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Panipat News: एनजीटी ने तलब की ब्लीचिंग हाउस की रिपोर्ट, चार को बनाया पार्टी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 27 May 2025 03:12 AM IST
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NGT summoned the report of bleaching house, made four people party
पानीपत। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने औद्योगिक नगरी में पानीपत में अवैध रूप से चल रहे ब्लीचिंग हाउस की रिपोर्ट तलब की है। एनजीटी की प्रधान पीठ ने इसमें हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी), हरियाणा जल संसाधन (संरक्षण, विनियमन और प्रबंधन) प्राधिकरण के मुख्य अभियंता, सिंचाई और जल संसाधन विभाग और उपायुक्त पानीपत को नोटिस जारी किया है। इस मामले में अगली सुनवाई 29 अगस्त को होगी। इसके एक सप्ताह पहले इन सबको अपने जवाब देने होंगे।
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दिल्ली के पर्यावरणविद वरुण गुलाटी ने पिछले दिनों एनजीटी में एक शिकायत दी थी। उन्होंने पानीपत में शहर व गांवों तक ब्लीचिंग हाउस फैलने और इनके द्वारा केमिकल युक्त पानी छोड़ने के आरोप लगाए थे। हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गत दिनों ऐसे 32 ब्लीचिंग हाउस की पहचान की थी। एनजीटी ने अब इस मामले में पर्यावरण संबंधी समस्या पर स्वत: संज्ञान लिया है। एनजीटी के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की गंभीरता को स्वीकार किया है।
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उन्होंने इन सबको नोटिस जारी किया है। मामले में विस्तृत जवाब मांगा और उन्हें हलफनामे के माध्यम से अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए
मुख्य पीठ ने कहा पानीपत में पर्यावरणीय समस्या गंभीर : मुख्य पीठ ने 23 मई को अपने आदेश में कहा कि पानीपत में एक पर्यावरणीय समस्या से संबंधित है। जहां कई अवैध ब्लीचिंग इकाइयां भूमि और पानी को प्रदूषित कर रहे हैं।
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अवैध ब्लीचिंग इकाइयां रासायनिक-मिश्रित अपशिष्ट जल को सीधे नालियों और खुली भूमि में बहाकर पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही हैं।
जो पर्यावरण नियमों का घोर उल्लंघन है। इनमें से अधिकतर अवैध ब्लीचिंग इकाइयां कृषि भूमि पर स्थापित हैं। ये नौल्था, डाहर, बिंझौल, बलाना, पलड़ी, कुराड़, डिडवाड़ी, मांडी, इसराना, ग्वालड़ा, परढाना, चमराड़ा और नारा और जिले के कई अन्य गांवों में फैली हुई हैं। इन ब्लीचिंग हाउसों को संचालन की सहमति (सीटीओ) या स्थापना की सहमति (सीटीई) के बिना स्थापित किया जा रहा है। जो पर्यावरण कानूनों का घोर उल्लंघन है। ब्यूरो
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