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Panipat News: शिक्षा के साथ समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण की सीख

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 05 Sep 2026 02:21 AM IST
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Lessons in social service and environmental conservation alongside education.
संवाद न्यूज एजेंसीपानीपत। अक्षर-अक्षर हमें सिखाते, शब्द-शब्द का अर्थ बताते, कभी प्यार से तो कभी डांट से जीवन जीना सिखाते... ज्ञान का दीप जलाकर अज्ञानता का तिमिर मिटाते हैं शिक्षक। माता-पिता के बाद वही सही मार्ग दिखाते हैं। एक कविता की ये लाइनें एक व्यक्ति के जीवन में शिक्षक के महत्व को स्पष्ट कर रही हैं।
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पांच सितंबर को शिक्षक दिवस है। शिक्षक अब केवल कक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों में संस्कार, सामाजिक जिम्मेदारी और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता भी विकसित कर रहे हैं। पानीपत के कई गुरुजन शिक्षा के साथ समाजसेवा, पर्यावरण संरक्षण, बालिका सशक्तीकरण और खेल गतिविधियों के जरिए विद्यार्थियों को जिम्मेदार नागरिक बनाने में जुटे हैं। शिक्षक दिवस पर ऐसे ही कुछ शिक्षकों की पहल पर एक नजर।
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24 बार किया रक्तदान, 2 हजार पौधे लगाकर मिसाल बने बोधराज श्योराण
वार्ड-10 स्थित राजकीय प्राथमिक पाठशाला के शिक्षक बोधराज श्योराण बच्चों के बीच समाजसेवा की मिसाल बने हुए हैं। उनका मानना है कि सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बचपन से ही विकसित होनी चाहिए।
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बोधराज अब तक 24 बार रक्तदान कर चुके हैं। कोरोना काल में भी उन्होंने समाज और विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से 11 रक्तदान शिविर आयोजित कराए। पर्यावरण संरक्षण के लिए उन्होंने जिले के करीब 12 हजार विद्यार्थियों को हस्ताक्षर अभियान के माध्यम से पौधा लगाने और उसके पेड़ बनने तक देखभाल करने की शपथ दिलाई है। वह बच्चों के साथ मिलकर 2,000 से अधिक पौधे लगा चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को स्कूल ड्रेस और पठन-सामग्री उपलब्ध कराकर उन्हें शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़े रखने का प्रयास भी करते हैं।
छात्राओं के सपनों को बालिका मंच से उड़ान दे रहीं सीमा देवी
दीवाना गांव स्थित राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय की अंग्रेजी अध्यापिका सीमा देवी 26 वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत हैं। उनका मानना है कि शिक्षित और आत्मनिर्भर बेटी न केवल अपना जीवन संवारती है, बल्कि दो परिवारों का मार्गदर्शन करती है।
उन्होंने विद्यालय में बालिका मंच का गठन किया है, जिसके माध्यम से छात्राओं से संवाद कर उनकी समस्याओं को समझती हैं। वह बालिकाओं को 10वीं या 12वीं के बाद भी उच्च शिक्षा, खेल, व्यावसायिक कौशल और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करती हैं। सीमा देवी बच्चों को डांटने या सजा देने के बजाय उनकी समस्या का कारण जानने पर जोर देती हैं। इससे विद्यार्थी बिना झिझक अपनी बात रख पाते हैं। वह विद्यार्थियों के साथ नियमित पौधारोपण भी करती हैं, जिससे उनमें पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ रही है।

औषधीय वाटिका से खेल के मैदान तक हरिओम भारद्वाज की अनूठी पहल
बिंझौल गांव के राजकीय मॉडल संस्कृति विद्यालय में कार्यरत जेबीटी हरिओम भारद्वाज पढ़ाई के साथ पर्यावरण, खेल और स्काउट्स-गाइड्स गतिविधियों में भी सक्रिय हैं। वह पानीपत के कब डीओसी (डिस्ट्रिक्ट ऑर्गेनाइजिंग कमिश्नर) की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। उनके नेतृत्व में कब और बुलबुल गतिविधियों में पानीपत जिले ने राज्य स्तर पर दूसरा स्थान हासिल किया। इसके लिए उन्हें हरियाणा के राज्यपाल की ओर से प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जा चुका है। पर्यावरण संरक्षण के कार्यों की शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा भी सराहना कर चुके हैं। विद्यालय में उनकी विशेष पहल किचन गार्डन सह औषधीय वाटिका है। खेलों में भी उनके मार्गदर्शन में विद्यालय के विद्यार्थियों ने राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिताओं में पदक जीतकर जिले का नाम रोशन किया है।
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