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मैंने आपको नदी पार कराई, आप मुझे भवसागर से पार करा देना
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पानीपत। जय भारत ड्रामेटिक क्लब के सदस्य रामलाली प्रस्तुत करते हुए।
- फोटो : Panipat
जय भारत ड्रामेटिक क्लब के मंच पर रविवार को राम बनवास भाग-2 का शानदार मंचन किया गया। श्री रामचंद्र, माता कौशल्या से विदा लेकर सीता जी के पास जाते हैं। सीता जी बहुत खुश दिखाई दे रही थी। रामचंद्र ने उन्हें वनवास की बात बताई तो सीता जी भी वन में जाने की जिद करने लगी। इसी मध्य लक्ष्मण जी वहां पहुंच जाते हैं और भरत के लिए अपशब्द बोलते हैं, परंतु श्रीराम जी उन्हें बताते हैं कि इसमें भरत का कोई दोष नहीं है। लक्ष्मण जी भी जिद करने लगते हैं कि जहां आप चलोगे, भैया मैं वहां जाऊंगा, आपकी सेवा में रहूंगा।
सभी मिलकर रानी कैकेई के महल में आते हैं, जहां राजा दशरथ इस माहौल से अस्वस्थ हैं। रानी कैकेई सभी को पहनने के लिए गेरुआ वस्त्र देती है। राजा दशरथ विरोध करते हैं, परंतु कुछ भी नहीं हो हो पाता। फिर राम, लक्ष्मण और सीता जी वन के लिए चल पड़ते हैं और अयोध्या को अंतिम प्रणाम करते हैं।
श्रीराम नदी पार करने के लिए केवट से प्रार्थना करते हैं। केवट हमें नदी पार करा दो, हम आपका एहसान कभी नहीं भूलेंगे। परंतु केवट मना कर देता है कि मेरी काठ की नाव है। अगर आपने इस पर पांव रख दिया तो यह भी स्त्री बन जाएगी। मैं फिर अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करूंगा। केवट श्री राम जी के चरण पखारता है। इत्मीनान होने पर उनको नदी पार करा देता है। नदी पार कराने पर श्रीराम उसे उतराई देना चाहते हैं, परंतु वह उतराई नहीं लेता। वह कहता है हे प्रभु जैसे मैंने आपको नदी पार कराई है।
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आप भी मुझे भवसागर से पार कर देना। प्रभु राम उनकी बात मान लेते हैं और आगे बढ़ जाते जाते हैं। महासचिव केसर कमल शर्मा ने सभी दर्शकों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर अमरजीत गाबा, हीरा कपूर, हरीश नागपाल, राजकुमार बोहरा, राजेश धीमान आदि उपस्थित रहे।
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सभी मिलकर रानी कैकेई के महल में आते हैं, जहां राजा दशरथ इस माहौल से अस्वस्थ हैं। रानी कैकेई सभी को पहनने के लिए गेरुआ वस्त्र देती है। राजा दशरथ विरोध करते हैं, परंतु कुछ भी नहीं हो हो पाता। फिर राम, लक्ष्मण और सीता जी वन के लिए चल पड़ते हैं और अयोध्या को अंतिम प्रणाम करते हैं।
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श्रीराम नदी पार करने के लिए केवट से प्रार्थना करते हैं। केवट हमें नदी पार करा दो, हम आपका एहसान कभी नहीं भूलेंगे। परंतु केवट मना कर देता है कि मेरी काठ की नाव है। अगर आपने इस पर पांव रख दिया तो यह भी स्त्री बन जाएगी। मैं फिर अपने बच्चों का पालन पोषण कैसे करूंगा। केवट श्री राम जी के चरण पखारता है। इत्मीनान होने पर उनको नदी पार करा देता है। नदी पार कराने पर श्रीराम उसे उतराई देना चाहते हैं, परंतु वह उतराई नहीं लेता। वह कहता है हे प्रभु जैसे मैंने आपको नदी पार कराई है।
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आप भी मुझे भवसागर से पार कर देना। प्रभु राम उनकी बात मान लेते हैं और आगे बढ़ जाते जाते हैं। महासचिव केसर कमल शर्मा ने सभी दर्शकों का धन्यवाद किया। इस अवसर पर अमरजीत गाबा, हीरा कपूर, हरीश नागपाल, राजकुमार बोहरा, राजेश धीमान आदि उपस्थित रहे।