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कारगिल विजय दिवस: शहीदों को याद कर नम हो जाती हैं आंखें
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इसराना। पूठर में शहीद विजय सिंह की प्रतिमा
- फोटो : Panipat
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इसराना। कारगिल में शहीद हुए अपने लाल की याद आते ही परिजनों की आंखें नम हो जाती हैं, लेकिन सिर गर्व से ऊंचा रहता है। हालांकि मलाल है कि शहादत देने वाले बेटों को प्रशासन भूल गया लेकिन तसल्ली यह है कि परिजन गांव वासियों के साथ हर वर्ष अपने स्तर से विजय दिवस मनाते हैं।
पानीपत के खंड इसराना के गांव पूठर निवासी शहीद विजय सिंह और गांव बांध निवासी शहीद अमरदीप सिंह की कारगिल युद्ध में दी गई शहादात को पूरा क्षेत्र सलाम करता है। शहीद विजय सिंह सेना की जाट रेजीमेंट में हवलदार थे। गांव पूठर में रघबीर सिंह के घर 11 दिसंबर 1959 को जन्मे और 27 अक्तूबर 1979 को बरेली से जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए विजय सिंह ने कारगिल युद्ध में 12 जून 1999 को जान न्यौछावर कर दी। उधर, गांव बांध से शहीद अमरदीप सिंह पांच अप्रैल 1974 को प्रेम सिंह के घर पैदा हुए और 22 फरवरी 1995 को 16 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में सिपाही भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध में वह 8 मई 1999 को शहीद हुए थे।
साल में दो बार आती है शहादत की याद
शहीदों के परिजनों को मलाल है कि अब तक सरकार और प्रशासन ने कारगिल विजय दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद नहीं किया। परिजन ही अपने स्तर पर देश की रक्षा के लिए शहीद हुए रणबाकुंरों को याद करते हैं। परिजनों का कहना है कि साल में 26 जनवरी और 15 अगस्त को ही शहीदों को याद किया जाता है। पूठर के शहीद विजय सिंह की पत्नी बिमला देवी को सरकार ने इसराना में गैस एजेंसी दी है और शहीद अमरदीप सिंह के परिजनों को इसराना के पास हाईवे के साथ पेट्रोल पंप दिया गया है।
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लौटने का वायदा जो पूरा नहीं हो सका
कारगिल में शहादत से कुछ दिन पूर्व शहीद विजय सिंह ने अपनी पत्नी बिमला देवी और शहीद अमरदीप सिंह ने भाई महिपाल को पत्र लिखकर लौटने का वादा किया था। उनके लौटने का इंतजार बढ़ता ही चला गया और एक वक्त पता चला कि कभी नहीं लौटेंगे। उनकी याद आते ही परिजन भावुक हो जाते हैं।
बदहाल है शहीद के नाम बना स्कूल भवन
गांव बांध में शहीद अमरदीप सिंह राजकीय माध्यमिक स्कूल भवन का नाम शहीद के नामरख सरकार, प्रशासन व शिक्षा विभाग स्कूल की देखरेख भी भूल गया। स्कूल भवन बदतर हालत में है। ग्रामीणों के साथ शहीद के परिजनों ने भी सरकार से जर्जर इमारत की सुध लेने की कई बार मांग उठाई है लेकिन नतीजा सिफर है। गांव बांध में शहीद अमरदीप का स्मारक बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और ग्राम पंचायत ने कोई ध्यान नहीं दिया है।
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पानीपत के खंड इसराना के गांव पूठर निवासी शहीद विजय सिंह और गांव बांध निवासी शहीद अमरदीप सिंह की कारगिल युद्ध में दी गई शहादात को पूरा क्षेत्र सलाम करता है। शहीद विजय सिंह सेना की जाट रेजीमेंट में हवलदार थे। गांव पूठर में रघबीर सिंह के घर 11 दिसंबर 1959 को जन्मे और 27 अक्तूबर 1979 को बरेली से जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए विजय सिंह ने कारगिल युद्ध में 12 जून 1999 को जान न्यौछावर कर दी। उधर, गांव बांध से शहीद अमरदीप सिंह पांच अप्रैल 1974 को प्रेम सिंह के घर पैदा हुए और 22 फरवरी 1995 को 16 ग्रेनेडियर रेजीमेंट में सिपाही भर्ती हुए थे। कारगिल युद्ध में वह 8 मई 1999 को शहीद हुए थे।
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साल में दो बार आती है शहादत की याद
शहीदों के परिजनों को मलाल है कि अब तक सरकार और प्रशासन ने कारगिल विजय दिवस पर कोई कार्यक्रम आयोजित कर उन्हें याद नहीं किया। परिजन ही अपने स्तर पर देश की रक्षा के लिए शहीद हुए रणबाकुंरों को याद करते हैं। परिजनों का कहना है कि साल में 26 जनवरी और 15 अगस्त को ही शहीदों को याद किया जाता है। पूठर के शहीद विजय सिंह की पत्नी बिमला देवी को सरकार ने इसराना में गैस एजेंसी दी है और शहीद अमरदीप सिंह के परिजनों को इसराना के पास हाईवे के साथ पेट्रोल पंप दिया गया है।
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लौटने का वायदा जो पूरा नहीं हो सका
कारगिल में शहादत से कुछ दिन पूर्व शहीद विजय सिंह ने अपनी पत्नी बिमला देवी और शहीद अमरदीप सिंह ने भाई महिपाल को पत्र लिखकर लौटने का वादा किया था। उनके लौटने का इंतजार बढ़ता ही चला गया और एक वक्त पता चला कि कभी नहीं लौटेंगे। उनकी याद आते ही परिजन भावुक हो जाते हैं।
बदहाल है शहीद के नाम बना स्कूल भवन
गांव बांध में शहीद अमरदीप सिंह राजकीय माध्यमिक स्कूल भवन का नाम शहीद के नामरख सरकार, प्रशासन व शिक्षा विभाग स्कूल की देखरेख भी भूल गया। स्कूल भवन बदतर हालत में है। ग्रामीणों के साथ शहीद के परिजनों ने भी सरकार से जर्जर इमारत की सुध लेने की कई बार मांग उठाई है लेकिन नतीजा सिफर है। गांव बांध में शहीद अमरदीप का स्मारक बनाने के लिए सरकार, प्रशासन और ग्राम पंचायत ने कोई ध्यान नहीं दिया है।