिकायत दो या न दो, इन अधिकारियों को मनमर्जी करनी होती है तो निगम को क्यों खोला रखा है। निगम को बंद करने का प्रस्ताव सदन में पास किया जाना चाहिए। इस पर पूरे सदन में सहमति जताई लेकिन फिर से आयुक्त ने मुद्दे का बीचबचाव करते हुए दो सप्ताह में लाभार्थियों को पीएमवाई की किस्त देने का भरोसा दिलवाया।
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सामान को हल्का कर घोटाला करने में लगे हैं: धींगड़ा
आखिर में पार्षद अश्वनी धींगड़ा एक स्ट्रीट लाइट को लेकर सदन की बैठक में पहुंचे और लाइटों के क्लैंप आपस में बजाने शुरू कर दिए। इसे देख सदन पदाधिकारियों ने बैठक छोड़ दी। उनके साथ अधिकारी भी चले गए। धींगड़ा ने कहा कि डेढ साल पहले 740 ग्राम के क्लैंप पर एक किलो 135 ग्राम की लाइट लगाई जाती थी और अब 810 ग्राम के क्लैंप पर 3 किलो 165 ग्राम की लाइट लगाई जा रही है, जो लटक रही है। लाइटों को खरीदने के लिए टीम गई थी, इसलिए लाइटों में घोटाला नहीं हो पाया, लेकिन अब बाकी के सामान को हल्का लगाकर घोटाला करने में लगे हुए हैं।
20 हजार की पुलिया बनाई नहीं, 6 करोड़ की सड़क बनवाने चले हैं: कटारिया
पार्षद अशोक कटारिया ने निगम अधिकारियों को घेरा। अधिकारी उनके सवालों से बचते नजर आए। एमसी फंड से बनाए जाने वाली करीब 6 करोड़ की सड़कों का विरोध सबसे पहले अशोक कटारिया ने किया। उन्होंने कहा कि ये काम अमरूत का है तब एमसी फंड से क्यों करवाया जा रहा है। जिस पर तकरीबन पार्षदों ने सहमति जताई। कटारिया ने कहा कि पार्षदों के छोटे मोटे काम तो होते नहीं। निगम से 20 हजार की पुलिया तो बनी नहीं और निगम एमसी से फंड से 6 करोड़ की तीन सड़क बनाने चला है। इसे वे नहीं बनने देंगे। अगर बजट वहां लगाया तो हर छोटे से छोटे काम के लिए सभी पार्षदों को निगम अधिकारियों का मुंह ताकना पड़ेगा। इस पर आयुक्त ने कहा कि वे इसके लिए धन की व्यवस्था कराएंगे।
शकुंतला गर्ग ने पूछ लिया, जेबीएम से कितने में बात हुई
जब शहर की सफाई को चार जोन में बांट कर टेंडर लगाने पर चर्चा चल रही थी तो पार्षद शकुंतला गर्ग ने कहा वे वार्ड वार टेंडर लगवाना चाहती हैं। जिससे दूसरे पार्षद या वार्ड को किसी भी वार्ड में हस्तक्षेप न हो। इस पर कई पार्षद बोले की अगर तकनीकी हिसाब से देखा जाए तो इसमें समय काफी ज्यादा लगेगा। इसकी बीच एक पार्षद ने उनके इस सुझाव को पूरे तरीक से नकारते हुए इस पर आपत्ति लगा दी तो पार्षद शकुंतला गर्ग का गुस्सा फूट गया। उन्होंने भरे सदन में पार्षद से पूछ लिया कि क्यों उनकी जेबीएम से कितने में बात हुई है। इस पर पहले सदन में ठहाके लगे, जब बात पार्षद की समझ में आई तो सन्नाटा छा गया।
अब तो हमें भी दिखने लगा है अंधेरा, मांसाखोरों के लिए जगह दो: विधायक प्रमोद विज
स्ट्रीट लाइटों की खरीद व इंस्टॉलेशन पर निगम करीब सवा चार करोड़ का बजट लगा रहा है। इसके बाद भी करीब 6 महीने से ये काम सही तरीके से चालू नहीं हो पाया है। इस पर शहरी विधायक ने भी निगम पर चुटकी लेते हुए कहा कि अब तो हमें भी अंधेरा दिखने लगा है, अब तो लाइटों को लगवाने का काम निगम को कर देना चाहिए। वहीं, शहरी विधायक ने मांसाखोरों के लिए भी जगह मांगी है। इसके लिए उन्होंने वार्ड नंबर 9 के वाटर वर्क्स की जगह पर विचार भी किया है। इस पर निगम सहमति से जल्द मासाखोरों के लिए जगह निर्धारित की जा सकती है।
शहर में कट रही 15 अवैैध कॉलोनियां: पवन गोगोलिया
शहर में कई कॉलोनियों को नियमित करवाने के प्रस्ताव का शुरू में कई पार्षदों ने विरोध किया। जब बताया गया कि ये कॉलोनियों 70 प्रतिशत से ज्यादा बस चुकी हैं। पहले सरकार 79 कॉलोनियों वैध कर चुकी है। इनको भी नियमित करवा देना चाहिए, बाकी अन्य किसी अवैध कॉलोनी का पनपने नहीं दिया जाएगा। इस पर कटारिया ने कहा कि कुछ कॉलोनाइजर गरीब लोगों को लूट रहे हैं। सस्ता प्लाट दिखा उनकी जमा पूंजी को हड़प कर रहे हैं। उन पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। पार्षद पवन गोगलिया और अशोक कटारिया ने कहा कि इस समय भी शहर में 15 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां काटी जा रही हैं और निगम चुप है।
साढ़े 5 करोड से नहीं हुई सफाई तो अब क्या होगी
सफाई के विषय पर पार्षद अश्वनी धींगड़ा ने कहा कि जब शहर की सफाई साढ़े 5 करोड़ में नहीं हो पाई तो अब कैसे होगी। इस पर पार्षद से कहा गया कि इसकी शिकायत वे संबंधित सफाई कंपनी से भी कर सकते हैं, तो पार्षद ने जवाब दिया कि कंपनी को कहने की हिम्मत तो आज तक मेयर तक की नहीं हुई वे तो फिर भी पार्षद हैं। इस पर आयुक्त ने कहा कि नए टेंडरों के नियम व शर्ते निगम सदन अनुसार ही बनाए जाएंगी, ताकि सभी टेंडरों को कोई व्यक्ति विशेष न ले पाए।
मेरे वार्ड में कोई टेंडर ही नहीं: सहगल
मीटिंग के बीच में पार्षद पति विजय सहगल ने कहा कि पिछले दो साल में उनके वार्ड में एक भी विकास कार्य नहीं हुआ है। उनके वार्ड में केवल दो टेंडर अब लगाए गए हैं उन दोनों टेंडरों को भी निगम अधिकारियों ने पुरानी वार्ड बंदी के हिसाब से लगा दिया है। जिससे वे और उनके वार्ड के लोग परेशान हैं। इस पर उन्होंने सदन से गुजारिश की है कि उनके वार्ड के प्रस्तावित सभी एजेंडों को पास करवाकर उनके टेंडर लगवाएं जाएं। जिस पर निगम सदन ने सहमति जाहिर की।